कोरबा संवाददाता – गुरदीप सिंह
कुसमुंडा/कोरबा।
70 मेट्रिक टन उत्पादन क्षमता वाली कुसमुंडा खदान में मैनपावर सरप्लस घोषित किए जाने और 41 कर्मचारियों के प्रशासनिक तबादले को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। कोयला मजदूर सभा के क्षेत्रीय महामंत्री अशोक कुमार साहू ने इस पूरे मामले पर गंभीर सवाल उठाते हुए प्रबंधन के फैसले को अव्यवहारिक और श्रमिक विरोधी बताया है।
उन्होंने कहा कि जिस खदान में 350 से अधिक भारी मशीनें (HEMM) लगातार संचालित हो रही हैं, वहां मैनपावर को “सरप्लस” बताना समझ से परे है। इतने बड़े स्तर पर मशीनों के संचालन के लिए पर्याप्त और प्रशिक्षित श्रमिकों की जरूरत होती है, ऐसे में कर्मचारियों की संख्या अधिक होने का दावा वास्तविक स्थिति से मेल नहीं खाता।
आंकड़ों में विरोधाभास का आरोप
अशोक कुमार साहू ने प्रबंधन पर आंकड़ों के साथ “खेल” करने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि पिछले वर्ष जिस मैनपावर असेसमेंट को प्रबंधन ने सही और संतुलित बताया था, उसी को अब गलत ठहराते हुए री-असेसमेंट के नाम पर कर्मचारियों को सरप्लस घोषित किया जा रहा है। इससे प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े होते हैं।


प्रोडक्शन ठीक, फिर भी ट्रांसफर क्यों?
यूनियन का यह भी तर्क है कि री-असेसमेंट के दौरान प्रोडक्शन स्तर संतोषजनक बना हुआ है, इसके बावजूद कर्मचारियों का तबादला करना न तो व्यावहारिक है और न ही श्रम कानूनों के अनुरूप। यूनियन ने इसे “दोहरी नीति” करार देते हुए कहा कि एक ओर उत्पादन को सामान्य बताया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर मैनपावर कम करने के कदम उठाए जा रहे हैं।
यूनियन का सख्त रुख
कोयला मजदूर सभा ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि बिना चर्चा और ठोस तर्क के लिए गए ऐसे फैसले स्वीकार नहीं किए जाएंगे। यूनियन ने प्रबंधन से तत्काल 41 कर्मचारियों के ट्रांसफर ऑर्डर को निरस्त करने की मांग की है।
मुख्य मांगें:
- 41 कर्मचारियों के प्रशासनिक तबादले का आदेश तुरंत वापस लिया जाए।
- ‘मेन-मशीन-मैनपावर’ (M-3) का पुनः पारदर्शी और सटीक असेसमेंट कराया जाए।
यूनियन ने कहा कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं की गई, तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए बाध्य होंगे। इस पूरे मामले ने कुसमुंडा खदान के श्रमिकों के बीच असंतोष का माहौल पैदा कर दिया है, जो आने वाले दिनों में बड़ा रूप ले सकता है।








