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बस्तर की आदिवासी वीरांगनाओं के हौसले किसी से कम नहीं

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बस्तर संवाददाता  – अर्जुन झा
= मुझे गर्व है कि मेरे पति नक्सल नासूर को खत्म करते बलिदान हुए: शहीद की विधवा पूजा नाग =
= बलिदानी डीआरजी जवान दिनेश नाग को गमगीन माहौल में अंतिम विदाई =

जगदलपुर। बस्तर की आदिवासी वीरांगनाओं के हौसले किसी से कम नहीं हैं। नक्सल मोर्चे पर लड़ते हुए बस्तर के दर्जनों आदिवासी जवान शहीद हो चुके हैं। इन बलिदानी वीर जवानों की विधवाएं उन कोमलांगी शहरी महिलाओं को नसीहत देती प्रतीत हो रही हैं, जो देशभक्ति के दिखावटी कार्यक्रम आयोजित कर फोटो सेशन कराती और मीडिया में सुर्खियां बटोरती हैं। बस्तर की आदिवासी बेटी पूजा नाग भी इन्ही वीरांगनाओं की सूची में अपना नाम दर्ज करा चुकी हैं। पूजा के पति दिनेश नाग दो दिन पहले ही नक्सलियों से लोहा लेते हुए वीरगति को प्राप्त हो गए थे।


बस्तर संभाग के बीजापुर जिला अंतर्गत भोपालपटनम अनुभाग के उल्लूर घाटी के चिल्लामरका जंगल में आइईडी ब्लास्ट में बलिदान जवान दिनेश नाग को गमगीन माहौल में बीजापुर में अंतिम विदाई दी। बीजापुर नयापारा निवासी बलिदान डीआरजी जवान दिनेश नाग की गर्भवती पत्नी पूजा नाग, 9 वर्षीय पुत्र प्रियांश नाग, दिनेश नाग के बड़े भाई उमेश नाग सहित परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। भारी बारिश व सैकड़ों गणमान्य नागरिकों, पुलिस जवानों व भाजपा कार्यकर्ताओं की मौजूदगी में बीजापुर के नया पारा में दिनेश नाग का अंतिम संस्कार किया गया। शहीद दिनेश नाग के बड़े भाई उमेश नाग पुलिस विभाग में प्रधान आरक्षक पद पर कार्यरत हैं। दिनेश नाग को 2016-17 में आरक्षक में नौकरी मिली थी। दोनों भाई पुलिस की नौकरी में रहने के कारण नक्सलियों के निशाने पर आ गए थे। दिनेश नाग की कर्तव्यनिष्ठा और व जांबाजी के कारण उन्हें डीआरजी में तैनात कर दिया गया था। बलिदानी दिनेश नाग के साथियों ने बताया कि दिनेश ने नक्सलियों से लोहा लेते समय काफी हिम्मत दिखाई थी। वे नक्सलियों के साथ कई मुठभेड़ों में शामिल रहा। जानकारी अनुसार दिनेश नाग बेहतरीन कार्य व जांबाजी के कारण डीआरजी में चर्चित रहे हैं। बताया गया है कि प्रधान आरक्षक की पदोन्नति सूची में भी उनका नाम शामिल था। सोमवार को अंतिम विदाई के समय डीआरजी के जवानों के आंखों में आसूं देखें गए। माता पिता को खोने के बाद दोनों भाई पढ़ाई के बाद नौकरी करने की ठानी और पुलिस विभाग में भर्ती हुए।
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पति पर मुझे गर्व: पूजा नाग
बलिदानी डीआरजी जवान दिनेश नाग की गर्भवती पत्नी पूजा को अपने पति की जुदाई का गम तो है, मगर उन्हें पति के कर्तव्य पथ पर बलिदान हो जाने का बहुत गर्व भी है। पूजा नाग कहती हैं कि नक्सली नासूर को खत्म करने की जंग में मेरे पति बलिदान हुए हैं, उन्होंने बस्तर और छत्तीसगढ़ को नक्सलियों की बुरी नजर से बचाने के लिए अपने प्राण की आहूति दी है, मुझे उन पर गर्व है। वे बहुत हिम्मत वाले इंसान थे। उनका हौसला और बलिदान मेरे शेष जीवन का संबल बनेगा।
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यूं ही नहीं आया ये हौसला
बस्तर के युवाओं, बेटी, बहुओं में ऐसा हौसला यूं ही नहीं आ गया है। केंद्र और राज्य की सरकारों ने नक्सलियों के विनाश और बस्तर के विकास के लिए जो ठोस कदम उठाए हैं, उन कदमों ने भी इन हौसलों को बुलंदी दी है। शहीद जवानों को जो सम्मान मिलता है और उनके परिवारों को जो सुविधाएं सरकार उपलब्ध कराती है, उससे भी बस्तर के लोग प्रभावित हैं। खासकर राज्य के उप मुख्यमंत्री एवं गृहमंत्री विजय शर्मा और वन मंत्री केदार कश्यप की सदाशयता एवं संवेदनशीलता भी बस्तर की वीरांगना बहू बेटियों और साहसी जवानों का हौसला बढ़ाने में सहायक रही हैं। गृहमंत्री विजय शर्मा बलिदानी परिवारों और नक्सली घटनाओं में हताहत होने वाले जवानों एवं आम नागरिकों के सुख दुख में हमेशा साथ खड़े नजर आते हैं। वहीं बस्तर के युवा आदिवासी नेता एवं वन मंत्री केदार कश्यप भी सुकमा, बीजापुर, नारायणपुर, दंतेवाड़ा जैसे नक्सलग्रस्त जिलों के अति संवेदनशील गांवों का सतत दौरा कर लोगों को यह विश्वास दिलाते रहते हैं कि हर संकट की घड़ी में केंद्र की मोदी सरकार और राज्य की विष्णु देव साय सरकार आप लोगों के साथ खड़ी है। भाजपा के इन दोनों युवा जनप्रतिनिधियों ने बस्तर में संवेदनशीलता की मिसाल पेश की है।

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