पामगढ़। खरीफ सीजन की शुरुआत के साथ किसानों के लिए जून माह कृषि कार्यों की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इसी को ध्यान में रखते हुए संयुक्त जन जागरूकता अभियान के तहत वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डॉ. चंद्रशेखर खरे एवं प्रक्षेत्र विस्तार अधिकारी जितेंद्र कुमार खरे ने किसानों के लिए जून 2026 के प्रमुख कृषि कार्यों एवं वैज्ञानिक कृषि प्रबंधन संबंधी सलाह जारी की है।
कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों से सोयाबीन, अरहर एवं धान की बुवाई के लिए खेतों की तैयारी समय पर पूर्ण करने का आग्रह किया है। साथ ही खेतों की साफ-सफाई, मेड़ों की मरम्मत तथा खरीफ फसलों के लिए उचित जल निकासी व्यवस्था सुनिश्चित करने की सलाह दी गई है।
विशेषज्ञों ने लौकी, कुम्हड़ा, करेला, बरबटी, कुंदरू एवं परवल जैसी बेलदार फसलों की उन्नत खेती के लिए पॉलीबैग में पौध तैयार करने तथा मेड-नाली पद्धति अपनाने की अनुशंसा की है। फलदार पौधे लगाने के इच्छुक किसानों को वर्षा ऋतु से पहले गड्ढे तैयार करने की सलाह दी गई है।
धान उत्पादक किसानों को बीजोपचार पर विशेष ध्यान देने की सलाह देते हुए बताया गया है कि स्वयं उत्पादित बीजों को नमक घोल परीक्षण के बाद उपचारित करना चाहिए, जबकि प्रमाणित बीजों का फफूंदनाशकों से उपचार आवश्यक है। धान की कतार बुवाई करने तथा अंकुरण पूर्व अनुशंसित खरपतवारनाशी का उपयोग करने से उत्पादन में वृद्धि होती है।
वैज्ञानिकों ने अदरक एवं हल्दी की फसलों में मल्चिंग करने, फलदार वृक्षों की कटाई-छंटाई तथा वर्षाकालीन फूलों की नर्सरी तैयार करने की भी सलाह दी है। पशुपालकों को गलघोटू एवं लंगड़ा बुखार से बचाव के लिए समय पर टीकाकरण कराने तथा पशुओं को खनिज लवण एवं विटामिन युक्त आहार देने की अपील की गई है।
मौसम संबंधी जानकारी के लिए किसानों को दामिनी एप डाउनलोड करने की सलाह दी गई है, जिससे आकाशीय बिजली एवं वर्षा की सटीक जानकारी प्राप्त की जा सके। साथ ही गरज-चमक के दौरान पेड़ों के नीचे शरण न लेने और सुरक्षित स्थानों पर रहने की हिदायत दी गई है।
धान फसल में बीजोपचार के लिए बाविस्टिन, थायरम अथवा केप्टन जैसे फफूंदनाशकों के वैज्ञानिक उपयोग की जानकारी भी किसानों को दी गई है। विशेषज्ञों ने कहा कि बीजोपचार से बीज एवं मिट्टी जनित रोगों की रोकथाम होती है तथा फसल का अंकुरण बेहतर होता है।
डॉ. चंद्रशेखर खरे ने किसानों से कृषि संबंधी नवीन तकनीकों को अपनाने तथा अधिक जानकारी के लिए अपने नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र से संपर्क करने का आग्रह किया है। उन्होंने किसानों को “कृषि जीवनस्य आधारम” यूट्यूब चैनल के माध्यम से भी कृषि संबंधी उपयोगी जानकारी प्राप्त करने की सलाह दी।








