-पंचायत अधिकारों की उपेक्षा, विकास कार्यों में विलंब एवं प्रशासनिक कार्यप्रणाली के विरुद्ध गहरा रोष*
खिलेश साहू/कुरूद। ब्लॉक सरपंच संघ कुरूद की एक महत्वपूर्ण एवं विस्तारित बैठक आयोजित की गई, जिसमें क्षेत्र की विभिन्न ग्राम पंचायतों में व्याप्त प्रशासनिक अव्यवस्था, विकास कार्यों में हो रही अनावश्यक विलंबता तथा पंचायत प्रतिनिधियों के अधिकारों के कथित हनन जैसे गंभीर विषयों पर व्यापक चर्चा की गई। बैठक में उपस्थित सरपंचों एवं पंचायत प्रतिनिधियों ने पंचायत प्रशासन से संबंधित विभिन्न समस्याओं को लेकर गहरा असंतोष एवं चिंता व्यक्त की।
बैठक की अध्यक्षता हरिशंकर साहू, अध्यक्ष सरपंच संघ कुरूद ने की। उन्होंने अपने वक्तव्य में कहा कि पंचायतों को लोकतंत्र की सबसे मजबूत इकाई माना जाता है, किंतु वर्तमान परिस्थितियों में ग्राम पंचायतों की उपेक्षा लगातार बढ़ती जा रही है।उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि समय रहते समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो समस्त पंचायत प्रतिनिधि एकजुट होकर व्यापक आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे

इस अवसर पर टिकेश साहू, जिला अध्यक्ष सरपंच संघ धमतरी ने कहा कि पंचायत प्रतिनिधियों की अनदेखी कर प्रशासनिक कार्यों को संचालित करना पंचायती राज व्यवस्था की भावना के विपरीत है। ।यदि पंचायत प्रतिनिधियों को अधिकार एवं सम्मान नहीं मिलेगा तो माननीय नरेंद्र मोदी की 2047 की विकसित राष्ट्र की परिकल्पना अधूरी रह जाएगी।
जयमित्र साहू गोजी ने अपने संबोधन में कहा कि गांवों की वास्तविक समस्याओं को समझे बिना केवल कागजी योजनाओं से विकास संभव नहीं है। आज ग्रामीण क्षेत्रों में मूलभूत कार्य भी लंबित पड़े हुए हैं, जिससे जनता में आक्रोश लगातार बढ़ रहा है।
श्रीमती पूर्णिमा साहू, संरक्षक सरपंच संघ कुरूद ने कहा कि पंचायत प्रतिनिधियों को योजनाओं की जानकारी एवं अधिकार से दूर रखा जाना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। पंचायतों को मजबूत किए बिना आत्मनिर्भर गांव और विकसित भारत का सपना साकार नहीं हो सकता।
बैठक में पन्ना चंद्राकर, सचिव चेतन देवांगन तथा योगेश साहू, मीडिया प्रभारी भी उपस्थित रहे। सभी वक्ताओं ने पंचायत प्रतिनिधियों की समस्याओं एवं ग्रामीण विकास कार्यों में हो रही बाधाओं को गंभीरता से उठाते हुए प्रशासन से शीघ्र समाधान की मांग की।
बैठक में सर्वसम्मति से यह आरोप लगाया गया कि पंचायतों से संबंधित निर्माण कार्यों, कार्यादेशों, महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना अंतर्गत संचालित कार्यों एवं अन्य विकास योजनाओं के मूल्यांकन तथा भुगतान की प्रक्रिया अत्यंत धीमी गति से संचालित की जा रही है। इसके परिणामस्वरूप ग्राम स्तर पर विकास कार्य बाधित हो रहे हैं तथा श्रमिकों को समय पर पारिश्रमिक प्राप्त नहीं हो पा रहा है। सरपंच संघ ने प्रशासन से मांग की कि समस्त विकास योजनाओं के क्रियान्वयन एवं भुगतान प्रक्रिया को समयबद्ध, पारदर्शी एवं उत्तरदायी बनाया जाए।
बैठक में यह गंभीर विषय भी प्रमुखता से उठाया गया कि राशन कार्ड, पेंशन प्रकरण एवं जॉब कार्ड निर्माण जैसे पंचायत स्तर के कार्य कथित रूप से संबंधित जनप्रतिनिधियों की जानकारी एवं अनुशंसा के बिना विभागीय कर्मचारियों द्वारा सीधे संपादित किए जा रहे हैं। सरपंचों ने आरोप लगाया कि इस प्रकार की कार्यप्रणाली पंचायत राज व्यवस्था की मूल भावना तथा निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के संवैधानिक अधिकारों के प्रतिकूल है।
