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नेपाल में फिर बिगड़े हालात: बाढ़ और भूस्खलन से तबाही, कई इलाके प्रभावित

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नदियों का जलस्तर खतरे के निशान के ऊपर, घरों में घुसा पानी; सड़कें और हाईवे बाधित, हजारों लोग सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाए गए
काठमांडू, 27 सितंबर 2026। नेपाल में पिछले कई दिनों से हो रही लगातार बारिश ने एक बार फिर बाढ़ और भूस्खलन का खतरा बढ़ा दिया है। देश के कई हिस्सों में नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ा है, जबकि पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन के कारण सड़क संपर्क प्रभावित हुआ है। कई स्थानों पर घरों में पानी घुस गया और कुछ मकानों के बह जाने की भी खबर है।

बुटवल में नदी ने मचाई तबाही
नेपाल के रुपन्देही जिले में तिनाऊ नदी का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर पहुंचने के बाद बुटवल क्षेत्र में छह मकान बह गए। लगातार बारिश के बीच प्रशासन और सुरक्षा बलों ने नदी किनारे रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया। रिपोर्ट के मुताबिक करीब 1,000 लोगों को रात में सुरक्षित निकाला गया, जबकि नदी किनारे लगभग 200 मकानों पर खतरा बना हुआ है।

कई इलाकों में सड़क संपर्क टूटा
लगातार बारिश के कारण नेपाल के विभिन्न जिलों में भूस्खलन की घटनाएं सामने आई हैं। पहाड़ी रास्तों पर मलबा आने से यातायात बाधित हुआ है। कई जगह सड़कें और पुल प्रभावित हुए हैं, जिससे प्रभावित इलाकों तक राहत सामग्री पहुंचाने में भी मुश्किलें आ रही हैं।
सप्तरी जिले में सप्तकोशी नदी का पानी कई बस्तियों में फैल गया। रिपोर्ट के अनुसार अकेले इस इलाके में 200 से ज्यादा घर प्रभावित हुए हैं। स्थानीय प्रशासन ने बच्चों और बुजुर्गों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की व्यवस्था की है।

एक महीने पहले की त्रासदी का जख्म अभी भरा भी नहीं
नेपाल अभी 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन से पूरी तरह उबर भी नहीं पाया है। उस आपदा में मध्य और उत्तरी नेपाल के बड़े हिस्से में भारी तबाही हुई थी। नदियों में अचानक आए उफान से घर, सड़कें, पुल, वाहन और जलविद्युत परियोजनाएं प्रभावित हुई थीं।

26 सितंबर तक उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार इस आपदा में 1,453 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 5,285 लोग अब भी लापता या लापता के रूप में दर्ज हैं। करीब 13,795 लोगों को अब तक बचाया जा चुका है।

हजारों परिवारों पर अब भी संकट
पिछली आपदा से प्रभावित क्षेत्रों में अभी भी राहत और पुनर्वास का काम जारी है। कई सड़क मार्ग पूरी तरह बह गए हैं, जबकि महत्वपूर्ण पुलों के क्षतिग्रस्त होने से दूरदराज के गांवों का संपर्क टूट गया है। सरकार अस्थायी पुल और वैकल्पिक मार्ग बनाकर संपर्क बहाल करने की कोशिश कर रही है।

नेपाल के विदेश मंत्रालय के शुरुआती आकलन में पिछली बाढ़ से 7,570 मकानों, 55 किलोमीटर सड़कों, 37 मोटरेबल पुलों और 68 झूला पुलों को नुकसान पहुंचने की जानकारी दी गई थी। 13 जलविद्युत परियोजनाएं भी प्रभावित हुई थीं।

शवों की पहचान भी बड़ी चुनौती
पिछली आपदा में बड़ी संख्या में शव बरामद हुए हैं, लेकिन सभी की पहचान अभी तक नहीं हो पाई है। अधिकारियों ने पहचान की प्रक्रिया तेज करने के लिए डीएनए सैंपलिंग शुरू की है। भारत, चीन, जापान और दक्षिण कोरिया की विशेषज्ञ टीमें भी पहचान और राहत कार्यों में सहयोग कर रही हैं।

लगातार बारिश ने बढ़ाई चिंता
अब सितंबर के अंतिम सप्ताह में फिर लगातार बारिश होने से प्रशासन के सामने नई चुनौती खड़ी हो गई है। बाढ़ और भूस्खलन की ताजा घटनाएं ऐसे समय में हुई हैं, जब पिछली आपदा से क्षतिग्रस्त सड़कों और पुलों को दोबारा चालू करने का काम चल रहा है।
स्थिति इसलिए भी गंभीर है क्योंकि जिन क्षेत्रों में पहले ही सड़क, पुल और आवासीय ढांचा कमजोर हो चुका है, वहां दोबारा भारी बारिश होने से राहत और बचाव अभियान प्रभावित हो सकते हैं। फिलहाल स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां प्रभावित इलाकों में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने और सड़क संपर्क बहाल करने में जुटी हैं।

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