रायपुर संवाददाता – रघुराज
भिलाई नगर निगम क्षेत्र के वार्ड नंबर सात, आर्य नगर (उल्लास नगर/यप्पा नगर) में आज सुबह तड़के नगर निगम, जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन की संयुक्त टीम द्वारा अवैध निर्माण और अतिक्रमण पर एक बहुत बड़ी कार्रवाई की गई है। माननीय उच्च न्यायालय (हाई कोर्ट) के दिशा-निर्देशों और आदेश के बाद प्रशासनिक अमला सुबह लगभग 4:00 बजे दलबल के साथ मौके पर पहुंचा और देखते ही देखते कई सालों पुराने अवैध कब्जों, मकानों और एक मदरसे को पूरी तरह से जमींदोज कर दिया गया। इस कार्रवाई के दौरान सुरक्षा और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था।
प्रशासनिक अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार, यह पूरी जमीन लगभग सवा एकड़ की है, जो आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के लिए आरक्षित थी। नियमानुसार, कोई भी कॉलोनाइजर जब कॉलोनी काटता है, तो वह गरीब तबके के लोगों के आवास निर्माण के लिए कुछ जमीन छोड़ता है, जिसे ईडब्ल्यूएस की जमीन कहा जाता है। आर्य नगर की इस सरकारी जमीन पर पिछले कई सालों से कुछ लोग झोपड़ीनुमा मकान और अन्य पक्के निर्माण करके अवैध रूप से काबिज थे। इसी सवा एकड़ की जमीन पर दारे उलूम फैजाने करीमिया नामक एक मदरसा भी संचालित हो रहा था, जिसमें बताया जा रहा है कि लगभग 50 से 60 बच्चे शिक्षा ग्रहण करते थे और वहां एक यतीमखाना भी मौजूद था।
नगर निगम भिलाई के उपायुक्त दिनेश कोसरिया ने बताया कि यह जमीन पूरी तरह से शासकीय संपत्ति है। जब शुरुआत में यहां छोटे निर्माण किए जा रहे थे, तभी से नगर निगम द्वारा लगातार नोटिस जारी कर इसे खाली करने की चेतावनी दी जा रही थी। पूर्व में तीन-चार साल पहले, यानी साल 2019 के आसपास भी इस जगह पर बेदखली की कार्रवाई की गई थी। उस समय निर्माण बहुत कम और छोटे थे, लेकिन बाद में धीरे-धीरे यहां फिर से बड़े और पक्के स्ट्रक्चर खड़े कर लिए गए। इस बीच यह पूरा मामला माननीय उच्च न्यायालय में भी चला, जहां लंबी सुनवाई के बाद कोर्ट ने इस ईडब्ल्यूएस की जमीन को खाली कराने का एक स्पष्ट आदेश पारित किया। कोर्ट के इसी निर्देश का पालन करते हुए भिलाई नगर निगम ने जिला और पुलिस प्रशासन के सहयोग से संयुक्त टीम बनाकर यह बड़ी बेदखली कार्रवाई की है।
कार्रवाई के दौरान मौके पर शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन ने पूरी चौकसी बरती थी। कानून व्यवस्था की स्थिति संभालने के लिए लगभग 100 से अधिक पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया था, जिनमें आठ पुलिस इंस्पेक्टर, दो राजपत्रित अधिकारी, सब-डिवीजनल मजिस्ट्रेट (एसडीएम) और एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट खुद मौके पर उपस्थित रहे। अधिकारियों का कहना है कि पूरी बेदखली प्रक्रिया पूरी तरह से शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुई और किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति या गंभीर विरोध का सामना नहीं करना पड़ा। निगम का कहना है कि खाली कराई गई इस कीमती जमीन पर अब सरकार की योजना के अनुसार आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत पक्के मकानों का निर्माण प्रस्तावित है।
दूसरी तरफ, इस अचानक हुई बुलडोजर कार्रवाई से प्रभावित स्थानीय परिवारों में भारी आक्रोश, मायूसी और दुख का माहौल देखा गया। मलबे के ढेर के पास बैठे प्रभावित लोगों ने प्रशासन पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। वार्ड के रहवासियों का कहना है कि वे इस जगह पर पिछले 12 से 25 सालों से रह रहे हैं। उनका दावा है कि वे नियमित रूप से बिजली बिल और अन्य टैक्स भी पटाते आ रहे हैं। प्रभावित महिलाओं और पुरुषों का सबसे बड़ा आरोप यह था कि उन्हें इस कार्रवाई की कोई पूर्व सूचना या ताजा नोटिस नहीं दिया गया था। लोगों का कहना था कि सुबह जब वे सोकर उठे, तो अचानक 4:00 से 5:00 बजे के बीच भारी संख्या में पुलिस और निगम की गाड़ियां उनके घरों के सामने आकर खड़ी हो गईं।
