-खाद्य निरीक्षक और राशन दुकान संचालक की मिलीभगत से खेल =
-राशन विक्रेता के पास हितग्राही बेच देते हैं चावल और राशन =
-अर्जुन झा-
बकावंड। फ्रीबीज यानि मुफ्त की सुविधाएं अब सिस्टम पर ही भारी पड़ रही हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोरोना काल में हर परिवार को मुफ्त में राशन उपलब्ध कराने जो योजना शुरू की थी, वह प्रशासन के लिए कोरोना से भी बड़ी महामारी साबित हो रही है। गरीब वंचित परिवार मुफ्त में मिलने वाले चावल और राशन को पीडीएस राशन दुकान संचालक के पास बेच देते हैं। बाद में उसी चावल और राशन को संबंधित दुकान संचालक बाजार में ऊंची कीमत पर बेच देते हैं। यह सारा खेल खाद्य निरीक्षक के संरक्षण में चल रहा है। ऐसा ही बड़ा मामला बकावंड विकासखंड की डिमरापाल ग्राम पंचायत से सामने आया है।
उल्लेखनीय है कि जब कोरोना से पूरी दुनिया में त्राहिमाम मचा हुआ था, हजारों लोगों का रोजी रोजगार छिन गया था। दुनिया भर में खाद्यान्न की समस्या पैदा हो गई थी। ऐसे मुश्किल दौर में भारत के गरीब परिवारों को भुखमरी से बचाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुफ्त की राशन योजना शुरू की थी। इस योजना के तहत हितग्राहियों को चावल उत्पादक क्षेत्रों में 35 किलो चावल और गेहूं उत्पादक क्षेत्रों में इतनी ही मात्रा में प्रति परिवार गेहूं दिया जाता है। देश के गरीबों के हितों को ध्यान में रखते हुए यह योजना अब भी जारी रखी गई है, मगर कोरोना काल की यह योजना अब प्रशासन के लिए ही कोरोना से भी बड़ी महामारी बन चुकी है।. ज्यादातर गरीब परिवार मुफ्त में मिलने वाले अपने हिस्से के चावल, गेहूं, शक्कर, गुड़, चना आदि खाद्यान्न को सार्वजनिक वितरण प्रणाली के राशन दुकान संचालक के पास बेच देते हैं। बाद में राशन दुकान संचालक इस खाद्यान्न को ऊंची कीमत पर निजी दुकानदारों के पास बेच देते हैं। बकावंड ब्लॉक की डिमरापाल ग्राम पंचायत के राशन दुकान संचालक चितरंजन सेठिया द्वारा भी ऎसी ही कालाबाजारी खुलकर की जा रही है। ग्रामीणों के मुताबिक दुकान संचालक चितरंजन सेठिया कई क्विंटल राशन इसी तरीके से खुले बाजार में बेचा जा रहा है। ग्रामीण पिछले दो माह से खाद्य निरीक्षक संजय शर्मा से मामले की शिकायत करते आ रहे हैं, मगर आज तक दुकान संचालक पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
डिमरापाल के ग्रामीणों का कहना है कि हर महीने मिलने वाले राशन में से अनुसार हितग्राहियों को पूरा चावल तो दिया जाता है। वहीं अनेक उपभोक्ता पैसे लेकर अपने हिस्से राशन दुकान संचालक चितरंजन सेठिया के पास बेच देते हैं। चितरंजन सेठिया इस राशन को उठाकर बाजार में खपा दिया जाता है। आरोप यह भी है कि दुकान में रिकॉर्ड कुछ और दिखाया जाता है, जबकि वास्तविक वितरण अलग तरीके से किया जाता है। इस गंभीर मामले की शिकायत लगभग दो महीने पहले फूड विभाग के अधिकारियों को लिखित एवं मौखिक रूप से की गई थी। शिकायतकर्ताओं ने स्पष्ट रूप से बताया था कि राशन दुकान से सरकारी चावल बाहर भेजा जा रहा है और बाजार में महंगे दामों पर बेचा जा रहा है। बावजूद इसके आज तक न तो जांच हुई और न ही किसी जिम्मेदार पर कार्रवाई की गई। ग्रामीणों का आरोप है कि फूड विभाग के अधिकारी मामले को जानबूझकर नजरअंदाज कर रहे हैं। शिकायत के बाद भी अधिकारियों की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है। आखिर गरीबों के हक पर डाका डालने वालों पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही? क्या जिम्मेदार अधिकारियों की मिलीभगत से यह पूरा खेल चल रहा है? ग्रामीणों का कहना है कि अगर समय रहते जांच कर कार्रवाई नहीं हुई तो वे कलेक्टर कार्यालय का घेराव करने को मजबूर होंगे। लोगों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि शासन गरीबों को मुफ्त राशन देने की योजना चला रहा है, लेकिन जमीनी स्तर पर भ्रष्टाचार और लापरवाही के कारण जरूरतमंदों तक पूरा लाभ नहीं पहुंच पा रहा है। अब देखना यह होगा कि फूड विभाग इस गंभीर मामले को कब तक ठंडे बस्ते में डालकर रखता है और गरीबों के हक के राशन की कालाबाजारी करने वालों पर आखिर कब कार्रवाई होती है?








