संवाददाता – राजेन्द्र जायसवाल
जांजगीर चांपा/सक्ती/रायपुर । भारतीय जनाधिकार पार्टी के संयोजक अध्यक्ष दीपक दुबे ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बताता कि सिंघीतराई स्थित पावर प्लांट में 14 अप्रैल 2026 को हुए भीषण बॉयलर/स्टीम विस्फोट को कॉर्पोरेट आपराधिक लापरवाही, असुरक्षित औद्योगिक पुनरुद्धार, जानबूझकर मानव जीवन को खतरे में डालने, श्रमिक सुरक्षा मानकों के उल्लंघन एवं प्रशासनिक विफलता का गंभीर औद्योगिक हादसा: “Corporate Criminal Negligence” का मामला है जिसके लिए चेयरमैन अनिल अग्रवाल सहित जिम्मेदार की गिरफ्तारी हो इनके विरुद्ध तत्काल नामजद FIR दर्ज कर गिरफ्तारी, साक्ष्य जब्ती, स्वतंत्र SIT जांच, प्लांट सीलिंग, उच्च मुआवजा एवं 07 दिवस की समयसीमा में कठोर कार्रवाई सुनिश्चित किए जाने की मांग करते हुवे राज्यपाल मुख्यमंत्री मुख्य सचिव संबंधित अधिकारियों से की है।
उन्होंने बताया कि उक्त घटना में अनेक श्रमिकों की मृत्यु एवं बड़ी संख्या में श्रमिक गंभीर रूप से झुलस गए, जो औद्योगिक सुरक्षा तंत्र की घोर विफलता को दर्शाता है, उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार उच्च दबाव एवं तकनीकी खराबी के कारण विस्फोट हुआ जिससे अत्यधिक तापमान की भाप फैलकर श्रमिकों को झुलसा गई तथा घटना के समय किसी प्रकार की प्रभावी चेतावनी या सुरक्षित निकासी व्यवस्था उपलब्ध नहीं थी।
उन्होंने कहा कि संबंधित परियोजना पूर्व में अधूरी एवं 9 वर्षों से बंद रही थी जिसे अधिग्रहण के पश्चात बिना समुचित तकनीकी मूल्यांकन, संरचनात्मक परीक्षण, व्यापक सुरक्षा सत्यापन एवं पूर्ण ओवरहॉल के जल्दबाजी में पुनः चालू किया गया, श्रमिकों को पर्याप्त सुरक्षा उपकरण, प्रशिक्षण एवं सुरक्षित कार्य वातावरण उपलब्ध नहीं कराया गया तथा ठेका श्रमिकों से जोखिमपूर्ण कार्य कराना प्रत्यक्ष आपराधिक लापरवाही को दर्शाता है, साथ ही निरीक्षण एवं सेफ्टी ऑडिट केवल औपचारिकता होने की आशंका से संगठित लापरवाही एवं मिलीभगत का संकेत मिलता है।
उन्होंने आधिकारिक पर्यावरणीय अभिलेखों एवं EAC/Parivesh दस्तावेजों का हवाला देते हुए कहा कि परियोजना वर्ष 2016 तक केवल लगभग 60% ही पूर्ण थी, जिसके पश्चात यह वित्तीय विफलता के कारण बंद हो गई एवं IBC/CIRP प्रक्रिया दिवालिया में चली गई। इसको कबाड़ा के कीमत पर वेदांता द्वारा अधिग्रहित की गई — जिससे यह सिद्ध होता है कि परियोजना पूर्ण विकसित एवं सुरक्षित अवस्था में नहीं थी।
इसके बावजूद वेदांता समूह के चेयरमैन अनिल अग्रवाल द्वारा बिना समुचित पुनर्मूल्यांकन एवं अद्यतन सुरक्षा परीक्षण के संचालन प्रारंभ किया गया, पुरानी पर्यावरणीय स्वीकृतियों एवं सार्वजनिक सुनवाई से छूट के आधार पर परियोजना को आगे बढ़ाया गया, जबकि पर्यावरणीय डेटा में त्रुटियां एवं उच्च जोखिम संबंधी शर्तें पूर्व से ही दर्ज थीं, जो स्पष्ट रूप से तकनीकी, पर्यावरणीय एवं नियामक स्तर पर गंभीर खामियों को दर्शाता है सरकार द्वारा परियोजना को “Public Hearing” से छूट दी गई, जिससे स्थानीय जनता एवं संभावित जोखिमों का समुचित मूल्यांकन नहीं किया गया — यह गंभीर प्रक्रियात्मक त्रुटि है। जिसके लिए केंद्र और राज्य सरकार दोनों जिम्मेदार हैं जो भ्रष्ट नौकर शाह के पद के दुरुपयोग करने की वजह से हुआ है परियोजना की मूल Environmental Clearance वर्ष 2010 की थी, जिसकी वैधता 2016, 2017 एवं 2020 तक बढ़ाई गई — अर्थात यह पुराने डिजाइन एवं पुराने सुरक्षा मानकों पर आधारित थी।
