बीजापुर संवाददाता – पुकार बाफना
बीजापुर 4 जून 2026- बीजापुर जिले में खेती को अधिक टिकाऊ का लागत वाली और पर्यावरण अनुकूल बनाने के उददेश्य से खेत बचाओ अभियान की शुरुआत हो चुकी है। कृषि विभाग की टीम गांव-गांव पहुंचकर किसानों को मिटटी की बिगड़ती सेहत, रासायनिक उर्वरको के बढ़ते उपयोग, कृषि जैव विविधता के संरक्षण और प्राकृतिक खेती के महत्व के बारे में जागरुक कर रही है। 1 जून से 30 जून तक इस अभियान के तहत् जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों में किसान संगोष्ठियों और जनजागरुकता कार्यक्रमों का आयोजन किया जायेगा।
बीजापुर जिला पूर्णतः कृषि पर आधारित है। ऐसे में कृषि भूमि की उर्वरता बनाए रखना और खेती को भविष्य के लिए सुरक्षित करना सबसे बड़ी प्राथमिकता है। लगातार रासायनिक उर्वरकों और कृषि दवाओं के उपयोग से मिटटी की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है जिसका असर उत्पादन के साथ-साथ मानव स्वास्थ्य पर भी पड़ रहा है। इसी चुनौती को ध्यान में रखते हुए किसानों को प्राकृतिक और जैविक खेती की ओर प्रेषित करने के लिए यह विशेष अभियान चलाया जा रहा है। अभियान के दौरान आयोजित किसान संगोष्ठियों में रासायनिक उर्वरकों और कृषि आदानों के मिटटी तथा मानव स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभावों पर कृषि अधिकारी आकर व्याख्यान देंगे।
इनकी भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी
प्राकृतिक खेती को जनआंदोलन का स्वरुप देने अभियान में कृषि सखी, स्वयं सहायता समूहों, किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ), बीआरसी समूह, पंचायत प्रतिनिधियों और ग्रामीण समुदायों की भागीदारी सुनिश्चित करेंगे। किसान फील्ड स्कूलों में अनुभवी प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों को शामिल कर किसान से किसान सीखने की व्यवस्था को मजबूत किया जाएगा। बायो-इनपुट रिसोर्स सेंटरों के माध्यम से मिटटी को उपजाऊ बनाए रखने वाले जैव-अणुओं के उपयोग को बढ़ावा दिया जाएगा।
हरी खाद के उपयोग को बढ़ावा देने उपाय बताएंगे
कार्यक्रमों में हरी खाद के उपयोग को बढ़ावा देने, मिटटी को जैविक संरचना को मजबूत करने तथा भूमि की उर्वरता बनाए रखने के उपायों पर भी विस्तार से चर्चा होगी। किसानों को जीवामृत, घनजीवामृत, नीमास्त्र, ब्रम्हास्त्र एवं अन्य जैविक और प्राकृतिक कृषि उत्पादों को प्रदर्शन कर उनके उपयोग और लाभों की जानकारी दी जाएगी। इसके अलावा उन्नत बीजों के चयन, आधुनिक कृषि तकनीकों और कृषि यंत्रो के बेहतर एवं वैज्ञानिक उपयोग की जानकारी भी दी जाएगी ताकि किसान उपलब्ध संसाधनों का अधिकतम लाभ उठा सकें।








