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चांपा में छाया ‘बलि – अब हो ही डर के शुरुआत’ का जादू, कलाकारों से रूबरू होकर रोमांचित हुए दर्शक

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जांजगीर-चांपा संवाददाता – राजेन्द्र जायसवाल
चांपा । छत्तीसगढ़ी सिनेमा लगातार नए आयाम स्थापित कर रहा है और इसी कड़ी में हॉरर, सुपरनैचुरल और सस्पेंस से भरपूर छत्तीसगढ़ी फिल्म “बलि – अब हो ही डर के शुरुआत” दर्शकों के बीच चर्चा का प्रमुख विषय बनी हुई है। चांपा के मुकुंद टॉकीज में फिल्म के विशेष प्रमोशन के लिए पूरी टीम पहुंची, जहां कलाकारों और दर्शकों के बीच आत्मीय मुलाकात ने माहौल को उत्साह और रोमांच से भर दिया।
फिल्म के कलाकारों को बड़े पर्दे पर देखने वाले दर्शक जब उन्हें अपने सामने पाए तो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। दर्शकों ने कलाकारों के साथ सेल्फी ली, फिल्म के लोकप्रिय गीतों पर रील बनाई और पूरी टीम का जोरदार स्वागत किया। सिनेमाघर परिसर में ऐसा माहौल देखने को मिला मानो कोई बड़ा फिल्मी उत्सव आयोजित हो रहा हो।
फिल्म के निर्देशक गंगासागर पंडा ने बताया कि “बलि” केवल एक हॉरर फिल्म नहीं, बल्कि रहस्य, रोमांच और छत्तीसगढ़ की संस्कृति का अनूठा संगम है। वहीं निर्माता दीपक जायसवाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ी सिनेमा को आगे बढ़ाने के लिए दर्शकों का सहयोग और प्यार सबसे बड़ी ताकत है।
फिल्म की निर्माण टीम में सह-निर्माता सीमा आकाश वर्मा एवं सुरेंद्र निषाद शामिल हैं। फिल्म में लक्षित झांझी, काजल सोनबेर, एवरग्रीन विशाल, अनुराग शर्मा, क्रांति दीक्षित, पुष्पेंद्र सिंह, संजय महानंद, अजय पटेल, रीतिका यादव, शारु दुबे, सुब्रत शर्मा, दिव्या नगदवे, दीपा महंत, पवन गुप्ता, गोकुल सिदार, सुमित्रा जी और विकास सिंह ठाकुर जैसे कलाकारों ने अपने अभिनय से कहानी में जान फूंक दी है।
डर, रहस्य और रोमांच का अनोखा संगम
“बलि – अब हो ही डर के शुरुआत” की सबसे बड़ी विशेषता इसका रहस्यपूर्ण कथानक है। फिल्म शुरू होते ही दर्शकों को एक ऐसे सफर पर ले जाती है जहां हर दृश्य के साथ उत्सुकता बढ़ती जाती है। कहानी में कई ऐसे मोड़ हैं जो दर्शकों को अंत तक अपनी सीट से बांधे रखते हैं। हॉरर और सुपरनैचुरल घटनाओं का प्रस्तुतीकरण इतना प्रभावशाली है कि दर्शक खुद को कहानी का हिस्सा महसूस करने लगते हैं।
छत्तीसगढ़ी संस्कृति की झलक
फिल्म केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति, बोली, परंपराओं और सामाजिक भावनाओं को भी खूबसूरती से प्रस्तुत किया गया है। यही कारण है कि यह फिल्म दर्शकों को अपनेपन का एहसास कराती है और क्षेत्रीय सिनेमा की ताकत को नई पहचान देती है।
दर्शकों की जुबानी – “सुपर डुपर हिट है बलि”
फिल्म देखने पहुंचे दर्शकों ने एक स्वर में कहा कि यह छत्तीसगढ़ी सिनेमा की बेहतरीन फिल्मों में से एक है। उनका कहना था कि फिल्म में सस्पेंस, थ्रिल और डर का ऐसा मिश्रण है जो लंबे समय तक याद रहता है। दर्शकों ने लोगों से अपील की कि वे अपने परिवार और मित्रों के साथ सिनेमाघर पहुंचकर इस फिल्म का आनंद जरूर लें।
निर्माता की अपील
निर्माता दीपक जायसवाल ने सभी दर्शकों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यदि दर्शक छत्तीसगढ़ी फिल्मों को सिनेमाघरों में जाकर देखेंगे तो स्थानीय कलाकारों और फिल्म निर्माताओं को और बेहतर फिल्में बनाने की प्रेरणा मिलेगी। उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि फिल्म देखने के बाद इसकी चर्चा अपने परिचितों से करें और अधिक से अधिक लोगों को
सिनेमाघर तक पहुंचने के लिए प्रेरित करें।
छत्तीसगढ़ी सिनेमा के लिए नया संदेश
“बलि – अब हो ही डर के शुरुआत” यह साबित करती है कि छत्तीसगढ़ी फिल्में अब केवल पारंपरिक विषयों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि हॉरर, सुपरनैचुरल और थ्रिलर जैसे आधुनिक विषयों पर भी उत्कृष्ट काम कर रही हैं। यह फिल्म क्षेत्रीय सिनेमा की बढ़ती ताकत और रचनात्मकता का जीवंत उदाहरण है।
यदि आप डर, रहस्य, रोमांच और छत्तीसगढ़ी संस्कृति का अद्भुत संगम एक साथ देखना चाहते हैं, तो ‘बलि – अब हो ही डर के शुरुआत’ आपके लिए एक बेहतरीन सिनेमाई अनुभव साबित हो सकती है। एक बार जरूर देखें और छत्तीसगढ़ी सिनेमा को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में अपना योगदान दें।

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