रायपुर, छत्तीसगढ़ |
छत्तीसगढ़ शासन द्वारा पदोन्नति के लिए TET (शिक्षक पात्रता परीक्षा) की अनिवार्यता लागू करने और इस संबंध में डीपीआई (DPI) द्वारा वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से जारी किए गए निर्देशों को लेकर शिक्षकों में भारी आक्रोश व्याप्त है। छत्तीसगढ़ संकुल समन्वयक शिक्षक संघ के प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष रामचंद्र सोनवंशी ने इसे शिक्षकों के साथ हो रहा खुला अन्याय और अत्याचार करार देते हुए सरकार से इस तानाशाही निर्णय पर तत्काल पुनर्विचार करने की पुरजोर अपील की है।
जारी बयान में श्री सोनवंशी ने कहा कि वर्ष 2017 में TET की अनिवार्यता का संशोधन लाया गया था, परंतु तब से लेकर वर्ष 2025 तक न तो केंद्र सरकार और न ही राज्य सरकार ने शिक्षकों को इसके प्रति जागरूक किया और न ही किसी प्रकार का आधिकारिक नोटिस या स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किया गया। इन लंबी अवधि के दौरान शिक्षकों को पूरी तरह अंधेरे में रखा गया और आज बिना किसी पूर्व सूचना या तैयारी के, TET से वंचित कर शिक्षकों को पदोन्नति से बाहर करना किसी ‘अंधे कानून’ से कम नहीं है। यह उन शिक्षकों के साथ सीधा कुठारघात है जिन्होंने अपनी पूरी सेवा शिक्षा जगत को समर्पित कर दी है।
शिक्षक दिवस पर सरकार से दो टूक: पुरस्कार नहीं, हमारा शिक्षक सम्मान और न्याय वापस लौटाए सरकार
श्री सोनवंशी ने प्रदेश के समस्त जागरूक शिक्षक साथियों से करबद्ध निवेदन किया है कि आगामी शिक्षक दिवस (5 सितंबर 2026) के अवसर पर मिलने वाले किसी भी सरकारी प्रशस्ति पत्र या पुरस्कार की चमक इस अन्याय के आगे फीकी पड़ चुकी है।
संघ का स्पष्ट आह्वान है कि इस शिक्षक दिवस पर शिक्षकों की एकमात्र मांग यह होनी चाहिए:
”यदि सरकार को हमारा सम्मान करना है, तो हमें कोई पुरस्कार न देकर हमारा छीना गया शिक्षक सम्मान और न्याय वापस लौटाए, ताकि हमें अन्याय रूपी अंधकार से बाहर निकालकर न्याय रूपी प्रकाश की पुनः स्थापना मिल सके।”
प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष ने चेतावनी दी है कि यदि शासन और प्रशासन ने अपना यह अड़ियल और मनमाना रवैया नहीं बदला, तो राज्य में एक विषम परिस्थिति पैदा हो जाएगी, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।







