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बंगाल में एक साल में खुलेंगे RSS से जुड़े 1,000 नए स्कूल? शुभेंदु अधिकारी के बयान से गरमाई शिक्षा और सियासत

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-विद्या भारती की मौजूदगी बढ़ाने पर जोर, मुर्शिदाबाद और दक्षिण 24 परगना में विस्तार की अपील; मदरसा शिक्षा के अलग प्रशासनिक ढांचे पर भी उठाया सवाल

कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति में शिक्षा व्यवस्था को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी ने राज्य में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े संगठन विद्या भारती के माध्यम से अगले एक साल में करीब 1,000 नए स्कूल खोले जाने की बात कही है। उन्होंने संगठन से विशेष रूप से मुर्शिदाबाद और दक्षिण 24 परगना जैसे जिलों में अपनी शैक्षणिक गतिविधियों का विस्तार करने का आग्रह किया।

कोलकाता स्थित रामकृष्ण मिशन इंस्टीट्यूट ऑफ कल्चर में आयोजित विद्या भारती के कार्यक्रम में संबोधित करते हुए शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि संगठन की शैक्षणिक पहुंच को राज्य के हर जिले, नगरपालिका और पंचायत स्तर तक बढ़ाया जाना चाहिए।

बंगाल में फिलहाल 313 स्कूल संचालित होने का दावा

कार्यक्रम के दौरान राज्य में विद्या भारती के मौजूदा स्कूलों की संख्या करीब 313 बताए जाने का उल्लेख किया गया। इसके मुकाबले देशभर में संगठन से जुड़े हजारों विद्यालय और बाल संस्कार केंद्र संचालित होने की बात कही गई।

शुभेंदु अधिकारी ने संगठन से बंगाल में अपनी पहुंच और मजबूत करने की अपील करते हुए कहा कि आने वाले समय में अधिक से अधिक क्षेत्रों में विद्यालयों की स्थापना की जानी चाहिए।

चार शिक्षा विभागों को एक करने का प्रस्ताव

शुभेंदु अधिकारी ने राज्य की शिक्षा व्यवस्था में बड़े प्रशासनिक बदलाव की जरूरत भी बताई। उन्होंने स्कूल शिक्षा, उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा और अल्पसंख्यक/मदरसा शिक्षा से जुड़े अलग-अलग प्रशासनिक ढांचों को एक व्यवस्था के तहत लाने की बात कही।

उनके मुताबिक शिक्षा व्यवस्था में अलग-अलग प्रशासनिक ढांचों के बजाय एकीकृत व्यवस्था से कामकाज को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।

मदरसा शिक्षा के अलग प्रशासन पर भी सवाल

शुभेंदु अधिकारी ने मदरसा शिक्षा को लेकर भी अपनी राय रखी और कहा कि नई व्यवस्था में इसके लिए अलग प्रशासनिक ढांचा नहीं होना चाहिए। उनके इस बयान को लेकर राज्य की राजनीति में बहस तेज होने की संभावना है।

वंदे मातरम को लेकर भी दिया बयान

कार्यक्रम के दौरान उन्होंने स्कूलों में राष्ट्रगीत वंदे मातरम के पूर्ण संस्करण के गायन को लेकर भी सख्त रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि सरकारी, सहायता प्राप्त, निजी स्कूलों और मदरसों में सुबह की प्रार्थना के दौरान वंदे मातरम के पूर्ण संस्करण को लेकर नियमों का पालन होना चाहिए और नियमों का उल्लंघन करने पर सरकारी सहायता पर कार्रवाई की बात कही।

हालांकि, इस संबंध में किसी भी संभावित सरकारी आदेश या सहायता रोकने की आधिकारिक व्यवस्था की पुष्टि संबंधित सरकारी अधिसूचना से किया जाना जरूरी है।

पिछली सरकार की शिक्षा नीति पर निशाना

शुभेंदु अधिकारी ने राज्य की पिछली सरकारों और मौजूदा तृणमूल कांग्रेस शासन की शिक्षा नीति पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले वर्षों की शिक्षा व्यवस्था ने राज्य की शिक्षा प्रणाली को नुकसान पहुंचाया है। उन्होंने कहा कि यदि ऐसी नीतियां लंबे समय तक जारी रहतीं तो राज्य के मूल्य, विरासत, परंपरा और देशभक्ति प्रभावित हो सकती थी।

बयान के बाद सियासी हलचल बढ़ने के आसार

विद्या भारती के विस्तार, शिक्षा विभागों के एकीकरण, मदरसा शिक्षा के प्रशासनिक ढांचे और वंदे मातरम को लेकर दिए गए बयानों के बाद पश्चिम बंगाल में राजनीतिक बहस तेज होने के आसार हैं। अब देखना होगा कि इन प्रस्तावों को लेकर राज्य सरकार और अन्य राजनीतिक दलों की क्या प्रतिक्रिया सामने आती है।

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