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महान नदी में अवैध रेत खनन का काला खेल जारी, प्रशासन की चुप्पी से माफियाओं के हौसले बुलंद करोड़ों के पुल की नींव पर खतरा, हर दिन सैकड़ों वाहन भर रहे रेत, जिम्मेदार विभाग बना मूकदर्शक

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बलरामपुर संवाददाता युसूफ खान
राजपुर/बलरामपुर। जिले के राजपुर क्षेत्र अंतर्गत धंधापुर से होकर गुजरने वाली महान नदी इन दिनों अवैध रेत खनन माफियाओं के निशाने पर है। छिंदियाडांड रेत घाट में खुलेआम नियमों को ताक पर रखकर बड़े पैमाने पर अवैध उत्खनन किया जा रहा है। हैरानी की बात यह है कि प्रशासन लगातार कार्रवाई और सख्ती के दावे तो कर रहा है, लेकिन जमीनी हकीकत में रेत माफियाओं के हौसले इतने बुलंद हैं कि वे दिनदहाड़े नदी का सीना छलनी कर शासन-प्रशासन को खुली चुनौती देते नजर आ रहे हैं।
स्थिति अब इतनी गंभीर हो चुकी है कि लगातार हो रहे अवैध खनन से महान नदी पर बने करोड़ों रुपये लागत वाले पुल की नींव तक कमजोर होने लगी है। स्थानीय ग्रामीणों में भय और आक्रोश का माहौल है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते प्रशासन नहीं जागा तो आने वाले दिनों में कोई बड़ा हादसा होने से इंकार नहीं किया जा सकता।
सुबह 5 बजे से शुरू हो जाता है अवैध कारोबार
ग्रामीणों के अनुसार रेत माफियाओं की गतिविधियां सुबह करीब 5 बजे से ही शुरू हो जाती हैं। पूरे दिन नदी में मशीनों की आवाज गूंजती रहती है और ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के जरिए लगातार रेत का अवैध परिवहन किया जाता है। ग्रामीणों का दावा है कि प्रतिदिन करीब 200 से अधिक वाहन नदी से रेत निकालकर विभिन्न क्षेत्रों में सप्लाई कर रहे हैं। इस अवैध कारोबार से हर दिन लाखों रुपये की कमाई की जा रही है, जबकि शासन को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान झेलना पड़ रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि रेत से भरे वाहनों की लंबी कतारें मुख्य मार्गों से गुजरती हैं, लेकिन जिम्मेदार विभाग के अधिकारियों को यह सब दिखाई नहीं देता। इससे प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
पुल की नींव पर मंडराया खतरा
महान नदी पर बना लगभग 10 करोड़ रुपये की लागत वाला पुल अब खतरे के साए में आ गया है। पुल के आसपास लगातार गहरी खुदाई किए जाने से उसकी नींव कमजोर पड़ने लगी है। ग्रामीणों का कहना है कि रेत माफियाओं ने पुल के नीचे और आसपास तक खुदाई कर दी है, जिससे नदी का प्राकृतिक बहाव प्रभावित हो रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार यदि किसी पुल के आसपास अत्यधिक रेत निकासी होती है तो नदी का जलस्तर और बहाव बदलने लगता है, जिससे पुल की संरचना पर दबाव बढ़ जाता है। क्षेत्रवासियों को डर है कि बरसात के मौसम में यह स्थिति और खतरनाक हो सकती है।
शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं, आखिर किसका संरक्षण?
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि कई बार प्रशासन और खनिज विभाग से शिकायत की गई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। लोगों का कहना है कि कभी-कभार खानापूर्ति के लिए छोटी कार्रवाई जरूर कर दी जाती है, लेकिन बड़े स्तर पर चल रहे इस अवैध कारोबार पर रोक लगाने की गंभीर कोशिश नहीं दिखाई देती।
अब सवाल यह उठ रहा है कि आखिर रेत माफियाओं को किसका संरक्षण प्राप्त है? यदि प्रतिदिन सैकड़ों वाहन अवैध रेत लेकर निकल रहे हैं तो संबंधित विभाग और जिम्मेदार अधिकारियों की नजर इस पर क्यों नहीं पड़ रही? क्षेत्र में चर्चा है कि बिना मिलीभगत के इतना बड़ा अवैध कारोबार संभव नहीं हो सकता।
पर्यावरण को भी भारी नुकसान
अवैध खनन का असर केवल राजस्व और पुल तक सीमित नहीं है, बल्कि महान नदी का प्राकृतिक स्वरूप भी तेजी से बिगड़ रहा है। लगातार रेत निकासी के कारण नदी की गहराई बढ़ती जा रही है और किनारों पर कटाव की समस्या गंभीर होती जा रही है। इससे आसपास के खेतों और गांवों पर भी खतरा बढ़ने लगा है।
पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि यदि इसी तरह अवैध खनन जारी रहा तो आने वाले वर्षों में नदी का अस्तित्व भी संकट में पड़ सकता है।
एसडीएम बोले— जल्द होगी कार्रवाई
मामले में जब प्रशासनिक अधिकारियों से चर्चा की गई तो एसडीएम ने अवैध खनन के खिलाफ जल्द कार्रवाई का भरोसा दिया है। उन्होंने कहा कि राजस्व और खनिज विभाग की संयुक्त टीम गठित कर छापेमार कार्रवाई की जाएगी। साथ ही अवैध रेत परिवहन में शामिल वाहनों पर जुर्माना और जब्ती की कार्रवाई करने की बात भी कही गई है।
हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि वे अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि जमीन पर सख्त कार्रवाई देखना चाहते हैं। क्षेत्रवासियों का साफ कहना है कि यदि जल्द अवैध खनन नहीं रुका तो महान नदी, पर्यावरण और करोड़ों की लागत से बना पुल तीनों गंभीर खतरे में पड़ जाएंगे।

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