नई दिल्ली। देश के प्रमुख सामरिक और महत्वपूर्ण ठिकानों पर संभावित ड्रोन हमले की आशंका को देखते हुए केंद्र सरकार ने सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। सुरक्षा तंत्र को मजबूत करने के लिए कई संवेदनशील स्थानों पर निगरानी बढ़ाई जा रही है और एंटी-ड्रोन सिस्टम की तैनाती की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। हाल के वर्षों में ड्रोन तकनीक के बढ़ते उपयोग और सीमा पार से ड्रोन गतिविधियों की घटनाओं ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है।
महत्वपूर्ण प्रतिष्ठान सुरक्षा घेरे में
सूत्रों के अनुसार रक्षा प्रतिष्ठानों, हवाई अड्डों, परमाणु संयंत्रों, तेल एवं गैस प्रतिष्ठानों, बंदरगाहों, बिजली उत्पादन केंद्रों तथा अन्य महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचों की सुरक्षा व्यवस्था की विशेष समीक्षा की गई है। इन स्थानों पर अतिरिक्त निगरानी उपकरण, रडार और ड्रोन-रोधी तकनीकों को सक्रिय किया जा रहा है।
एंटी-ड्रोन तकनीक पर बढ़ा जोर
विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक ड्रोन छोटे आकार, कम ऊंचाई पर उड़ान और स्वायत्त संचालन क्षमता के कारण पारंपरिक सुरक्षा प्रणालियों को चुनौती दे रहे हैं। इसी कारण सुरक्षा एजेंसियां रडार, रेडियो फ्रीक्वेंसी डिटेक्शन, जैमिंग सिस्टम, ऑप्टिकल सेंसर और हार्ड-किल तकनीकों से लैस बहुस्तरीय एंटी-ड्रोन सुरक्षा ढांचे को मजबूत कर रही हैं।
सुरक्षा बलों को विशेष प्रशिक्षण
ड्रोन खतरों से निपटने के लिए सुरक्षा बलों और महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की सुरक्षा में लगे अधिकारियों को विशेष प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। हाल ही में विभिन्न केंद्रीय एजेंसियों और सुरक्षा बलों के अधिकारियों के लिए उन्नत एंटी-ड्रोन प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें ड्रोन की पहचान, ट्रैकिंग और निष्क्रिय करने की तकनीकों पर जोर दिया गया।
सीमा क्षेत्रों पर भी विशेष निगरानी
सीमा से लगे संवेदनशील इलाकों में ड्रोन घुसपैठ और तस्करी की घटनाओं को देखते हुए निगरानी व्यवस्था और मजबूत की जा रही है। सरकार स्मार्ट सेंसर, रडार नेटवर्क और आधुनिक एंटी-ड्रोन तकनीक के जरिए हवाई खतरों का समय रहते पता लगाने की दिशा में काम कर रही है।
भविष्य की चुनौतियों को ध्यान में रखकर तैयारी
रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार दुनिया के विभिन्न संघर्ष क्षेत्रों में ड्रोन और ड्रोन स्वॉर्म (झुंड) हमलों के बढ़ते इस्तेमाल ने सुरक्षा रणनीतियों को बदल दिया है। इसी को देखते हुए भारत भी दीर्घकालिक काउंटर-ड्रोन नेटवर्क और उन्नत निगरानी प्रणालियों के विकास पर जोर दे रहा है ताकि महत्वपूर्ण परिसंपत्तियों को किसी भी संभावित खतरे से सुरक्षित रखा जा सके।
फिलहाल सुरक्षा एजेंसियों को अलर्ट मोड पर रखा गया है और संवेदनशील ठिकानों की सुरक्षा व्यवस्था की लगातार समीक्षा की जा रही है।








