देशभर में आज रविवार, 8 नवंबर को दीपों का महापर्व दीपावली श्रद्धा, उल्लास और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। कार्तिक मास की अमावस्या पर मनाया जाने वाला यह पर्व केवल दीप जलाने और खुशियां बांटने का त्योहार नहीं, बल्कि अंधकार पर प्रकाश, अधर्म पर धर्म और निराशा पर आशा की विजय का प्रतीक भी है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दीपावली की रात माता महालक्ष्मी पृथ्वी पर विचरण करती हैं और स्वच्छ, पवित्र तथा प्रकाश से जगमगाते घरों में विराजमान होती हैं।
इस वर्ष दीपावली पर रविवार, अमावस्या तिथि, स्वाति नक्षत्र और आयुष्मान योग का विशेष संयोग बन रहा है। मान्यता है कि इस शुभ अवसर पर विधि-विधान से माता लक्ष्मी, भगवान गणेश और कुबेर देवता की पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि, धन-धान्य और खुशहाली आती है। आइए जानते हैं इस वर्ष दीपावली पर कौन-सा शुभ संयोग बन रहा है, लक्ष्मी पूजन का सबसे अच्छा मुहूर्त क्या है और किस प्रकार घर में विधि-विधान से पूजा करनी चाहिए।
इस वर्ष दीपावली पर बन रहा है विशेष शुभ संयोग
ज्योतिषीय पंचांग के अनुसार, इस वर्ष दीपावली रविवार के दिन पड़ रही है। रविवार सूर्यदेव को समर्पित माना जाता है। वहीं कार्तिक अमावस्या पर माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा का विशेष महत्व है।
इस बार के प्रमुख पंचांग योग इस प्रकार हैं।
वार: रविवार
तिथि: कार्तिक अमावस्या
नक्षत्र: स्वाति
योग: आयुष्मान योग (रात्रि लगभग 3:02 बजे तक)
अमावस्या प्रारंभ: 8 नवंबर सुबह 11:27 बजे के लगभग
अमावस्या समाप्त: 9 नवंबर दोपहर 12:31 बजे के लगभग
धार्मिक मान्यताओं में आयुष्मान योग को शुभ कार्यों के लिए अनुकूल माना जाता है। स्वाति नक्षत्र स्वतंत्रता, प्रगति और सकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है। रविवार और अमावस्या का यह संयोग दीपावली के आध्यात्मिक महत्व को और विशेष बनाता है।
लक्ष्मी पूजन का सबसे शुभ मुहूर्त कब है?
दीपावली पर माता लक्ष्मी की पूजा के लिए प्रदोष काल और स्थिर वृषभ लग्न को विशेष महत्व दिया जाता है। उज्जैन के स्थानीय पंचांग के अनुसार इस वर्ष लक्ष्मी पूजन का सर्वोत्तम समय शाम 6:09 बजे से रात 8:07 बजे तक रहेगा।
उज्जैन के अनुसार पूजा का शुभ समय
सूर्यास्त: शाम 5:45 बजे के लगभग
प्रदोष काल: शाम 5:45 बजे से रात 8:19 बजे तक
लक्ष्मी पूजन का श्रेष्ठ मुहूर्त: शाम 6:09 बजे से रात 8:07 बजे तक
महानिशीथ काल: रात 11:45 बजे से 9 नवंबर को रात 12:36 बजे तक
गृहस्थ परिवारों के लिए प्रदोष काल में स्थिर वृषभ लग्न के दौरान लक्ष्मी-गणेश पूजन को विशेष रूप से शुभ माना जाता है। सामान्य गृहस्थों के लिए शाम का यही मुहूर्त सबसे उपयुक्त है।
ध्यान रखें कि मुहूर्त शहर के अनुसार बदल सकता है। इसलिए अन्य शहरों के श्रद्धालु अपने स्थानीय पंचांग के अनुसार समय निर्धारित करें।
दीपावली पर क्यों होती है मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां लक्ष्मी धन, वैभव, ऐश्वर्य और सुख-समृद्धि की अधिष्ठात्री देवी हैं। वहीं भगवान गणेश बुद्धि, विवेक और विघ्नों को दूर करने वाले देवता माने जाते हैं।
इसीलिए दीपावली पर लक्ष्मी जी के साथ गणेश जी की पूजा की जाती है। मान्यता है कि धन के साथ सद्बुद्धि और विवेक होना भी आवश्यक है। भगवान कुबेर को धन का देवता माना जाता है, इसलिए इस दिन उनकी पूजा का भी विशेष महत्व है।
दीपावली की रात मां लक्ष्मी की आराधना करने से घर में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहने की कामना की जाती है।
