संवाददाता: बसंत राघव
रायगढ़। ब्रह्म संवारो फाउंडेशन द्वारा निःशुल्क ऑनलाइन भाषा शिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ 23 सितंबर को अग्रोहा धाम के सभागार में किया गया। कार्यक्रम में गुरुविरजानंद संस्कृतकुलम्, दिल्ली से आए आचार्य धनंजय शास्त्री ने संस्कृत के महत्व और उसकी उपयोगिता पर विचार व्यक्त किए।
आचार्य शास्त्री ने कहा कि संस्कृत किसी भी उम्र में और कहीं भी सीखी जा सकती है। यह केवल भाषा नहीं, बल्कि भारत की ज्ञान और सांस्कृतिक परंपरा की महत्वपूर्ण आधारशिला है। संस्कृत के संरक्षण से समाज और राष्ट्र की सांस्कृतिक पहचान भी सुरक्षित रहती है।
उन्होंने संस्कृत की वैज्ञानिक संरचना और उच्चारण की विशेषताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि संस्कृत का उच्चारण और लेखन काफी हद तक एकरूप है। उन्होंने आयुर्वेद, वास्तुशास्त्र, नाट्यशास्त्र, कौटिल्य के अर्थशास्त्र, रामायण, महाभारत और पुराणों का उदाहरण देते हुए संस्कृत की सामाजिक एवं व्यावहारिक उपयोगिता बताई।
आचार्य शास्त्री ने कहा कि उचित योजना और सरल पद्धति के साथ संस्कृत सीखना कठिन नहीं है। उन्होंने संस्कृत सीखने की प्रक्रिया से संबंधित अपनी प्रस्तुति भी दी।
कार्यक्रम में सत्य सनातन गुरुकुल ग्राम कांसा की बालिकाओं ने संस्कृत में स्वागत गीत पर नृत्य प्रस्तुत किया। फाउंडेशन की ओर से आचार्य धनंजय शास्त्री को संस्कृत भाषा के लिए किए जा रहे कार्यों के लिए शॉल और स्मृति-चिह्न भेंट कर सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर डॉ. विनयकुमार पाठक, सुनील रामदास, डॉ. विनय चौहान, डॉ. तरुणधर दीवान, डॉ. प्रधान और राहुल अग्रवाल सहित नगर के वरिष्ठ कवि, साहित्यकार और संस्कृत भाषा-प्रेमी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन प्रकाश शर्मा ने किया। अंत में ब्रह्म संवारो फाउंडेशन, रायगढ़ के संचालक महोदय मिश्र ने आभार व्यक्त किया।







