आखा तीज पर दान, जप_तप और पूजा का फल अक्षय… अधिवक्ता चितरंजय
अक्षय अर्थात जो कभी क्षय (नष्ट) न हो… सनातन धर्म_ संस्कृति एवं परंपरा की अद्वितीय मुहूर्त अक्षय तृतीया @ आखा तीज वैशाख शुक्ल तृतीया को मनाया जाने वाला एक अत्यंत शुभ और पवित्र हिंदू पर्व है तथा इस तिथि को अबूझ मुहूर्त माना जाता है, जब बिना किसी विशेष मुहूर्त के नए कार्य यथा विवाह, गृह प्रवेश और बहुमूल्य धातु बर्तन, सोना-चांदी क्रय की जाती है।
मान्यता है कि इस दिन किया गया दान, जप, तप और पूजा अक्षय फल प्रदान करते हैं।
यह अबूझ मुहूर्त साल भर में सबसे शुभ दिनों में से एक है, जिसमें कोई भी नया काम या निवेश करना अत्यंत सौभाग्यशाली माना जाता है।
यह दिन भगवान विष्णु के अवतार परशुराम जी का प्राकट्य उत्सव माना जाता है तथा माता लक्ष्मी की विशेष पूजा से सुख-समृद्धि आती है।
पौराणिक कथानक के अनुसार इस दिन त्रेतायुग की शुरुआत हुई थी और महर्षि वेदव्यास ने महाभारत लिखवाना शुरू किया था। इसी दिन सुदामा- कृष्ण मिलन हुआ और सुदामा की दरिद्रता दूर हुई थी, फलस्वरूप जप_ तप दान इत्यादि शुभ कार्यों की परंपरा है।
विदित हो कि अक्षय तृतीया के दिन ही बद्रीनाथ धाम के द्वार खुलते हैं। इस प्रकार विभिन्न मान्यताओं के संगम पर्व के रूप में स्थापित सनातन धर्म संस्कृति का अद्वितीय और अद्भुत पल अक्षय तृतीया इस साल रविवार १९ अप्रेल को प्रातः १०.४९ से सोमवार २० अप्रेल को सुबह ७.२७ तक है जिस दरमियान हम एक नई कार्य योजना पर काम की शुरुवात कर सकते हैं, इस बात की चर्चा करते हुए हिंदू जागरण मंच जिला प्रमुख एवं उच्च न्यायालय अधिवक्ता चितरंजय सिंह पटेल ने इस महत्वपूर्ण बेला पर सभी सनातन धर्मावलंबी को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की कृपा से आप सभी अक्षय सुख समृद्धि प्राप्त करें ।








