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रायपुर में इन्फ्लुएंसर की गुंडागर्दी: मासूम परिवार के साथ बदसलूकी और गाली-गलौज, खुद गलती करके थाने में दबाव बनाने की कोशिश

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रायपुर संवाददाता – रघुराज
रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर जिसे शांति का टापू कहा जाता है, वहां अब सोशल मीडिया के कुछ कथित इन्फ्लुएंसर अपनी लोकप्रियता के नशे में चूर होकर आम जनता के साथ गुंडागर्दी पर उतारू हो गए हैं। हाल ही में तेलीबांधा क्षेत्र से एक बेहद परेशान करने वाली घटना सामने आई है, जहां एक इन्फ्लुएंसर ने एक सीधे-साधे स्थानीय परिवार के साथ न केवल दुर्व्यवहार किया, बल्कि उनके घर की महिलाओं, माता और बहनों के सामने भद्दी-भद्दी गालियां भी दीं।
घटना का विवरण बताते हुए पीड़ित पक्ष ने अपना दर्द साझा किया है। उनका कहना है कि वे अपने परिवार के साथ थे, जिसमें महिलाएं और बुजुर्ग भी शामिल थे। बिना किसी बड़े कारण के इन्फ्लुएंसर ने अपनी रसूख दिखाते हुए विवाद शुरू कर दिया। छत्तीसगढ़ की संस्कृति जहां अपनों और परिवार को सम्मान देने की रही है, वहां इस तरह की हरकत ने पूरे प्रदेश के लोगों में रोष पैदा कर दिया है। पीड़ित का कहना है कि जब हम अपने परिवार के साथ शांति से जा रहे थे, तब इस तरह की गुंडागर्दी का सामना करना पड़ा। हमलावर ने अपनी मर्यादा भूलकर पूरे परिवार के सामने गंदी भाषा का प्रयोग किया, जिससे परिवार की महिलाएं काफी सहमी हुई हैं।
हैरानी की बात तो यह है कि बदतमीजी करने के बाद आरोपी इन्फ्लुएंसर ने उल्टा चोर कोतवाल को डांटे वाली कहावत चरितार्थ कर दी। खुद गलती करने और आम आदमी को परेशान करने के बाद, वह तेलीबांधा थाने पहुंच गया और वहां पीड़ित परिवार के खिलाफ ही एफआईआर दर्ज कराने का दबाव बनाने लगा। यह सीधे तौर पर कानून और व्यवस्था को चुनौती देने और अपने रसूख का इस्तेमाल कर एक आम नागरिक को डराने-धमकाने की कोशिश है।
सोशल मीडिया पर इस घटना के बाद लोगों का गुस्सा फूट पड़ा है। लोगों का कहना है कि अगर किसी को गुंडागर्दी का इतना ही शौक है, तो उसे इन्फ्लुएंसर का चोला उतार देना चाहिए और सीधे मैदान में आकर लड़ाई करनी चाहिए। कैमरे के सामने अच्छा बनने का ढोंग करना और असल जिंदगी में आम आदमी, खासकर अपने ही प्रदेश के भोले-भाले लोगों को परेशान करना बेहद निंदनीय है। सोशल मीडिया पेज चलाने का मतलब यह नहीं है कि आपको कानून हाथ में लेने या किसी की मान-मर्यादा से खेलने का लाइसेंस मिल गया है।
रायपुर की जनता अब सवाल पूछ रही है कि आखिर एक आम आदमी क्या करे? एक तरफ सड़क पर गुंडागर्दी का सामना करना पड़ता है और दूसरी तरफ जब पुलिस के पास न्याय की उम्मीद लेकर जाते हैं, तो वहां भी प्रभावशाली लोग अपनी पहुंच का फायदा उठाकर दबाव बनाने की कोशिश करते हैं। क्या रायपुर की सड़कों पर अब परिवार के साथ निकलना सुरक्षित नहीं है? क्या कोई भी रसूखदार व्यक्ति किसी भी परिवार को बीच सड़क पर अपमानित कर सकता है?
इस मामले में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री कार्यालय और रायपुर पुलिस को टैग करते हुए उचित कार्रवाई की मांग की जा रही है। लोगों का कहना है कि पुलिस को केवल एक पक्ष की बात सुनकर या किसी के फॉलोअर्स देखकर कार्रवाई नहीं करनी चाहिए। तेलीबांधा पुलिस को इस मामले की गहराई से जांच करनी चाहिए और सीसीटीवी फुटेज खंगालने चाहिए ताकि सच सामने आ सके।
छत्तीसगढ़ एक ऐसा प्रदेश है जहां लोग एक-दूसरे को भाई-चारा और प्रेम से देखते हैं। यहां की मिट्टी में अपनों के प्रति सम्मान है। लेकिन इस तरह के इन्फ्लुएंसर अपनी छोटी सी प्रसिद्धि के कारण प्रदेश की छवि खराब कर रहे हैं। आम जनता का स्पष्ट संदेश है कि इन्फ्लुएंसर बनना है तो समाज को कुछ अच्छा सिखाएं, न कि राह चलते लोगों पर अपनी धौंस जमाएं।
अब देखना यह होगा कि रायपुर पुलिस इस मामले में क्या कदम उठाती है। क्या एक आम परिवार को न्याय मिलेगा या फिर रसूख के आगे कानून बौना साबित होगा? प्रदेश की जनता मुख्यमंत्री से भी अपील कर रही है कि ऐसे तत्वों पर लगाम कसी जाए जो सोशल मीडिया की आड़ में असल जिंदगी में आतंक मचा रहे हैं। आम आदमी की सुरक्षा सर्वोपरि होनी चाहिए, चाहे सामने वाला कितना भी बड़ा इन्फ्लुएंसर क्यों न हो। कानून सबके लिए बराबर है और गुंडागर्दी करने वालों की जगह सलाखों के पीछे होनी चाहिए।

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