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शिक्षक दिवस विशेष: शिक्षक सोहन लाल देवांगन की मेहनत और समर्पण बना बच्चों के लिए प्रेरणा

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-स्कूल के प्रति प्रेम, लगन और कर्तव्यनिष्ठा की मिसाल हैं सहायक शिक्षक सोहन लाल देवांगन

रायपुर। शिक्षक केवल बच्चों को किताबों का ज्ञान देने वाला व्यक्ति नहीं होता, बल्कि वह विद्यार्थियों के जीवन को सही दिशा देने वाला मार्गदर्शक और समाज के भविष्य का निर्माता होता है। ऐसे ही समर्पित शिक्षक हैं सोहन लाल देवांगन, सहायक शिक्षक, शासकीय प्राथमिक शाला सेमरिया परसदा, विकासखंड आरंग, जिला रायपुर, छत्तीसगढ़। उनका विद्यालय के प्रति प्रेम, लगन, मेहनत और समर्पण आज विद्यार्थियों के साथ-साथ पालकों के लिए भी प्रेरणा का विषय बना हुआ है।

शिक्षक सोहन लाल देवांगन ने जहां भी अपनी सेवाएं दीं, वहां अपने कार्यों और समर्पण की अलग पहचान बनाई। उनका शैक्षणिक सफर शासकीय मिडिल स्कूल कुरुद से शुरू हुआ। इसके बाद उन्होंने परसदा स्कूल, सेमरिया मिडिल स्कूल और हाई स्कूल तुलसी में अपनी सेवाएं दीं। प्रत्येक विद्यालय में उन्होंने पूरी ईमानदारी और मेहनत के साथ कार्य करते हुए विद्यार्थियों के शैक्षणिक एवं सर्वांगीण विकास पर विशेष ध्यान दिया।

उनकी कार्यशैली ऐसी रही कि जिस गांव और विद्यालय में उन्होंने सेवा दी, वहां आज भी उनके प्रति सम्मान और अपनापन देखने को मिलता है। कई पालक और ग्रामीण आज भी उन्हें अपने विद्यालय में वापस देखने की इच्छा रखते हैं।

प्राथमिक शाला सेमरिया में बदलाव की शुरुआत

करीब तीन वर्ष पहले जब शिक्षक सोहन लाल देवांगन शासकीय प्राथमिक शाला सेमरिया पहुंचे, तब उन्होंने विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास और विद्यालय में सकारात्मक बदलाव को अपना लक्ष्य बनाया।

उन्होंने विद्यालय में बाल कैबिनेट और ईको क्लब का गठन कर विद्यार्थियों को अलग-अलग जिम्मेदारियां सौंपीं। बाल पदाधिकारियों की नियमित मासिक बैठक लेकर उन्हें विद्यालय की स्वच्छता, अनुशासन, पौधारोपण और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े दायित्व दिए गए।

विद्यालय परिसर को हरा-भरा रखने, पौधों की देखभाल करने, साफ-सफाई बनाए रखने तथा विद्यार्थियों में अनुशासन की भावना विकसित करने के लिए लगातार प्रयास किए गए।

पढ़ाई को लेकर विशेष सजगता

शिक्षक देवांगन स्वयं समय पर विद्यालय पहुंचते हैं और यह सुनिश्चित करते हैं कि बच्चों की हर कक्षा नियमित रूप से संचालित हो। विद्यार्थियों की नियमित उपस्थिति को लेकर भी वे लगातार प्रयास करते हैं।

इसके लिए वे पालकों से संपर्क करते हैं और विद्यार्थियों की उपस्थिति एवं पढ़ाई की स्थिति से शाला प्रबंधन समिति को भी अवगत कराते हैं। बच्चों को नियमित रूप से गृहकार्य दिया जाता है और उसकी जांच भी की जाती है।

उनका प्रयास केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित नहीं है। वे विद्यार्थियों को शारीरिक, नैतिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक मूल्यों से जोड़ने पर भी विशेष जोर देते हैं। खेलकूद, योग और सांस्कृतिक गतिविधियों में बच्चों की भागीदारी बढ़ाने के लिए भी लगातार प्रयास किए जाते हैं।

भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा में प्रदेश में प्रथम

शिक्षक सोहन लाल देवांगन के प्रयासों का परिणाम विद्यार्थियों की उपलब्धियों में भी देखने को मिला। सत्र 2023-24 में भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा में कक्षा पांचवीं के विद्यार्थी प्रकाश राज साहू ने पूरे छत्तीसगढ़ प्रदेश में प्रथम स्थान प्राप्त किया।

प्रकाश राज ने अपनी सफलता का श्रेय अपने शिक्षक सोहन लाल देवांगन के मार्गदर्शन और सहयोग को दिया। यह उपलब्धि न केवल विद्यार्थी के लिए बल्कि विद्यालय और शिक्षक के लिए भी गौरव का विषय बनी।

सुबह से शाम तक विद्यालय के लिए समर्पित

शिक्षक देवांगन की दिनचर्या भी उनके समर्पण को दर्शाती है। वे प्रतिदिन सुबह 10 बजे से पहले विद्यालय पहुंचते हैं और शाम 4 बजे के बाद विद्यालय बंद कराकर ही घर जाते हैं।

विद्यालय में बच्चों की पढ़ाई से लेकर उनकी गतिविधियों तक वे व्यक्तिगत रूप से नजर रखते हैं। उनका मानना है कि शिक्षक का दायित्व केवल निर्धारित समय तक पढ़ाना नहीं, बल्कि बच्चों के भविष्य को बेहतर दिशा देना भी है।

कोरोना काल में भी निभाई जिम्मेदारी

कोरोना महामारी के कठिन दौर में जब विद्यालय बंद थे, तब भी शिक्षक सोहन लाल देवांगन ने शिक्षा का सिलसिला रुकने नहीं दिया। उन्होंने 1000 से अधिक ऑनलाइन कक्षाओं के माध्यम से हजारों बच्चों तक शिक्षा और मार्गदर्शन पहुंचाने का प्रयास किया।

उनका यह योगदान उस दौर में शिक्षा से जुड़े बच्चों के लिए बेहद महत्वपूर्ण रहा। कोरोना काल में भी उन्होंने अपने शिक्षक धर्म को सर्वोपरि रखते हुए विद्यार्थियों से संपर्क बनाए रखा।

शिक्षक दिवस पर ऐसे शिक्षकों को सलाम

शिक्षक सोहन लाल देवांगन की कहानी बताती है कि एक शिक्षक यदि अपनी जिम्मेदारी को केवल नौकरी न मानकर सेवा और संकल्प के रूप में स्वीकार करे, तो वह विद्यालय के साथ-साथ पूरे समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकता है।

उनका विद्यालय के प्रति प्रेम, विद्यार्थियों के प्रति अपनापन और शिक्षा के प्रति समर्पण उन्हें एक ऐसे शिक्षक के रूप में स्थापित करता है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बन सकता है।

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