-दिखावे की कार्रवाई से नहीं चलने वाला है काम =
-कार्रवाई होने के बाद दूसरे दिन ही सिर उठा लेते हैं रेत माफिया =
-अवैध परिवहन करते वाहन किए गए जप्त =
-अर्जुन झा-
जगदलपुर। बस्तर कलेक्टर आकाश छिकारा एवं के कड़े रुख के बाद भले ही जिले में अवैध उत्खनन और परिवहन करने वालों के खिलाफ बड़ा अभियान छेड़ दिया गया है, मगर ताज्जुब की बात तो यह है कि यही माफिया कार्रवाई होने के दूसरे दिन बाद ही फिर से सिर उठा लेते हैं। जुर्माना भरने के बाद उनके वाहन भले ही छूट जाते हैं, मगर बाद में वे दूसरे वाहनों के जरिए रेत और अन्य गौण खनिजों का अवैध खनन एवं परिवहन शुरू कर देते हैं। विभाग के मैदानी अधिकारियों और कुछ राजनेताओं के संरक्षण में यह खेल बदस्तूर चलते रहता है।
बीते 27 मई को जिला खनिज अधिकारी शिखर चेरपा के मार्गदर्शन में खनिज जांच दल ने बस्तर जिला अंतर्गत विभिन्न क्षेत्रों में बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया।
खनिज महकमे की टीम ने मांदर, रायकोट और कोड़ेनार जैसे संवेदनशील इलाकों में औचक निरीक्षण करते हुए अवैध रूप से गौण खनिज का परिवहन कर रहे छह वाहनों को रंगेहाथों पकड़ा। बिना वैध अभिवहन पास (रॉयल्टी पर्ची) के खनिजों का परिवहन करते पाए जाने पर इन सभी वाहन चालकों और मालिकों के खिलाफ अवैध परिवहन का प्रकरण पंजीबद्ध किया गया है तथा खनिज से लदे सभी वाहनों को तुरंत जप्त कर पुलिस अभिरक्षा में सौंप दिया गया है। इस छापेमारी के दौरान अलग-अलग क्षेत्रों से रेत और चूना पत्थर का अवैध कारोबार उजागर हुआ है। खनिज विभाग द्वारा जारी विवरण के अनुसार, मांदर क्षेत्र में रेत का अवैध परिवहन करते हुए तीन गाड़ियां पकड़ी गईं। इसी तरह रायकोट क्षेत्र में जांच दल ने हाईवा को अवैध रूप से चूना पत्थर ले जाते हुए जप्त किया। इसके अलावा कोड़ेनार क्षेत्र में भी रेत के अवैध परिवहन पर कार्रवाई की गई, जहां दो टिप्परों को खनिज सहित अपनी अभिरक्षा में लिया गया। प्रशासन ने इस मामले में संलिप्त सभी वाहन मालिकों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है। खनिज अधिकारी ने स्पष्ट किया है कि इन सभी आरोपियों के विरुद्ध छत्तीसगढ़ गौण खनिज नियमावली 2015 के नियम 71 और खान एवं खनिज (विकास तथा विनियमन) अधिनियम 1957 की धारा 21 के अंतर्गत कड़ी दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने पूर्व में दी गई चेतावनियों को दोहराते हुए कहा कि बिना वैध पास के खनिजों का परिवहन करना एक गंभीर और दंडनीय अपराध है। यदि भविष्य में इन्हीं परिवहनकर्ताओं द्वारा दोबारा ऐसा कृत्य किया गया, तो और भी कठोर कदम उठाए जाएंगे। कलेक्टर के निर्देशानुसार जिले में खनिज संपदा की चोरी रोकने और अवैध परिवहन पर प्रभावी नियंत्रण बनाए रखने के लिए खनिज अमले द्वारा यह आकस्मिक जांच अभियान आगे भी निरंतर जारी रहेगा, जिससे क्षेत्र के खनिज माफियाओं में हड़कंप मचा हुआ है।
फिर क्यों सिर उठा लेते हैं माफिया?
बकावंड, जिले में खनिज विभाग द्वारा लगातार खनिज माफियाओं के खिलाफ कार्रवाई करना अच्छी बात है, मगर बकावंड और करपावंड क्षेत्र में कार्रवाई के दूसरे दिन ही रेत का उत्खनन शुरू हो जाना यह साबित करता है कि विभाग से ज्यादा माफिया मजबूत हैं। कलेक्टर के कड़े रुख के चलते खनिज अधिकारी चेरपा भले ही द्वारा ऐसी कार्रवाईयों को अंजाम दे रहे हैं, मगर इन कार्रवाईयों पर जमीनी तौर पर कड़ा क्रियान्वयन करनें में श्री चेरपा के मातहत अधिकारी न जाने क्यों मजबूर हैं? खनिज विभाग के अधिकारी के रिश्तेदार से लेकर भू माफिया भी अपने संरक्षणदाता आकाओं के माध्यम से लगातार अवैध खनन और परिवहन को अंजाम देते आ रहे हैं। बकावंड और करपावंड इलाके में ऎसी गतिविधियां आसानी से देखी जा सकती हैं। इसे देखते हुए इन इलाकों के किसान और ग्रामीण कहते हैं हैं कि नदियों के गुनहगारों के फन कुचलना अब जरूरी हो गया है।