इसके अतिरिक्त संघ द्वारा यह आपत्ति भी दर्ज कराई गई कि पंचायत कार्यकाल के लगभग 16 माह व्यतीत होने के उपरांत भी जिला प्रशासन धमतरी द्वारा जिले के सरपंचों की कोई औपचारिक बैठक आयोजित नहीं की गई है। जबकि विभिन्न योजनाओं एवं प्रशासनिक निर्देशों को पंचायत सचिवों के माध्यम से सीधे ग्राम पंचायतों पर आरोपित किया जा रहा है। बैठक में कहा गया कि वर्तमान परिस्थितियों में निर्वाचित जनप्रतिनिधियों की भूमिका केवल औपचारिक हस्ताक्षरकर्ता तक सीमित होती जा रही है, जो लोकतांत्रिक विकेन्द्रीकृत शासन व्यवस्था के लिए अत्यंत चिंताजनक स्थिति है।
बैठक में यह विषय भी प्रमुखता से सामने आया कि नगरीय निकायों को निरंतर विकास कार्यों एवं प्रशासनिक स्वीकृतियों का लाभ प्रदान किया जा रहा है, जबकि ग्राम पंचायतों को एक वर्ष पूर्ण होने के उपरांत भी अपेक्षित कार्य एवं योजनाएं उपलब्ध नहीं कराई जा रही हैं। पंचायत प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि कार्य आवंटन के संबंध में केवल आश्वासन देकर समयावधि बढ़ाई जा रही है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों का समग्र विकास प्रभावित हो रहा है।
बैठक के अंत में सरपंच संघ कुरूद द्वारा प्रशासन को 15 दिवस की समयसीमा निर्धारित करते हुए मांग की गई कि उपरोक्त समस्त समस्याओं का त्वरित एवं प्रभावी निराकरण सुनिश्चित किया जाए। अन्यथा पंचायत प्रतिनिधियों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा, पंचायत स्वायत्तता की बहाली एवं ग्रामीण विकास कार्यों के सुचारु संचालन हेतु व्यापक एवं चरणबद्ध आंदोलन प्रारंभ किया जाएगा, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
बैठक में यह भी कहा गया कि लोगों में सरपंचों के प्रति बढ़ रहा आक्रोश और प्रशासन की लगातार उदासीनता के कारण सरपंच बीच मझधार में फंस गए हैं। यदि समय रहते प्रशासन पंचायत प्रतिनिधियों की समस्याओं का समाधान नहीं करता, तो सरपंच किसी बड़े कदम के लिए मजबूर हो जाएंगे, जिसकी पूर्ण जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
वक्ताओं ने कहा कि एक ओर गांवों को देश का भविष्य बताया जाता है, वहीं दूसरी ओर गांवों एवं पंचायतों की लगातार उपेक्षा की जा रही है, जो अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण एवं शर्मनाक स्थिति है। जब गांव समृद्ध नहीं होंगे तो देश कैसे समृद्ध हो सकता है। वर्तमान में केवल कागजों पर विकास दिखाई दे रहा है, जबकि वास्तविकता में गांवों तक उसका लाभ नहीं पहुंच पा रहा है।
बैठक में यह भी कहा गया कि ऐसे हालात में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा विकसित भारत एवं विजन 2047 के सपनों को धरातल पर उतारना तभी संभव होगा जब गांव, पंचायत एवं ग्रामीण व्यवस्था को मजबूत किया जाए।
अंत में जिलासरपंचसंघ अध्यक्ष टिकेश साहू ने कहा पंचायतों की भागीदारी से ही हो सकेगी गावों का सर्वांगीण विकास
इस महत्वपूर्ण बैठक में लगभग 76 सरपंच उपस्थित रहे तथा सभी ने एक स्वर में पंचायत अधिकारों एवं ग्रामीण विकास के मुद्दों पर एकजुटता व्यक्त करते हुए संघर्ष का संकल्प लिया।








