किताब ए दिल का कोई भी सफा खाली नहीं होता, दोस्त! वहां भी हाल पढ़ लेते हैं जहां कुछ लिखा भी नहीं होता, इन पंक्तियों के साथ आज अगस्त के प्रथम रविवार अर्थात 2 अगस्त को राष्ट्रीय मित्रता दिवस के अवसर पर राष्ट्रीय मानवाधिकार एवं सामाजिक न्याय आयोग (विधि) के प्रदेश अध्यक्ष एवं उच्च न्यायालय अधिवक्ता चितरंजय पटेल ने कहा कि मित्र है तो जिंदगी में ग़म में भी खुशी है और मित्र नहीं तो खुशी भी गम में गुजर जाती है।
आज मित्रता दिवस पर चर्चा करते हुए अधिवक्ता चितरंजय ने दोस्तों की महफिल में बताया कि हमारे देश में अगस्त माह के प्रथम रविवार पर फ्रेंडशिप डे मनाया जाता है जबकि वैश्विक इतिहास के अनुसार पराग्वे में डॉक्टर रेमन आर्टेमियो ब्राचो ने 30 जुलाई 1958 को दोस्तों के बीच शांति और भाईचारे के लिए ‘वर्ल्ड फ्रेंडशिप डे की नींव रखी पश्चात संयुक्त राष्ट्र महासभा ने वर्ष 2011 में आधिकारिक तौर पर 30 जुलाई को अंतर्राष्ट्रीय मित्रता दिवस घोषित किया।
आज दोस्तों के साथ हाथ मिलाकर व परस्पर गले मिलकर मित्रता दिवस की बधाई देते हुए आनंद लिया गया।
निश्चित रुप से पुराणों के अनुसार त्रेता में राम ने मित्रता निभाई तो लंका से उपेक्षित विभीषण को लंकेश बना दिया तो वहीं द्वापर में कृष्ण ने मित्रता निभाई तो सुदामा को रंक से राजा बना दिया। फिर, आज भी व्यक्ति का बड़ा से बड़ा संकट और दुख मित्रों के हम हैं न, कहते ही दूर हो जाता है इसलिए तो कहा गया है कि ए मेन नीड्स ए फ्रेंड इंडीड।