लक्ष्मी पूजन के लिए आवश्यक सामग्री
पूजा प्रारंभ करने से पहले सभी सामग्री एकत्र कर लें, ताकि पूजा के दौरान किसी प्रकार की परेशानी न हो।
माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की प्रतिमा या चित्र।
पूजा की चौकी और लाल अथवा पीला कपड़ा।
रोली, कुमकुम, हल्दी और अक्षत।
फूल, माला और कमल का फूल।
धूप, दीपक, घी और रूई की बत्ती।
गंगाजल और शुद्ध जल।
पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद और शक्कर)।
फल, मिठाई, खील और बताशे।
पान, सुपारी, लौंग और इलायची।
कलश, नारियल और आम के पत्ते।
चांदी या तांबे का सिक्का।
पूजा की थाली और घंटी।
घर में कैसे करें मां लक्ष्मी की पूजा? जानिए संपूर्ण विधि
पहला चरण: घर की सफाई और सजावट
दीपावली के दिन सुबह घर की अच्छी तरह सफाई करें। मुख्य द्वार को तोरण, फूलों और रंगोली से सजाएं। शाम को घर के मुख्य द्वार और पूजा स्थल पर दीपक जलाएं। धार्मिक मान्यता है कि स्वच्छ और सुंदर घर में माता लक्ष्मी का आगमन होता है।
दूसरा चरण: पूजा की चौकी तैयार करें
शाम को शुभ मुहूर्त से पहले पूजा की चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं। उस पर माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करें। पास में कुबेर देवता का प्रतीक या चित्र भी रख सकते हैं। प्रतिमाओं के सामने चावल, फूल और पूजा सामग्री रखें।
तीसरा चरण: कलश स्थापना करें
एक तांबे या मिट्टी के कलश में शुद्ध जल भरें। उसमें सुपारी, सिक्का और अक्षत डालें। कलश के मुख पर आम के पत्ते लगाकर नारियल स्थापित करें। कलश को पूजा स्थल पर रखें और भगवान का स्मरण करें।
चौथा चरण: गणेश जी का पूजन करें
किसी भी शुभ पूजा का प्रारंभ भगवान गणेश की आराधना से किया जाता है। सबसे पहले गणेश जी को जल, अक्षत, दूर्वा, पुष्प और मोदक अर्पित करें।
गणेश मंत्र:
॥ ॐ गं गणपतये नमः ॥
इसके बाद भगवान गणेश से परिवार की सुख-शांति और सभी विघ्नों को दूर करने की प्रार्थना करें।
पांचवां चरण: माता लक्ष्मी का पूजन करें
अब माता लक्ष्मी को गंगाजल और पंचामृत से प्रतीकात्मक स्नान कराएं अथवा जल अर्पित करें। उन्हें लाल चुनरी, कुमकुम, अक्षत, कमल या अन्य पुष्प, माला और मिठाई अर्पित करें।
इसके बाद माता लक्ष्मी के सामने घी का दीपक जलाएं और निम्न मंत्र का जाप करें।
लक्ष्मी बीज मंत्र:
॥ ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः ॥
इस मंत्र का 108 बार जाप करना शुभ माना जाता है।
माता लक्ष्मी का एक अन्य प्रचलित मंत्र:
॥ नमस्तेस्तु महामाये श्रीपीठे सुरपूजिते।
शंखचक्रगदाहस्ते महालक्ष्मि नमोऽस्तुते॥
इस मंत्र का श्रद्धापूर्वक जाप कर माता से धन, धान्य, आरोग्य और परिवार की खुशहाली की कामना करें।
छठा चरण: भगवान कुबेर की पूजा करें
माता लक्ष्मी के पूजन के बाद भगवान कुबेर का स्मरण करें। उनके सामने दीपक जलाकर पुष्प और अक्षत अर्पित करें।
कुबेर मंत्र:
॥ ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधान्याधिपतये।
धनधान्यसमृद्धिं मे देहि दापय स्वाहा॥
इस मंत्र के जाप से धन-धान्य और आर्थिक समृद्धि की कामना की जाती है।
सातवां चरण: लक्ष्मी आरती करें
पूजा के अंत में माता लक्ष्मी, भगवान गणेश और कुबेर देवता की आरती करें। परिवार के सभी सदस्य आरती में शामिल हों।
माता लक्ष्मी की प्रचलित आरती ‘ॐ जय लक्ष्मी माता’ श्रद्धापूर्वक गाएं। इसके बाद सभी को प्रसाद वितरित करें।
दीपावली पर कितने दीपक जलाने चाहिए और कहां रखें?
