आज देशभर में भगवान भगवान परशुराम की जयंती श्रद्धा और आस्था के साथ मनाई जा रही है। यह दिन अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर आता है, जिसे सनातन धर्म में अत्यंत शुभ माना जाता है।
अवतार और उद्देश्य
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भगवान भगवान विष्णु ने परशुराम के रूप में अपना छठा अवतार लिया था। उनका जन्म महर्षि जमदग्नि और माता रेणुका के घर हुआ था।
कहा जाता है कि उस समय पृथ्वी पर अधर्म और अत्याचार बढ़ गया था, विशेष रूप से कुछ क्षत्रिय राजाओं द्वारा। ऐसे में भगवान परशुराम ने धर्म की रक्षा और अन्याय के अंत के लिए अवतार लिया। उनके हाथ में हमेशा फरसा (कुल्हाड़ी) रहने के कारण उन्हें “परशु-राम” कहा गया।
पराक्रम और प्रभाव
भगवान परशुराम को अद्वितीय योद्धा और ब्रह्मज्ञानी माना जाता है। उन्होंने 21 बार अत्याचारी क्षत्रियों का विनाश कर धर्म की पुनर्स्थापना की।
मान्यता है कि उन्होंने ही समुद्र को पीछे हटाकर केरल की भूमि का निर्माण किया। साथ ही वे कई महान योद्धाओं के गुरु भी रहे, जिनमें भीष्म, द्रोणाचार्य और कर्ण शामिल हैं।
भारत में प्रमुख धार्मिक स्थल
भगवान परशुराम से जुड़े कई पवित्र स्थल भारत में स्थित हैं, जहां आज भी श्रद्धालु बड़ी संख्या में पहुंचते हैं:
परशुराम कुंड – अरुणाचल प्रदेश में स्थित यह स्थल परशुराम की तपोभूमि माना जाता है।
रेणुका झील – माता रेणुका से जुड़ा यह पवित्र स्थान श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्व रखता है।
परशुराम मंदिर चिपलून – महाराष्ट्र के चिपलून में स्थित यह मंदिर भगवान परशुराम को समर्पित प्रमुख धामों में से एक है।
जनापाव पहाड़ी – मध्यप्रदेश में स्थित इस स्थान को भगवान परशुराम की जन्मस्थली माना जाता है।








