भगवान शिव की आराधना को समर्पित पवित्र श्रावण (सावन) मास के प्रथम दिन गुरुवार को देशभर के शिव मंदिरों में श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। सुबह ब्रह्म मुहूर्त से ही मंदिरों में जलाभिषेक, दुग्धाभिषेक, रुद्राभिषेक और विशेष पूजा-अर्चना का सिलसिला शुरू हो गया। “हर-हर महादेव” और “बोल बम” के जयघोष से मंदिर परिसर भक्तिमय हो उठे।
उत्तर प्रदेश के काशी विश्वनाथ धाम, मध्य प्रदेश के महाकालेश्वर मंदिर, झारखंड के बाबा बैद्यनाथ धाम, उत्तराखंड के केदारनाथ, गुजरात के सोमनाथ, ओडिशा के लिंगराज मंदिर सहित देश के प्रमुख शिवालयों में श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देखने को मिलीं। कई स्थानों पर भक्तों ने कांवड़ यात्रा के माध्यम से पवित्र नदियों का जल लाकर भगवान शिव का अभिषेक किया।
सावन के पहले दिन बड़ी संख्या में महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों ने व्रत रखकर परिवार की सुख-समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और देश की खुशहाली की कामना की। मंदिरों में रुद्राभिषेक, शिव महिम्न स्तोत्र, शिव चालीसा और भजन-कीर्तन का आयोजन किया गया, जिससे पूरा वातावरण शिवमय हो गया।
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए विभिन्न राज्यों के प्रशासन ने सुरक्षा, यातायात, स्वास्थ्य सेवाओं और पेयजल की विशेष व्यवस्था की। प्रमुख मंदिरों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया तथा दर्शन व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए स्वयंसेवकों की भी सहायता ली गई।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सावन का महीना भगवान शिव को अत्यंत प्रिय माना जाता है। इस पूरे माह में श्रद्धालु सोमवार का व्रत रखते हैं, कांवड़ यात्रा करते हैं और शिव आराधना के माध्यम से आध्यात्मिक ऊर्जा तथा मनोकामनाओं की पूर्ति की कामना करते हैं। सावन का प्रथम दिन देशभर में आस्था, श्रद्धा और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक बनकर सामने आया।