दीपावली का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा दीपदान है। धार्मिक मान्यता के अनुसार दीपक जलाने से अज्ञान और नकारात्मकता का अंधकार दूर होता है।
इस दिन घर के मुख्य द्वार, पूजा स्थल, तुलसी चौरा, आंगन, छत और घर के अलग-अलग हिस्सों में दीपक जलाने की परंपरा है।
विशेष रूप से:
मुख्य द्वार पर दीपक जलाएं।
पूजा स्थल पर घी का दीपक रखें।
तुलसी के पौधे के पास दीपदान करें।
घर के आंगन और बालकनी में दीपक सजाएं।
जरूरतमंदों और मंदिरों में भी दीपदान करें।
दीपक जलाते समय सुरक्षा का ध्यान रखें और उन्हें पर्दों, कागज या ज्वलनशील वस्तुओं से दूर रखें।
दीपावली पर क्या करें और किन बातों से बचें?
क्या करें
सुबह घर की सफाई और पूजा स्थल को स्वच्छ रखें।
परिवार के सभी सदस्य मिलकर लक्ष्मी-गणेश पूजन करें।
जरूरतमंदों को भोजन, वस्त्र और मिठाई दान करें।
बड़ों का आशीर्वाद लें और छोटों को स्नेह दें।
मिट्टी के दीपक जलाकर पर्यावरण के अनुकूल दीपावली मनाएं।
किन बातों से बचें
पूजा के दौरान क्रोध, विवाद और अपशब्दों से बचें।
किसी का अपमान न करें।
जुआ और अनावश्यक दिखावे से दूर रहें।
पटाखे चलाते समय बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा का ध्यान रखें।
पशु-पक्षियों और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाले तेज आवाज के पटाखों से बचें।
दीपावली का धार्मिक महत्व: भगवान श्रीराम के अयोध्या लौटने की खुशी में जले थे दीप
पौराणिक मान्यता के अनुसार, भगवान श्रीराम ने लंकापति रावण का वध कर माता सीता और भाई लक्ष्मण के साथ 14 वर्ष का वनवास पूरा किया था। जब भगवान श्रीराम अयोध्या लौटे, तब नगरवासियों ने उनके स्वागत में पूरे अयोध्या नगर को दीपों से सजाया था।
तभी से दीपावली को प्रकाश और खुशियों के महापर्व के रूप में मनाने की परंपरा जुड़ी हुई है।
एक अन्य धार्मिक मान्यता के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान कार्तिक अमावस्या के दिन माता लक्ष्मी प्रकट हुई थीं। इसी कारण इस दिन लक्ष्मी पूजन का विशेष महत्व माना जाता है।
दीपावली को बनाएं खुशियों और सेवा का पर्व
दीपावली केवल अपने घर को रोशन करने का अवसर नहीं, बल्कि दूसरों के जीवन में भी खुशियों का प्रकाश फैलाने का पर्व है। इस अवसर पर परिवार के साथ पूजा करने के अलावा बच्चों को दीप सजाने, रंगोली बनाने और भारतीय परंपराओं से परिचित कराने का अवसर दें।
किसी जरूरतमंद परिवार के घर मिठाई और दीपक पहुंचाएं। बुजुर्गों के साथ समय बिताएं और समाज में प्रेम, सहयोग तथा सद्भाव का संदेश दें।
संदेश: दीपावली का वास्तविक अर्थ केवल घरों में दीप जलाना नहीं, बल्कि मन से अहंकार, ईर्ष्या और नकारात्मकता के अंधकार को मिटाकर प्रेम, सद्भाव और मानवता का प्रकाश फैलाना है।
मां महालक्ष्मी और भगवान गणेश सभी के जीवन में सुख, शांति, आरोग्य और समृद्धि प्रदान करें। सभी देशवासियों को दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं।







