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सैटेलाइट तस्वीरों में कमजोर पड़ा मानसून, 17 राज्यों में बारिश का इंतजार लंबा

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4 से 15 जून के बीच सामान्य से 64% कम वर्षा दर्ज; मध्य प्रदेश, राजस्थान समेत कई राज्यों में सूखे जैसे हालात, किसानों की बढ़ी चिंता

देश के बड़े हिस्से में मानसून की रफ्तार धीमी पड़ती दिखाई दे रही है। हालिया सैटेलाइट तस्वीरों में भारत के मध्य, पश्चिमी और उत्तरी क्षेत्रों के ऊपर मानसूनी बादलों की सक्रियता सामान्य से काफी कम नजर आई है। इसके चलते मध्य प्रदेश, राजस्थान सहित 17 राज्यों में बारिश का इंतजार लगातार बढ़ता जा रहा है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार जून के शुरुआती पखवाड़े में अपेक्षित वर्षा नहीं होने से कृषि गतिविधियों और जल संसाधनों पर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है।

मौसम से जुड़े आंकड़ों के अनुसार 4 जून से 15 जून के बीच देशभर में सामान्य वर्षा की तुलना में लगभग 64 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई। कई राज्यों में मानसून की प्रगति धीमी होने के कारण तापमान भी सामान्य से ऊपर बना हुआ है। खेतों में बुवाई की तैयारी कर चुके किसानों को अब पर्याप्त बारिश का इंतजार है, जिससे खरीफ फसलों का कार्यक्रम प्रभावित हो सकता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून के दौरान बादलों की स्थिति और उनकी सक्रियता लगातार बदलती रहती है। वर्तमान में नमी वाले बादल मुख्य रूप से समुद्री क्षेत्रों और दक्षिणी हिस्सों में अधिक सक्रिय दिखाई दे रहे हैं, जबकि मध्य और उत्तर भारत के कई इलाकों में उनकी मौजूदगी अपेक्षाकृत कमजोर है। इसी वजह से कई राज्यों में वर्षा की गतिविधियां सामान्य स्तर तक नहीं पहुंच सकी हैं।

मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब और दिल्ली समेत कई क्षेत्रों में लोग भीषण गर्मी और उमस से राहत देने वाली बारिश का इंतजार कर रहे हैं। मौसम विभाग का मानना है कि आने वाले दिनों में मानसूनी परिस्थितियों में सुधार होने पर वर्षा की गतिविधियां बढ़ सकती हैं, जिससे बारिश की कमी कुछ हद तक पूरी होने की संभावना है।

मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि मानसून की शुरुआत में कभी-कभी ऐसी सुस्ती देखने को मिलती है, लेकिन यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है तो कृषि उत्पादन, जलाशयों के जलस्तर और पेयजल उपलब्धता पर असर पड़ सकता है। इसलिए आने वाले एक-दो सप्ताह मानसून की दिशा और गति तय करने के लिहाज से महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।

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