आरोप और दोषसिद्धि के बीच होती है कानून की पूरी प्रक्रिया; अधिवक्ता का दायित्व है कि पक्षकार को विधि के अनुसार अपना पक्ष रखने का अवसर मिले
विशेष आलेख | अधिवक्ता देव प्रसाद जोशी, 9893354327
आपराधिक न्याय व्यवस्था में किसी व्यक्ति पर आरोप लगना और उसका दोष सिद्ध होना दो अलग-अलग बातें हैं। किसी शिकायत, प्राथमिकी या अभियोजन के आधार पर किसी व्यक्ति के विरुद्ध कानूनी कार्यवाही प्रारंभ हो सकती है, लेकिन अंतिम निष्कर्ष न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही निर्धारित होता है। इसी कारण एक अधिवक्ता के रूप में मेरा व्यक्तिगत दृष्टिकोण यह है कि किसी व्यक्ति को केवल आरोप के आधार पर पहले से दोषी मान लेना उचित नहीं है।
जब कोई व्यक्ति किसी आपराधिक प्रकरण में कानूनी सहायता के लिए मेरे पास आता है, तो मेरा पहला दायित्व उसके मामले को कानून की दृष्टि से समझना होता है। मैं यह मानकर कार्य करता हूं कि उसे अपना पक्ष न्यायालय के समक्ष रखने का अधिकार है और मेरी भूमिका उस अधिकार को विधि के दायरे में प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने की है।
अधिवक्ता घटना का निर्णायक नहीं होता
आपराधिक प्रकरण में अधिवक्ता सामान्यतः उस कथित घटना का प्रत्यक्षदर्शी नहीं होता। इसलिए यह निर्धारित करना कि वास्तव में घटना के समय क्या हुआ, अधिवक्ता का व्यक्तिगत कार्य नहीं है।
न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत दस्तावेज, साक्ष्य, गवाहों के बयान और लागू कानून के आधार पर मामले का परीक्षण किया जाता है। अधिवक्ता की भूमिका अपने पक्षकार की ओर से उपलब्ध कानूनी आधारों को न्यायालय के सामने रखना है।
इसीलिए मेरी कार्यशैली में यह महत्वपूर्ण है कि मैं किसी व्यक्ति के बारे में व्यक्तिगत धारणा बनाने के बजाय उसके मामले के कानूनी और प्रासंगिक तथ्यों पर ध्यान केंद्रित करूं।
पैरवी करना अपराध का समर्थन नहीं
किसी आपराधिक प्रकरण में बचाव पक्ष की ओर से पैरवी करना अपराध का समर्थन करना नहीं है। न्याय व्यवस्था में जिस प्रकार अभियोजन को अपना पक्ष प्रस्तुत करने का अवसर मिलता है, उसी प्रकार बचाव पक्ष को भी अपना पक्ष रखने का अधिकार है।
बचाव पक्ष का अधिवक्ता अभियोजन द्वारा प्रस्तुत सामग्री का परीक्षण करता है, गवाहों से जिरह करता है, संबंधित कानूनी प्रावधानों की व्याख्या प्रस्तुत करता है और यदि कोई वैधानिक या प्रक्रियात्मक प्रश्न उत्पन्न होता है तो उसे न्यायालय के समक्ष रखता है।
यह प्रक्रिया न्यायिक व्यवस्था का आवश्यक हिस्सा है।
किसी व्यक्ति की पैरवी करना और उसके द्वारा कथित कृत्य का समर्थन करना—दो अलग बातें हैं।
मुवक्किल की निजता का सम्मान
मेरी व्यक्तिगत कार्यशैली में पक्षकार की निजता का सम्मान भी महत्वपूर्ण है। किसी मामले की पैरवी के लिए जितनी तथ्यात्मक जानकारी आवश्यक है, उतनी जानकारी प्राप्त करना अधिवक्ता के लिए स्वाभाविक आवश्यकता है। लेकिन ऐसी जानकारी जो प्रकरण के कानूनी परीक्षण के लिए आवश्यक नहीं है, उसके संबंध में अनावश्यक पूछताछ करना मेरी प्राथमिकता नहीं है।
मेरा ध्यान मुख्यतः इस बात पर रहता है कि मामले से संबंधित आवश्यक तथ्य क्या हैं, उपलब्ध कानूनी सामग्री क्या है और पक्षकार का पक्ष किस प्रकार न्यायालय के समक्ष विधिसम्मत ढंग से प्रस्तुत किया जा सकता है।
इस दृष्टिकोण का उद्देश्य प्रत्येक व्यक्ति की गरिमा, निजता और कानूनी अधिकारों का सम्मान करना है।
अधिवक्ता और पक्षकार के बीच विश्वास
किसी कानूनी प्रकरण में पक्षकार और अधिवक्ता के बीच विश्वास का विशेष महत्व होता है। जो व्यक्ति कानूनी सहायता लेने आता है, वह अपेक्षा करता है कि उसकी बात पेशेवर तरीके से सुनी जाएगी और उसके हितों को कानून के अनुसार न्यायालय के समक्ष रखा जाएगा। मेरे लिए यह विश्वास जिम्मेदारी भी है।
लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि अधिवक्ता कानून से ऊपर है। अधिवक्ता का दायित्व अपने पक्षकार के हितों की रक्षा के साथ-साथ न्यायालय, कानून और पेशेवर आचरण की सीमाओं का सम्मान करना भी है।
ईमानदार पैरवी वही है जिसमें पक्षकार के हितों की रक्षा कानून की सीमाओं के भीतर की जाए।
हर व्यक्ति को केवल आरोप से नहीं परखा जाना चाहिए
सामाजिक जीवन में किसी व्यक्ति के बारे में जानकारी अधूरी हो सकती है। किसी प्रकरण की वास्तविक स्थिति न्यायिक रिकॉर्ड, साक्ष्य और न्यायालय के निष्कर्ष से अलग हो सकती है।
इसलिए किसी लंबित आपराधिक प्रकरण के संबंध में सार्वजनिक रूप से ऐसे निष्कर्ष निकालना उचित नहीं है, जो न्यायालय द्वारा अभी निर्धारित नहीं किए गए हैं।
मेरी दृष्टि में कानून के क्षेत्र में यह सावधानी आवश्यक है कि किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा को केवल आरोपों या अपुष्ट चर्चाओं के आधार पर प्रभावित न किया जाए।
हर मामले के तथ्य अलग होते हैं
आपराधिक मामलों की प्रकृति एक जैसी नहीं होती। प्रत्येक मामले में अलग तथ्य, अलग साक्ष्य और अलग कानूनी परिस्थितियां हो सकती हैं।
इसलिए मेरी कार्यशैली यह है कि किसी मामले को उसकी वास्तविक कानूनी स्थिति के आधार पर देखा जाए। किसी दूसरे मामले के अनुभव को बिना जांचे किसी अन्य प्रकरण पर लागू करना उचित नहीं है।
अधिवक्ता का काम अपने पक्षकार के मामले के प्रासंगिक तथ्यों और कानून को न्यायालय के सामने रखना है।
अलग अधिवक्ताओं की अलग कार्यशैली हो सकती है
प्रत्येक अधिवक्ता की अपनी कार्यशैली और पेशे के प्रति अपना दृष्टिकोण हो सकता है। मेरे विचार भी मेरे व्यक्तिगत पेशेवर अनुभव और कार्यशैली को व्यक्त करते हैं।
मेरा प्रयास रहता है कि जो पक्षकार कानूनी सहायता के लिए मेरे पास आता है, उसके मामले की पैरवी पूरी ईमानदारी, निष्ठा और पेशेवर जिम्मेदारी के साथ की जाए।
इसका अर्थ यह नहीं कि मैं किसी पक्षकार को अपनी ओर से निर्दोष या दोषी घोषित करता हूं। अंतिम निर्णय न्यायालय का विषय है।
न्याय केवल परिणाम नहीं, प्रक्रिया भी है
न्याय की चर्चा केवल अंतिम निर्णय तक सीमित नहीं होनी चाहिए। न्यायिक प्रक्रिया भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।
किसी व्यक्ति के विरुद्ध आरोप है तो उसका परीक्षण होना चाहिए। संबंधित पक्षों को अपना पक्ष रखने का अवसर मिलना चाहिए। उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण होना चाहिए और अंततः न्यायालय को कानून के अनुसार निर्णय करना चाहिए।
इसी प्रक्रिया में बचाव पक्ष के अधिवक्ता की भूमिका सामने आती है।
बचाव पक्ष का काम न्यायालय के स्थान पर निर्णय करना नहीं, बल्कि अपने पक्षकार की कानूनी बात न्यायालय तक पहुंचाना है।
मेरा पेशेवर सिद्धांत मेरे लिए अधिवक्ता के रूप में मेरा व्यक्तिगत सिद्धांत सरल है-
“मैं किसी व्यक्ति को केवल आरोप के आधार पर दोषी नहीं मानता। मैं घटनाओं का प्रत्यक्षदर्शी नहीं हूं। जो पक्षकार कानूनी सहायता के लिए मेरे पास आता है, उसका पक्ष कानून, उपलब्ध तथ्यों और पेशेवर नैतिकता की सीमाओं के भीतर पूरी ईमानदारी और निष्ठा से न्यायालय के समक्ष रखना मेरा दायित्व है। दोष सिद्ध हुआ है या नहीं, इसका निर्णय न्यायालय करता है।”
आपराधिक मामलों में अधिवक्ता की भूमिका को इसी संदर्भ में समझना आवश्यक है। किसी व्यक्ति को कानूनी प्रतिनिधित्व मिलना उसके आचरण का समर्थन नहीं है; यह न्यायिक प्रक्रिया में उसके अधिकारों का हिस्सा है।
अंततः न्याय व्यवस्था का उद्देश्य यही होना चाहिए कि प्रत्येक प्रकरण का निर्णय कानून, प्रासंगिक साक्ष्य और निष्पक्ष न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर हो।
— देव प्रसाद जोशी अधिवक्ता, छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय बिलासपुर एवं जिला एवं सत्र न्यायालय रायपुर, एल एल बी, एल एल एम (क्रिमिनल लॉ), मोबाइल नम्बर 9893354327







