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जंगलों की जिंदगी से अपने घर तकः पूर्व नक्सली सुदु कड़ती के बदलाव की कहानी

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पुकार बाफना/बीजापुर 15 जुलाई 2026- कभी नक्सली संगठन का हिस्सा रहे श्री सुदु कड़ती आज अपने पक्के घर के आंगन में खड़े होकर एक नई जिंदगी की शुरुआत का एहसास करते हैं। यह सिर्फ एक घर की कहानी नहीं है, बल्कि उस व्यक्ति के संघर्ष, पश्चाताप, साहस और बदलाव की कहानी है जिसने हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटने का कठिन निर्णय लिया।

ग्राम पंचायत फूलगट्टा, जनपद पंचायत भैरमगढ़, जिला बीजापुर के निवासी श्री सुदु कड़ती एक सामान्य आदिवासी परिवार से हैं। क्षेत्र में वर्षों से नक्सली गतिविधियों का प्रभाव रहा। सीमित संसाधन, शिक्षा और रोजगार के अवसरों का अभाव तथा नक्सलियों के लगातार संपर्क और दबाव के कारण वर्ष 2017 में वे नक्सली संगठन से जुड़ गए। उस समय उन्हें लगा था कि यही उनके जीवन का रास्ता है, लेकिन समय के साथ उन्हें एहसास होने लगा कि हिंसा किसी समस्या का समाधान नहीं है। जंगलों में भटकते हुए उन्होंने अपनों से दूरी, असुरक्षा और अनिश्चित भविष्य के अलावा कुछ नहीं पाया। लगातार भय के माहौल में जीते हुए उनके मन में सामान्य जीवन जीने की इच्छा फिर से जागी। उन्होंने देखा कि शासन की पुनर्वास नीति के माध्यम से आत्मसमर्पण करने वाले लोगों को समाज में सम्मानपूर्वक जीवन जीने का अवसर दिया जा रहा है।

इसी विश्वास के साथ उन्होंने वर्ष 2022 में आत्मसमर्पण कर हथियार छोड़ दिए और समाज की मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया। मुख्यधारा में लौटने के बाद भी चुनौतियां कम नहीं थीं। न अपना घर था, न स्थायी रोजगार और न ही भविष्य की कोई निश्चितता। लेकिन शासन के सहयोग से उनके आवश्यक दस्तावेज तैयार किए गए और उन्हें विभिन्न योजनाओं से जोड़ा गया। वित्तीय वर्ष 2024-25 में उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना -ग्रामीण ( PMAY-G ) के अंतर्गत पक्का आवास स्वीकृत हुआ।

जब उनके घर का निर्माण शुरू हुआ तो उन्हें पहली बार महसूस हुआ कि अब उनका भी इस समाज में एक सम्मानजनक स्थान है। वर्षों तक अस्थायी जीवन जीने वाले सुदु के लिए अपने नाम का पक्का घर किसी सपने के सच होने जैसा था। घर बनने के बाद उनके भीतर आत्मविश्वास लौटा और भविष्य के प्रति नई उम्मीद जगी।
आज सुदु कड़ती अपने परिवार के साथ उसी घर में सुरक्षित और सम्मानपूर्वक जीवन बिता रहे हैं। वे मानते हैं कि यदि उन्होंने समय रहते सही निर्णय नहीं लिया होता, तो शायद उनका जीवन कभी सामान्य नहीं हो पाता।

भावुक होकर सुदु कहते हैं- जंगल में रहते हुए हर दिन डर और अनिश्चितता के बीच गुजरता था। अपनों से दूर रहने का दर्द अलग था। जब मैंने आत्मसमर्पण किया, तब लगा कि शायद अब जिंदगी बदल सकती है। प्रधानमंत्री आवास योजना से अपना घर मिलने के बाद पहली बार ऐसा महसूस हुआ कि अब मेरी भी इस समाज में एक पहचान है। अब मैं चाहता हूं कि मेरे बच्चे डर नहीं, बल्कि शिक्षा, सम्मान और अच्छे भविष्य के साथ जीवन जिएं।

सुदु कड़ती की कहानी यह संदेश देती है कि विश्वास, पुनर्वास और विकास किसी भी व्यक्ति के जीवन की दिशा बदल सकते हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना -ग्रामीण ने उन्हें केवल ईंट और सीमेंट का घर नहीं दिया, बल्कि भय और भटकाव से निकलकर सम्मान, सुरक्षा और आत्मविश्वास से भरा एक नया जीवन दिया। यह कहानी उन सभी लोगों के लिए प्रेरणा है जो कठिन परिस्थितियों के बावजूद सही रास्ता चुनने का साहस रखते हैं।

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