जन्माष्टमी पर्व को लेकर राधा माधव मंदिर में तैयारियां अंतिम चरण में हैं। भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के अवसर पर मंदिर परिसर में 4 सितंबर से 8 सितंबर तक पांच दिवसीय श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का भव्य आयोजन किया जा रहा है। पांच दिनों तक मंदिर में धार्मिक अनुष्ठानों, श्रीमद्भागवत कथा, भजन-कीर्तन, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और विभिन्न धार्मिक आयोजनों की धूम रहेगी।
महोत्सव में श्रद्धालुओं को भगवान श्रीकृष्ण और राधा-माधव के विभिन्न अलौकिक श्रृंगारों के दर्शन होंगे। आयोजन को लेकर मंदिर प्रबंधन की ओर से व्यापक तैयारियां की जा रही हैं।
जरी और रेशम की पोशाक में होगा राधा-माधव का भव्य श्रृंगार
जन्मोत्सव के दौरान राधा-माधव का विशेष श्रृंगार आकर्षण का केंद्र रहेगा। विशेष कारीगरों द्वारा तैयार की गई जरी एवं रेशम की आकर्षक पोशाक से भगवान का अलौकिक श्रृंगार किया जाएगा।
मंदिर परिसर को रंग-बिरंगे और सुगंधित फूलों से सजाया जाएगा। इसके साथ ही आकर्षक आधुनिक लाइटिंग की व्यवस्था की जाएगी, जिससे जन्मोत्सव के दौरान मंदिर परिसर भव्य एवं मनोहारी नजर आएगा।
महंत दिक्यकान्त महाराज ने बताया पांच दिवसीय कार्यक्रम का पूरा कार्यक्रम
मंदिर के महंत दिक्यकान्त महाराज ने बताया कि 4 सितंबर से 8 सितंबर तक आयोजित होने वाले श्रीकृष्ण जन्मोत्सव में प्रतिदिन अलग-अलग धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
प्रथम दिवस: शुभारंभ और श्रीमद्भागवत कथा
महोत्सव के पहले दिन मंगल आरती एवं धार्मिक अनुष्ठानों के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ होगा। पवित्र नदियों के जल से मंदिर परिसर की शुद्धि की जाएगी। इसके बाद श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ होगा। इस दौरान श्रीकृष्ण-सुदामा प्रसंग पर आधारित विशेष प्रवचन भी होंगे।
द्वितीय दिवस: भजन संध्या और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां
दूसरे दिन मंदिर परिसर में भजन संध्या का आयोजन होगा। स्थानीय एवं आमंत्रित कलाकारों द्वारा अखंड हरिनाम संकीर्तन किया जाएगा। बच्चों के लिए राधा-कृष्ण रूप सज्जा एवं फैंसी ड्रेस प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी। इसके साथ ही बच्चों एवं कलाकारों द्वारा सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी दी जाएंगी।
तृतीय दिवस: मुख्य श्रीकृष्ण जन्मोत्सव
उत्सव का तीसरा दिन मुख्य आकर्षण रहेगा। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण का दूध, दही, घी, शहद एवं पवित्र तीर्थों के जल से दिव्य महाभिषेक किया जाएगा।
भगवान को 56 प्रकार के पकवानों से सजा छप्पन भोग अर्पित किया जाएगा। इसके बाद रात ठीक 12 बजे भगवान श्रीकृष्ण के प्राकट्य के अवसर पर शंखध्वनि, विशेष महाआरती और भव्य जयकारों से मंदिर परिसर गूंज उठेगा।
चतुर्थ दिवस: नंदोत्सव और दही हांडी
भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की खुशी में चौथे दिन नंदोत्सव मनाया जाएगा। मंदिर परिसर में भक्तों द्वारा बधाई गीत और भजन प्रस्तुत किए जाएंगे तथा खिलौने एवं प्रसाद का वितरण किया जाएगा।
इसके साथ ही युवाओं की टोलियों के बीच पारंपरिक दही हांडी प्रतियोगिता का आयोजन होगा, जो उत्सव में खास आकर्षण का केंद्र रहेगी।
पंचम दिवस: छप्पन भोग और महाप्रसाद वितरण
पांच दिवसीय उत्सव के अंतिम दिन श्रद्धालुओं के लिए छप्पन भोग महाप्रसाद एवं विशाल भंडारे का आयोजन किया जाएगा। मंदिर प्रबंधन की ओर से श्रद्धालुओं, अतिथियों, सेवादारों एवं आयोजन में सहयोग देने वाले सभी लोगों का आभार व्यक्त करते हुए महोत्सव का समापन किया जाएगा।
श्रद्धालुओं से शामिल होने की अपील
मंदिर प्रबंधन ने श्रद्धालुओं से पांच दिवसीय श्रीकृष्ण जन्मोत्सव में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होकर भगवान श्रीकृष्ण के दर्शन, कथा, भजन-कीर्तन एवं धार्मिक आयोजनों का पुण्य लाभ लेने की अपील की है।
मंदिर प्रबंधन के अनुसार, पूरे आयोजन को श्रद्धालुओं की सुविधा और धार्मिक गरिमा को ध्यान में रखते हुए व्यवस्थित तरीके से संपन्न कराने की तैयारियां की जा रही हैं। पांच दिनों तक चलने वाला यह महोत्सव भक्ति, आस्था, संस्कृति और उत्सव का संगम होगा।







