बस्तर संवाददाता – अर्जुन झा
डिमरापाल में बेदम सोलर पैनल, सूखा पड़ा हैंडपंप
ग्रामीण मारकंडी नदी का पानी पीने हुए मजबूर
बकावंड। ये वही विकासखंड बकावंड है, जहां के कई सरपंचों और सचिवों ने 15 वें वित्त आयोग मद के कार्यों की ऑडिट पर बवाल मचा दिया था। इसी बकावंड की एक बड़ी सच्चाई यह भी है कि यहां की ज्यादातर ग्राम पंचायतों में 15वें वित्त आयोग की राशि में जमकर खेला होता आया है। ऐसा ही एक बड़ा मामला सामने आया है ब्लॉक की ग्राम पंचायत डिमरापाल से, जहां मूलभूत सुविधाओं की हालत निचले स्तर पर पहुंच गई है। 15वें वित्त आयोग की राशि से हैंडपंप मरम्मत के नाम पर कागजों में भुगतान तो दिखा दिया गया है, लेकिन ग्रामीणों को एक बूंद भी पानी कथित हैंडपंप से नसीब नहीं हो पाया है।
हमारे संवाददाता ने जब डिमरापाल पंचायत का दौरा किया तो हालात बेहद चौंकाने वाले नजर आए।
हैंडंपप से बूंद भर भी पानी नहीं निकलता।
सोलर पैनल खंभा लगा है, पर बोर से जुड़ा नहीं। पैनल सिर्फ दिखावे के लिए है।
गांव के लोगों का कहना है सोलर पैनल, बोर और हैंडपंप मरम्मत के नाम पर लाखों का भुगतान ग्राम पंचायत के कागजों में दर्शा दिया गया है, लेकिन हेडंपप चालू नहीं हुआ। मजबूरी में आज भी मारकंडी नदी का दूषित पानी पीकर गुजारा कर रहे हैं। गर्मी में नदी भी सूखने की कगार पर है।

15वें वित्त का दुरुपयोग
नियम कहता है कि 15वें वित्त की टाइड राशि सिर्फ पेयजल, स्वच्छता पर खर्च होगी। डिमरापाल में हैंडपंप मरम्मत के नाम पर राशि निकाल ली गई, पर गांव में एक भी हैंडपंप काम करता नजर नहीं आ रहा है। यह सीधे वित्तीय अनियमितता का मामला है।
डिमरापाल की घटना बताती है कि कागजों में “हर घर जल” है, पर जमीन पर लोग नदी का पानी पीने को मजबूर हैं। जब मरम्मत का पैसा निकल गया और हैंडपंप सूखा पड़ा है, तो यह सिर्फ लापरवाही नहीं, सुनियोजित घोटाला है।
जल्द कराएंगे जांच
जल्दी ही एक जांच दल इस मामले की जांच करने डिमरापाल ग्राम पंचायत जाएगी। जांच में कुछ भी फर्जीवाड़ा सामने आया तो संबंधितों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई होगी।
-परेश्वर कुर्रे, सीईओ, जनपद पंचायत बकावंड








