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प्रवेश उत्सव के दिन ‘शिक्षा के मंदिर’ में मारपीट – पाली स्कूल में प्राचार्य-व्याख्याता की हाथापाई, शिक्षकों ने दिया आंदोलन का अल्टीमेटम

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पाली संवाददाता – दीपक शर्मा
कोरबा/पाली:- प्रदेश के स्कूलों में जहां एक तरफ शाला प्रवेशोत्सव की घूम है तो पाली में शिक्षा के मंदिर की मर्यादा तार-तार हो गई। शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय पाली में सोमवार 16 जून 2026 को प्राचार्य मनोज शरफ और व्याख्याता प्रखर पांडे के बीच जमकर हाथापाई हो गई। घटना की सूचना मिलते ही एस डी एम रोहित सिंह के निर्देश पर नायब तहसीलदार सुजीत पाटले स्कूल पहुंचे और सभी शिक्षक-शिक्षिकाओं से पूछताछ की।
4 महीने से चल रहा था विवाद  
स्कूल में पदस्थ शिक्षकों के मुताबिक प्राचार्य मनोज सराफ लगभग 5 साल से और व्याख्याता प्रखर पांडे 6 साल से यहां पदस्थ हैं। पूर्व में दोनों के संबंध सौहार्दपूर्ण थे, लेकिन पिछले 4 महीने से दोनों के बीच भयंकर विवाद चल रही है।
स्टाफ के बयानों से विवाद की 2 मुख्य वजहें सामने आईं:  
1. सर्विस बुक विवाद: व्याख्याता प्रखर पांडे का आरोप है कि प्राचार्य ने उनकी सर्विस बुक अधूरी रखी है और जांच करने पर भी दिखाने से इनकार कर रहे हैं।
2. लैब सामान विवाद: प्रयोगशाला में रखे सील बंद सामान को लेकर भी दोनों में मतभेद है ।
शुरुआत व्हाट्सएप ग्रुप की बहस से हुई जो सोमवार को मारपीट तक पहुंच गई।
पहले भी हुई थी शिकायत, कार्रवाई नहीं  
यह पहली घटना नहीं है। पहले भी विवाद बढ़ने पर नगर पंचायत अध्यक्ष अजय जायसवाल, उपाध्यक्ष लखन प्रजापति और शाला विकास समिति अध्यक्ष राम बिलास जायसवाल ने उच्च अधिकारियों को लिखित शिकायत देकर कार्रवाई की मांग की थी। लेकिन तब सिर्फ औपचारिक जांच कर मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।
‘माहौल खराब, अब आंदोलन करेंगे’  
शिक्षक-शिक्षिकाओं ने कहा कि दोनों के बीच लगातार चल रहे विवाद से स्कूल का पूरा माहौल खराब हो चुका है। इसका सीधा असर बच्चों की पढ़ाई और स्टाफ की मानसिक स्थिति पर पड़ रहा है। वर्तमान स्थिति शिक्षा के लिए बिल्कुल अनुकूल नहीं है।
           स्टाफ ने चेतावनी दी – अगर विवाद का त्वरित समाधान नहीं हुआ या विवादित प्राचार्य व व्याख्याता का अन्यत्र स्थानांतरण नहीं किया गया, तो वे शिक्षण कार्य छोड़कर आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
नपं अध्यक्ष ने DEO को लिखा पत्र  
घटना के तुरंत बाद नगर पंचायत अध्यक्ष अजय जायसवाल ने जिला शिक्षा अधिकारी टीपी उपाध्याय को पत्र लिखकर त्वरित संज्ञान लेने की मांग की है। उन्होंने कहा कि दोनों विवादित अधिकारियों का तत्काल स्थानांतरण कर निष्पक्ष जांच कराई जाए, वरना यह विवाद किसी बड़ी घटना में बदल सकता है। नपं अध्यक्ष के अनुसार इस झगड़े से पाली क्षेत्र की शिक्षा व्यवस्था प्रभावित हो रही है।
मामले में स्थानीय लोगों का कहना है कि पहले दोनों के बीच मधुर संबंध और फिर बड़ा विवाद की मुख्य वजह की जांच होनी चाहिए और जांच तक प्राचार्य और व्याख्याता दोनों की यहां से अन्यत्र स्थानांतरित करना चाहिए जिससे जांच प्रभावित ना हो, क्योंकि हो सकता है कि इस विवाद की असली वजह बड़ा हेरफेर या राशि गबन से भी हो सकता है, जिसकी शिकायत भी पूर्व में हो चुकी है जिसमें प्राचार्य मनोज सराफ पर शासकीय कार्यों में वित्तीय अनियमितता एवं राशि गबन जैसे आरोप लगे थे। मामले में कलेक्टर कोरबा द्वारा संचालक लोक शिक्षण संचनालय रायपुर को दिनांक 16.02.2024 को प्रेषित पत्र में श्री सराफ द्वारा सोलह लाख छिहत्तर हजार आठ सौ एकहत्तर रुपए की गंभीर वित्तीय अनियमितता के आरोप में अनुशासनात्मक कार्यवाही के जाना प्रस्तावित था।
      कोरबा जिले में शिक्षा के मंदिर में हुई इस घटना ने पूरे शिक्षा जगत को शर्मसार किया है। अब देखना होगा कि प्रशासन समय रहते क्या कदम उठाता है।

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