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छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का रायपुर में होगा शुभारंभ

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लोक साहित्य संगोष्ठी में डा.महंत का व्याख्यान
       रायपुर 17 जून 2026। पुरातत्व , अभिलेखागार, संग्रहालय संचालनालय, संस्कृति विभाग छत्तीसगढ़ शासन द्वारा दिनांक 18 एवं 19 जून 2026 को”  रायपुर में ” लोक साहित्य के दर्पण में अतीत का प्रतिबिम्ब ” विषय पर दो दिवसीय संगोष्ठी आयोजित की गई है।
      संगोष्ठी के प्रथम दिवस दिनांक 18 जून 2026 को प्रथम सत्र में नगर के वरिष्ठ साहित्यकार और लोक साहित्य अध्येता डा. देवधर महंत द्वारा ” छत्तीसगढ़ी लोक साहित्य में सरिताएं ” विषय पर अपना शोध आलेख प्रस्तुत किया जाएगा।
    सत्र की अध्यक्षता डा.चित्तरंजन कर
पूर्व अध्यक्ष , हिंदी एवं भाषा विज्ञान विभाग एवं संकायाध्यक्ष कला संकाय विभाग, पं.रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय रायपुर द्वारा की जावेगी।
      कार्यक्रम का शुभारंभ 18 जून को प्रातः 11:00 बजे होगा। इतिहासकार प्रो. आदित्य प्रताप देव, सेंट स्टीफेंस कॉलेज, दिल्ली आधार वक्तव्य प्रस्तुत करेंगे और छत्तीसगढ़ी लोक संस्कृति के वैश्विक एवं स्थानीय महत्व पर प्रकाश डालेंगे। विभाग के संचालक डॉ. संजय कन्नौजे कला-संस्कृति प्रेमियों का स्वागत करेंगे।
द्वितीय सत्र: आचार्य रमेन्द्रनाथ मिश्र की अध्यक्षता में छत्तीसगढ़ की लोकगाथाओं, लोकसाहित्य में अतीत के प्रतिबिम्ब और संत गहिरा गुरु के योगदान पर विद्वान अपने विचार रखेंगे।
      19 जून के कार्यक्रम की रूपरेखा : तृतीय सत्र (सुबह 10:30–12:30): डॉ. सत्यभामा आडिल की अध्यक्षता में बैगा जनजाति की चिकित्सा पद्धति, लोकोक्तियों और ‘कुँवर अछरिया’ लोकगाथा पर चर्चा होगी।
    चतुर्थ सत्र (दोपहर 12:30–02:30): श्री राहुल कुमार सिंह की अध्यक्षता में बस्तर की सांस्कृतिक पाठशाला ‘घोटुल’ और लोक-साहित्य से डिजिटल मंच तक की यात्रा पर विमर्श किया जाएगा।
पंचम सत्र (शाम 3:00–05:30): डॉ. रूद्र नारायण पाणिग्रही की अध्यक्षता में ‘झिटकू-मिटकी’ की प्रेम गाथा, आदिवासियों की ‘भंगाराम जात्रा’ और मुरिया जनजाति के नृत्यों पर शोध पत्र प्रस्तुत किए जाएंगे।
   यह संगोष्ठी लुप्त होती लोक परंपराओं को पुनर्जीवित करने तथा नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास होगी। इसमें देश भर के विद्वान, शोधकर्ता और संस्कृतिकर्मी भाग लेंगे।
संवाददाता:बसंत राघव

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