सोमन साहू/आरंग। श्रावण शुक्ल सप्तमी के पावन अवसर पर संत शिरोमणि गोस्वामी तुलसीदास जी की जयंती श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ मनाई गई। इस अवसर पर अंचल में विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम एवं अनुष्ठानों का आयोजन किया गया। इसी कड़ी में लक्ष्मी विहार कॉलोनी स्थित शिव मंदिर में कांता चौधरी एवं सीमा-अंकित चौधरी परिवार की ओर से संगीतमय मानसगान का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम में वैदेही मानस मंडली द्वारा रामचरितमानस के विभिन्न प्रसंगों का भावपूर्ण एवं संगीतमय प्रस्तुतीकरण किया गया। मंडली ने मुनि विश्वामित्र के अयोध्या आगमन, भगवान श्रीराम एवं लक्ष्मण द्वारा यज्ञ की रक्षा तथा जनक वाटिका में माता गौरी के पूजन के दौरान श्रीराम और माता जानकी की प्रथम भेंट के प्रसंग का मार्मिक वर्णन किया। भक्ति और संगीत से सराबोर प्रस्तुति ने उपस्थित श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया।
इस अवसर पर भगवताचार्य पं. छत्रधर दीवान ने कहा कि संत शिरोमणि गोस्वामी तुलसीदास जी की अमर कृति रामचरितमानस समाज को सामाजिक समरसता, सद्भाव और भाईचारे का संदेश देती है। मानस हमारे जीवन का दर्पण है, जो हमें अपने कर्तव्यों और जीवन मूल्यों का बोध कराती है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार दर्पण में दिखाई देने वाला मुख और संसार में मिलने वाला सुख क्षणिक एवं मिथ्या आभास है, उसी प्रकार संसार के सुख की आसक्ति अज्ञानता है। संसार दुखालय है, इसलिए स्थायी सुख की तलाश सांसारिक मोह में नहीं, बल्कि प्रभु भक्ति और सद्कर्मों में करनी चाहिए।
कार्यक्रम को सफल बनाने में अमरीका साहू, किरण दीवान, लीना चंद्राकर, सरोजनी अग्रवाल एवं सीमा निषाद का सराहनीय सहयोग रहा। आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने शामिल होकर मानसगान का श्रवण किया और श्रीराम-जानकी के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लिया।







