कोरबा संवाददाता – गुरदीप सिंह
छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले के झाबु नवागांव में शनिवार को एक बड़ा और दर्दनाक हादसा सामने आया, जब सीएसईबी (छत्तीसगढ़ स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड) का राखड़ बांध अचानक फूट गया। बांध के फूटते ही इलाके में अफरा-तफरी मच गई और वहां काम कर रहे मजदूर अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे।
घटना के समय डेम में मरम्मत कार्य चल रहा था, जिसमें एक जेसीबी मशीन के साथ चालक और चार मजदूर काम कर रहे थे। बांध के अचानक टूटने से राखड़ और मलबे का तेज बहाव आया, जिसकी चपेट में जेसीबी मशीन आ गई और पूरी तरह बह गई।
इस हादसे में जेसीबी चालक मलबे में दब गया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। वहीं, अन्य तीन मजदूरों को स्थानीय लोगों और राहत टीम की मदद से सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। एक मजदूर को हल्की चोटें आने की भी जानकारी सामने आई है।
घटना की सूचना मिलते ही दर्री थाना पुलिस मौके पर पहुंची और रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया। प्रशासनिक टीम द्वारा स्थिति पर नजर रखी जा रही है और मलबे में फंसे लोगों की तलाश के लिए अभियान जारी है।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच सबसे बड़ा सवाल यही खड़ा हो रहा है कि जब वरिष्ठ अधिकारी स्वयं मौके पर मौजूद थे, तो आखिर सुरक्षा मानकों में ऐसी कौन सी गंभीर चूक हुई, जिसने एक मजबूत माने जाने वाले राखड़ बांध को पलभर में ढहा दिया। क्या निरीक्षण केवल औपचारिकता बनकर रह गया था, या फिर संभावित तकनीकी खामियों को नजरअंदाज कर दिया गया?
झाबु राखड़ बांध हादसे ने न केवल विभागीय कार्यप्रणाली की पोल खोल दी है, बल्कि प्रबंधन की कार्यशैली और जिम्मेदारी पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। लगातार सामने आ रही लापरवाही की आशंकाओं ने पूरे मामले को और संवेदनशील बना दिया है।
स्थानीय लोगों ने इस हादसे के लिए सीएसईबी प्रबंधन की लापरवाही को जिम्मेदार ठहराया है। उनका कहना है कि यह राखड़ बांध पहले भी तीन बार टूट चुका है, इसके बावजूद उचित मरम्मत और सुरक्षा उपाय नहीं किए गए। हादसे के समय जिम्मेदार अधिकारी मौके पर मौजूद नहीं थे, जिससे लोगों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है।
फिलहाल प्रशासन मामले की जांच में जुटा हुआ है और आगे की कार्रवाई की बात कही जा रही है। यह हादसा एक बार फिर सुरक्षा मानकों और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।








