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​धरती को हरा-भरा बनाने का ‘महा-संकल्प’: कुरुद में गूंजा प्रकृति संरक्षण का शंखनाद ​5 लाख सीड बॉल्स से सजेगी छत्तीसगढ़ की धरा; ‘बर्डमैन’ और विज्ञान प्रेमियों ने दिया पर्यावरण सुरक्षा का मंत्र

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कुरुद (धमतरी) | 10 मई 2026
प्रकृति केवल हमारा घर नहीं, हमारा अस्तित्व है। इसी भावना के साथ कुरुद के प्रथम एजुकेशन फाउंडेशन भवन में ‘प्रकृति शिक्षण विज्ञान यात्रा छत्तीसगढ़’ के तत्वावधान में एक ऐतिहासिक राज्य स्तरीय सीड बॉल निर्माण कार्यशाला संपन्न हुई। इस आयोजन ने न केवल विज्ञान को सरल बनाया, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए ‘ऑक्सीजन बैंक’ स्थापित करने की दिशा में एक बड़ा कदम बढ़ाया है।

5 लाख सीड बॉल्स: एक महत्वाकांक्षी लक्ष्य
​कार्यशाला का मुख्य आकर्षण मानसून पूर्व 5 लाख सीड बॉल्स तैयार करने का संकल्प रहा।
​सीड बॉल तकनीक: मिट्टी, खाद, रूई और बीजों के वैज्ञानिक मिश्रण से तैयार ये गेंदें बंजर जमीन पर हरियाली लाने का सबसे प्रभावी और सस्ता तरीका हैं।
​अभिषेक शुक्ला (लीडर, प्रकृति शिक्षक): उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रकृति को हरा-भरा बनाना केवल हमारा शौक नहीं, बल्कि हमारा नैतिक कर्तव्य है। उन्होंने कार्यशाला में तकनीक और प्रकृति के तालमेल को बखूबी समझाया।

 

 पक्षियों के लिए ‘दो कदम प्रकृति की ओर’
​मुख्य अतिथि और प्रख्यात ‘बर्डमैन’ संजय कुमार साहू ने एक भावुक अपील की। पिछले 10 वर्षों से मिट्टी के घोंसले बनाकर देश भर में बांटने वाले साहू जी ने कहा:
​”जैसे हमें सिर छुपाने को छत चाहिए, वैसे ही पक्षियों को भी सुरक्षित घर चाहिए। सीड बॉल से जंगल उगेगा और हमारे मिट्टी के घोंसलों से पक्षियों का संसार बसेगा।”

विज्ञान का ‘जादू’ या अंधविश्वास पर प्रहार?
​कार्यशाला में व्याख्याता संदीप सेन, अर्चना शर्मा, भुवनेश्वर मरकाम और प्रमोद कुमार साहू ने विज्ञान के मजेदार प्रयोगों (नारियल में आग, आग का गोला, वायुदाब, विद्युत अपघटन, हाथ की सफाई) के माध्यम से समाज में फैले अंधविश्वास और तंत्र-मंत्र पर करारा प्रहार किया। उन्होंने सिद्ध किया कि जिसे हम ‘चमत्कार’ समझते हैं, वह दरअसल विज्ञान के सरल नियम हैं।

इतिहास और कविता का संगम
​समीक्षा गायकवाड़ ने प्राचीन मिस्र से आधुनिक जापान तक सीड बॉल के सफर की रोचक जानकारी दी।
​डॉ. स्वाति गंधर्व ने अपनी ओजस्वी कविता के माध्यम से प्रतिभागियों में प्रकृति के प्रति प्रेम जगाया।
​डॉ. आशीष नायक और बी.पी. रावटे ने सामूहिक सहभागिता को ही पर्यावरण बचाने का एकमात्र रास्ता बताया।

 एक शपथ, सुनहरे भविष्य के नाम
​कार्यक्रम के अंत में सभी शिक्षकों, छात्रों और प्रतिभागियों ने मिट्टी से सनी हथेलियों के साथ संकल्प लिया कि वे:
​नदियों, तालाबों और खाली मैदानों में सीड बॉल्स का वितरण करेंगे।
​मिट्टी के घोंसलों के जरिए पक्षियों को आश्रय देंगे।
​अपने आसपास वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देंगे।
​विशेष उपस्थिति: इस महा-अभियान में अभिषेक शुक्ला जी, बृजलाल मंडावी, भुनेश्वर मरकाम, लखन लाल साहू, आत्माराम साहू, नम्मू सरोज, परविंदर कौर गिल, नीलिमा गौतम और राज्य के विभिन्न जिलों से आए सैकड़ों पर्यावरण योद्धा शामिल हुए।

आप भी जुड़ें इस मुहिम से!
​प्रकृति संरक्षण किसी एक व्यक्ति की जिम्मेदारी नहीं है। आज ही अपने घर पर बीजों को सुरक्षित करें, उन्हें मिट्टी की सुरक्षा दें और इस मानसून में एक पौधा जरूर रोपें। आपकी एक छोटी सी मेहनत, आने वाली पीढ़ी को शुद्ध हवा का उपहार देगी।

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