प्रभावितों ने रोते हुए अपनी आपबीती सुनाई कि अधिकारियों ने उन्हें अपने घरों से सामान निकालने तक का ठीक से मौका नहीं दिया। आनंद-फानन में लोग जितना सामान बाहर खींच पाए, उतना तो बच गया, लेकिन उनका आधा से ज्यादा घरेलू सामान, राशन और कीमती चीजें मकानों के मलबे के नीचे ही दबकर नष्ट हो गईं। स्थानीय निवासी नसीर अहमद ने बताया कि वह यहां 15 सालों से रह रहे हैं। उन्होंने माना कि करीब तीन-चार महीने पहले एक नोटिस की बात सामने आई थी, लेकिन हाल-फिलहाल में कोई चेतावनी नहीं दी गई। वहीं सुरैया बानो और रुबीना कुरैशी जैसी महिलाओं ने कहा कि अगर अधिकारी पिछले दो-तीन दिनों से इलाके का चक्कर लगा रहे थे, तो उन्हें पहले ही साफ तौर पर बता देना चाहिए था ताकि वे अपना नुकसान होने से बचा लेते और समय रहते अपना सामान सुरक्षित जगहों पर शिफ्ट कर लेते।
प्रभावित परिवारों के सामने अब सबसे बड़ा संकट सिर छिपाने की छत का खड़ा हो गया है। जून का महीना होने के कारण मानसून की दस्तक होने वाली है और कुछ ही दिनों में भारी बारिश का दौर शुरू हो जाएगा। ऐसे में छोटे-छोटे बच्चों और महिलाओं के साथ ये परिवार पूरी तरह से बेघर हो चुके हैं। मलबे के पास ही उनका गृहस्थी का सामान बिखरा पड़ा है। बेघर हुए लोगों का कहना है कि उनके पास इस जगह के अलावा पूरे शहर में कोई दूसरा मकान या जमीन नहीं है। वे पूरी तरह से सड़क पर आ चुके हैं। कुछ पीड़ितों ने भावुक होकर कहा कि अगर सरकार ने उनका आशियाना छीना है, तो उन्हें तुरंत रहने के लिए दूसरी जगह व्यवस्था करके दी जानी चाहिए, अन्यथा वे इस बारिश के मौसम में अपने बच्चों को लेकर इसी सड़क पर रहने को मजबूर होंगे।
निगम प्रशासन ने विस्थापन और पुनर्वास के सवाल पर प्रभावितों को आश्वस्त करने का प्रयास किया है। उपायुक्त दिनेश कोसरिया ने स्पष्ट किया कि जिन लोगों के मकान तोड़े गए हैं, उन्हें बेसहारा नहीं छोड़ा जाएगा। चूंकि भिलाई नगर निगम क्षेत्र में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत लगातार पक्के मकानों का निर्माण किया जा रहा है, इसलिए नियमानुसार इन सभी पात्र प्रभावितों को वहां फ्लैट या मकान आवंटित किए जाएंगे। इसके लिए अधिकारियों ने मौके पर ही लोगों से कहा है कि वे विधिवत तरीके से प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए अपना आवेदन जमा करें। आवेदन की स्क्रूटनी और नियमों के तहत आवंटन की प्रक्रिया पूरी कर उन्हें जल्द से जल्द पक्के मकानों में विस्थापित (शिफ्ट) कर दिया जाएगा।
मदरसे के टूटने को लेकर भी स्थानीय स्तर पर काफी भावुक दृश्य देखने को मिले। मलबे के बीच से बच्चे अपनी किताबें, कॉपियां और धार्मिक ग्रंथ ढूंढते नजर आए। कुछ स्थानीय लोगों का यह भी दबी जुबान में आरोप था कि हाई कोर्ट की तरफ से ऐसा कोई सख्त आदेश नहीं था और प्रशासन ने जबरन इतनी बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। हालांकि, प्रशासनिक अधिकारियों ने साफ किया है कि कानून के दायरे में और पूरी विधिक प्रक्रिया का पालन करते हुए ही इस अवैध कब्जे को हटाया गया है ताकि इस सरकारी जमीन का उपयोग उसी उद्देश्य (गरीबों के आवास) के लिए किया जा सके जिसके लिए यह आरक्षित थी। फिलहाल, आर्य नगर में मलबा हटाने और जमीन को पूरी तरह साफ करने का काम अंतिम दौर में है, लेकिन बेघर हुए परिवारों का भविष्य अब सरकारी आवास के आवंटन की गति पर निर्भर करता है।








