कोंडागांव संवाददाता – विनीत पिल्लई
कोंडागांव बड़े डोंगर: सरस्वती ग्राम शिक्षा समिति छत्तीसगढ़ की योजना अनुसार सरस्वती ग्राम शिक्षा समिति, कोंडागांव के मार्गदर्शन में तीन दिवसीय प्रधानाचार्य कार्ययोजना बैठक दिनांक 24 जुलाई से 26 जुलाई 2026 तक सरस्वती शिशु मंदिर, बड़े डोंगर में सफलतापूर्वक संपन्न हुई।
प्रमुख बिंदु एवं उपस्थिति
सहभागिता: बैठक में कोंडागांव एवं नारायणपुर जिले के कुल 32 प्रधानाचार्य अपेक्षित थे, जिनमें से 28 प्रधानाचार्यों की उत्साहपूर्ण उपस्थिति रही।
मार्गदर्शन: कार्यक्रम में विद्या भारती के आदरणीय चिंताराम साहू (प्रांतीय सह-प्रांत प्रमुख), त्रिलोक सार्वा (जिला सचिव) एवं वीरेंद्र साहू (जिला समन्वयक) का प्रेरणादायी मार्गदर्शन प्राप्त हुआ।
सक्रिय योगदान: मालगांव के प्रधानाचार्य एवं जिला मीडिया प्रमुख ताम्बेश्वर कोर्राम सहित सभी प्रधानाचार्यों ने आगामी शैक्षणिक सत्र की कार्ययोजना निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाई।

वर्षभर की विस्तृत कार्ययोजना पर मंथन
तीन दिनों तक चले इस मंथन में विद्यालयों की शैक्षणिक, सांस्कृतिक, सामाजिक एवं संगठनात्मक गतिविधियों को अधिक प्रभावी बनाने हेतु विस्तृत खाका तैयार किया गया। इसमें केवल कार्यक्रमों की रूपरेखा ही नहीं बनी, बल्कि संस्कार, गुणवत्ता, अनुशासन और राष्ट्र निर्माण के संकल्प को नई ऊर्जा दी गई।
“विद्यालय इमारत से नहीं, संस्कारों से पहचाने जाते हैं” — चिंताराम साहू
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रांतीय सह-प्रांत प्रमुख चिंताराम साहू ने कहा:
“विद्या भारती के विद्यालय केवल शिक्षा के केंद्र नहीं, बल्कि संस्कार निर्माण के मंदिर हैं। यहाँ शारीरिक शिक्षा, संस्कृत शिक्षा, योग, आध्यात्मिक चिंतन, स्वावलंबन और भारतीय संस्कृति का समन्वय कर ऐसे विद्यार्थियों का निर्माण किया जाता है जो राष्ट्र के आदर्श नागरिक बनें।”
उन्होंने जोर देकर कहा कि विद्यालय की वास्तविक पहचान भव्य इमारत से नहीं, बल्कि वहाँ से निकलने वाले संस्कारित और कर्तव्यनिष्ठ विद्यार्थियों से होती है। उन्होंने आह्वान किया कि विद्यालय ऐसा परिवार बने जहाँ प्रत्येक बालक के भीतर राष्ट्रप्रेम, सेवा और सदाचार का प्रकाश प्रज्वलित हो।
समापन एवं संकल्प
बैठक का समापन भारत माता एवं माँ सरस्वती की वंदना के साथ हुआ। सभी उपस्थित प्रधानाचार्यों ने संकल्प लिया कि प्रत्येक विद्यालय अपने क्षेत्र में शिक्षा, संस्कार और सामाजिक जागरण का सशक्त केंद्र बनेगा तथा “सा विद्या या विमुक्तये” के आदर्श को चरितार्थ करते हुए राष्ट्र निर्माण के पावन कार्य को निरंतर गति प्रदान करेगा।







