रायपुर संवाददाता – रघुराज
रायपुर धमतरी। छत्तीसगढ़ में भारतमाला परियोजना के तहत अधिग्रहित जमीनों के मुआवजे में बड़े खेल की परतें अब एक एक कर खुलने लगी हैं। धमतरी जिले के कुरूद क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम सिवनीकला से एक ऐसा चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने इस राष्ट्रीय परियोजना के सर्वे और राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि कुछ चुनिंदा रसूखदारों और भू माफियाओं को करोड़ों रुपये का अनुचित लाभ पहुंचाने के लिए एक्सप्रेस वे की मूल दिशा को ही बदल दिया गया।
पॉइंट नंबर 21 के बाद घुमा दी गई सड़क
ग्राम सिवनीकला के प्रभावित किसानों और ग्रामीणों से मिली जानकारी के मुताबिक, परियोजना के शुरुआती आधिकारिक सर्वे में सड़क का मार्ग सीधा था। लेकिन खेल तब शुरू हुआ जब परियोजना के पॉइंट नंबर 21 के बाद सड़क को अचानक करीब 25 मीटर तक मोड़ दिया गया। इस मामूली से दिखने वाले 25 मीटर के टर्न ने एक बहुत बड़े घोटाले को जन्म दे दिया। जो कीमती जमीनें पहले इस प्रोजेक्ट के दायरे से बाहर थीं, वे अचानक इस मोड़ के कारण अधिग्रहण की जद में आ गईं। नतीजा यह हुआ कि जिन रसूखदारों की जमीनें कौड़ियों की थीं, वे रातों रात सरकार से करोड़ों रुपये का मुआवजा लेने के हकदार बन गए।
सांप की तरह टेढ़ी हो गई सड़क 1 किलोमीटर आगे से बदला टर्न
ग्रामीणों ने बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि सरकारी दस्तावेजों और शुरुआती सर्वे के अनुसार, सड़क का टर्न गांव के शुरुआती हिस्से से ही होना तय था। लेकिन बाद में एक सोची समझी रणनीति के तहत इस टर्न को एक किलोमीटर आगे खिसका दिया गया। इस बदलाव की वजह से सड़क का नक्शा सीधा रहने के बजाय सर्पाकार यानी सांप की तरह टेढ़ा हो गया है। ग्रामीणों का साफ कहना है कि देश के इतने बड़े और आधुनिक एक्सप्रेस वे का नक्शा बिना किसी भौगोलिक बाधा के इस तरह टेढ़ा मेढ़ा सिर्फ इसलिए किया गया ताकि चुनिंदा लोगों की जमीनों को जानबूझकर इसके अंदर शामिल किया जा सके।
भुइंया पोर्टल की लॉग हिस्ट्री खोलेगी राज
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा तकनीकी पेंच राजस्व रिकॉर्ड के डिजिटलाइजेशन में छुपा हुआ है। जागरूक किसानों का कहना है कि यदि शासन प्रशासन इस मामले को लेकर गंभीर है, तो उसे छत्तीसगढ़ सरकार के भुइंया पोर्टल की लॉग हिस्ट्री की बारीकी से तकनीकी जांच करानी चाहिए। भुइंया पोर्टल पर किसी भी खसरे या जमीन के रिकॉर्ड में जब भी कोई बदलाव, नाम हस्तांतरण, या रकबा संशोधन किया जाता है, तो सिस्टम के पीछे उसकी एक डिजिटल लॉग हिस्ट्री बनती है। इसमें यह साफ दर्ज होता है कि किस अधिकारी या कर्मचारी की आईडी से, किस तारीख को और किस समय पर रिकॉर्ड में बदलाव किया गया। अगर इस लॉग हिस्ट्री और रिकॉर्ड संशोधन की निष्पक्ष जांच हो जाए, तो यह साफ हो जाएगा कि भारतमाला प्रोजेक्ट का नोटिफिकेशन आने के ठीक पहले या बाद में किन जमीनों के खसरों में हेरफेर की गई और इसके पीछे कौन से बड़े चेहरे शामिल हैं।
किसानों में भारी आक्रोश आंदोलन की चेतावनी
इस घोटाले के सामने आने के बाद से ही सिवनीकला और आसपास के वास्तविक किसानों में भारी नाराजगी है। जिन किसानों की पुश्तैनी जमीनें बिना किसी वजह के इस कृत्रिम टर्न के कारण बर्बाद हो गईं, वे अब न्याय के लिए लामबंद हो रहे हैं। किसानों का आरोप है कि इस घोटाले के कारण न सिर्फ शासन के खजाने को करोड़ों रुपये का अतिरिक्त चूना लगाया गया है, बल्कि वास्तविक हकदारों के अधिकारों का भी हनन हुआ है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि इस मामले की उच्च स्तरीय जांच कर सड़क को वापस उसके मूल स्वरूप में नहीं लाया गया, तो वे उग्र आंदोलन और न्यायालय की शरण में जाने के लिए मजबूर होंगे।
आपकी क्या राय है
क्या विकास के नाम पर होने वाले ऐसे बड़े प्रोजेक्ट्स में रसूखदारों का यह खेल रुकना चाहिए। धमतरी और रायपुर के इस मामले पर अपनी राय नीचे कमेंट बॉक्स में जरूर दें और इस खबर को ज्यादा से ज्यादा शेयर करें ताकि सच सबके सामने आ सके।
ब्यूरो रिपोर्ट रायपुर