EAC द्वारा PM2.5 डेटा में त्रुटियां पाई गईं — जो तकनीकी एवं पर्यावरणीय मूल्यांकन में गंभीर खामियों को दर्शाता है।
उन्होंने कहा कि यह घटना कोई साधारण दुर्घटना न होकर कॉर्पोरेट आपराधिक लापरवाही, औद्योगिक हादसा: “Corporate Criminal Negligence” का गंभीर मामला है असुरक्षित औद्योगिक संचालन एवं मानव जीवन को जानबूझकर जोखिम में डालने का परिणाम है, जिसमें चेयरमैन द्वारा अपने व्यावसायिक लाभ को प्राथमिकता देते हुए श्रमिकों की सुरक्षा की अनदेखी की गई तथा संबंधित केंद्र और राज्य सरकार के शासकीय एवं नियामक तंत्र द्वारा निगरानी में विफलता स्पष्ट रूप से परिलक्षित होती है।
उन्होंने मांग की कि दोषी प्रबंधन, शीर्ष अधिकारी, प्लांट प्रभारी, सेफ्टी अधिकारी एवं संबंधित ठेकेदारों के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता की प्रासंगिक धाराओं के अंतर्गत आपराधिक प्रकरण दर्ज कर गिरफ्तारी की जाए, घटना से संबंधित सभी तकनीकी अभिलेख, लॉगबुक, डिजिटल डेटा एवं CCTV साक्ष्यों को तत्काल जब्त कर संरक्षित किया जाए, स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच हेतु उच्च स्तरीय SIT का गठन कर समयबद्ध जांच सुनिश्चित की जाए तथा जांच पूर्ण होने तक संबंधित इकाई का संचालन तत्काल बंद कर सील किया जाए।
उन्होंने मृतकों के आश्रितों को न्यूनतम ₹50,00,000 मुआवजा एवं परिवार के एक सदस्य को रोजगार, गंभीर घायलों को ₹15,00,000 सहायता एवं उच्च स्तरीय निःशुल्क उपचार तथा सभी प्रभावितों के लिए समग्र पुनर्वास योजना लागू करने की मांग की, साथ ही विगत वर्षों के सेफ्टी ऑडिट, निरीक्षण एवं स्वीकृतियों की जांच कर अनियमितताओं को उजागर करने एवं लापरवाह अधिकारियों के विरुद्ध विभागीय एवं आपराधिक कार्रवाई सुनिश्चित करने पर बल दिया। वर्तमान मे जो मुआवजा दिया गया है वह न्याय पूर्ण नहीं है इसी तरह के दुर्घटना गोदावरी (Godawari Steel / Godawari Power & Ispat – सिलतरा, रायपुर में हुआ था जिसमें 6 श्रमिकों के जान गई थी वहां 47/47 लाख मुआवजा दिलवाया था और पीड़ित परिवारों को नौकरी सहित अन्य सुविधा यहां 35/35 लाख देने की बात कह रहे है जो न्यायोचित नहीं है l
उन्होंने कहा कि यदि निर्धारित समयसीमा में FIR, चेयरमैन अनिल अग्रवाल सहित जिम्मेदार अधिकारियों की गिरफ्तारी, 50 लाख मुआवजा घायलों को 15 लाख एवं उच्च स्तर पर उपचार सुनिश्चित नहीं किया गया तो प्रकरण को न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा, उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर की जाएगी, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग एवं राष्ट्रीय हरित अधिकरण के समक्ष मामला उठाया जाएगा तथा पीड़ित परिवारों एवं आम जनता के साथ मिलकर 7 दिवस में अनिश्चितकालीन आंदोलन प्रारंभ किया जाएगा जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।







