-डीआरपी संतोष कुमार शुक्ला को उत्कृष्ट कार्य के लिए राष्ट्रीय सम्मान, जिले के सूक्ष्म खाद्य उद्यमियों को मिला नई उम्मीद का संदेश
जिला जांजगीर-चांपा , 27 अगस्त 2026।
प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम उन्नयन योजना (पीएमएफएमई) के प्रभावी क्रियान्वयन में जांजगीर-चांपा जिले ने अपनी अलग पहचान बनाई है। जिले में योजना के हितग्राहियों को लगातार मार्गदर्शन और हैण्ड होल्डिंग सपोर्ट उपलब्ध कराने वाले डिस्ट्रिक्ट रिसोर्स पर्सन (डीआरपी) श्री संतोष कुमार शुक्ला को उनके उत्कृष्ट कार्य के लिए राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया गया है। यह सम्मान न केवल श्री शुक्ला की कार्यकुशलता की पहचान है, बल्कि जिले में सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र को मिल रही गति की भी राष्ट्रीय स्तर पर स्वीकृति है।
नई दिल्ली स्थित इंडिया हैबिटेट सेंटर में 24 एवं 25 अगस्त को आयोजित पीएमएफएमई कॉन्क्लेव 2026 में केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री श्री चिराग पासवान ने श्री संतोष कुमार शुक्ला को प्रशंसा प्रमाण-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया। उन्हें छत्तीसगढ़ में पीएमएफएमई योजना के अंतर्गत सर्वाधिक हितग्राहियों को हैण्ड होल्डिंग सपोर्ट प्रदान करने तथा योजना के प्रभावी क्रियान्वयन में उत्कृष्ट योगदान के लिए यह सम्मान दिया गया।
कागजी प्रक्रिया से लेकर उद्योग स्थापना तक मिला मार्गदर्शन
पीएमएफएमई योजना का उद्देश्य छोटे खाद्य प्रसंस्करण उद्यमियों को आर्थिक एवं तकनीकी सहयोग देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है। हालांकि अनेक छोटे उद्यमियों के सामने योजना का लाभ लेने के दौरान आवेदन, दस्तावेज, बैंकिंग प्रक्रिया, परियोजना तैयार करने और इकाई स्थापना जैसी प्रक्रियाएं चुनौती बनी रहती हैं।
ऐसे में डीआरपी संतोष कुमार शुक्ला की भूमिका महत्वपूर्ण रही। उन्होंने हितग्राहियों को केवल योजना की जानकारी देने तक सीमित न रहकर आवेदन प्रक्रिया, आवश्यक दस्तावेज, बैंक से संबंधित औपचारिकताओं, परियोजना स्थापना और योजना के विभिन्न प्रावधानों के संबंध में लगातार मार्गदर्शन दिया। हितग्राहियों को योजनाबद्ध तरीके से सहयोग मिलने से जिले में पीएमएफएमई योजना के क्रियान्वयन को गति मिली।
स्थानीय उद्यमिता को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम
जांजगीर-चांपा जैसे कृषि प्रधान जिले में खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में रोजगार और स्वरोजगार की व्यापक संभावनाएं हैं। स्थानीय स्तर पर उपलब्ध कृषि एवं खाद्य उत्पादों का प्रसंस्करण कर छोटे उद्यमी न केवल अपनी आय बढ़ा सकते हैं, बल्कि स्थानीय उत्पादों को बाजार भी उपलब्ध करा सकते हैं।
पीएमएफएमई जैसी योजनाएं ऐसे ही छोटे उद्यमियों को संगठित एवं मजबूत आधार देने का काम करती हैं। योजना के बेहतर क्रियान्वयन से स्थानीय स्तर पर खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों को प्रोत्साहन मिलने के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने की संभावनाएं भी बढ़ती हैं।
राष्ट्रीय मंच पर जिले की उपलब्धि
पीएमएफएमई कॉन्क्लेव में जांजगीर-चांपा के डीआरपी को मिला सम्मान इस बात का संकेत है कि योजनाओं की सफलता केवल सरकारी स्वीकृति और बजट तक सीमित नहीं होती, बल्कि हितग्राही तक योजना का वास्तविक लाभ पहुंचाने वाली जमीनी कार्यप्रणाली भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है।
श्री संतोष कुमार शुक्ला को मिला सम्मान इसी जमीनी प्रयास की राष्ट्रीय स्तर पर पहचान माना जा रहा है। इससे जिले के अधिकारियों, कर्मचारियों और योजना से जुड़े हितग्राहियों में भी उत्साह का संचार हुआ है।
प्रशासनिक मार्गदर्शन और टीमवर्क का परिणाम
इस उपलब्धि के पीछे जिला प्रशासन और संबंधित विभाग के अधिकारियों के मार्गदर्शन एवं सहयोग की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही। कलेक्टर श्री जन्मेजय महोबे, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री विनय कुमार पोयाम तथा जिला व्यापार एवं उद्योग केन्द्र के महाप्रबंधक श्री जेवियर टोप्पो के मार्गदर्शन में योजना के प्रभावी क्रियान्वयन को आगे बढ़ाया गया।
जिला व्यापार एवं उद्योग केन्द्र के अनुसार, हितग्राहियों को योजना का लाभ दिलाने के लिए विभागीय स्तर पर लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। डीआरपी द्वारा हितग्राहियों के साथ निरंतर समन्वय और मार्गदर्शन ने इन प्रयासों को और प्रभावी बनाया।
सम्मान से बढ़ी जिम्मेदारी भी
राष्ट्रीय स्तर पर मिला सम्मान निश्चित रूप से गौरव का विषय है, लेकिन इसके साथ भविष्य की जिम्मेदारी भी बढ़ गई है। पीएमएफएमई योजना के माध्यम से जिले के अधिक से अधिक पात्र छोटे उद्यमियों को जोड़ना, उन्हें बैंकिंग एवं तकनीकी प्रक्रियाओं में सहयोग देना और स्थापित इकाइयों को आगे बढ़ाने में मार्गदर्शन उपलब्ध कराना आने वाले समय की महत्वपूर्ण चुनौती होगी।
जांजगीर-चांपा के डीआरपी संतोष कुमार शुक्ला का राष्ट्रीय सम्मान इस बात का उदाहरण है कि जब सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन कागजों से निकलकर हितग्राहियों तक पहुंचता है, तो उसका परिणाम राष्ट्रीय मंच तक दिखाई देता है। पीएमएफएमई योजना के बेहतर क्रियान्वयन की यह उपलब्धि जिले में स्थानीय उद्यमिता, स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता की







