विमल सोनी/रतनपुर। रतनपुर मित्र मंडली गणेश उत्सव समिति ने इस वर्ष गणेश विसर्जन को लेकर एक अनूठी और अनुकरणीय पहल की। समिति ने बिना ढोल-ताशे, डीजे और धूमल के भगवान श्रीगणेश की प्रतिमा का विसर्जन पूरी सादगी, शांति और श्रद्धा के साथ किया। समिति की इस पहल में जहां पर्यावरण संरक्षण और ध्वनि प्रदूषण को लेकर जागरूकता का संदेश दिखाई दिया, वहीं गणपति बप्पा की विदाई के दौरान कई भावुक पल भी देखने को मिले।
आमतौर पर गणेश विसर्जन के दौरान ढोल-नगाड़ों, डीजे और आतिशबाजी के बीच भक्त उत्साह के साथ बप्पा को विदाई देते हैं। लेकिन रतनपुर मित्र मंडली गणेश उत्सव समिति ने इस बार कुछ अलग करने का निर्णय लिया। समिति के सदस्यों ने तड़क-भड़क और शोर-शराबे से दूर रहकर शांतिपूर्ण एवं आध्यात्मिक वातावरण में गणेश प्रतिमा को विदाई दी।
विसर्जन यात्रा के दौरान श्रद्धालु हाथों में गणेश प्रतिमा लेकर श्रद्धा के साथ आगे बढ़े। वातावरण में न डीजे की तेज आवाज थी और न ही ढोल-ताशों का शोर। इसके बजाय श्रद्धालुओं के मुख से “गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ” के जयकारे गूंजते रहे। भक्तों ने पारंपरिक पूजा-अर्चना, आरती और मंत्रोच्चार के साथ बप्पा को अंतिम विदाई दी।
बप्पा की विदाई ने किया भावुक
विसर्जन के अंतिम क्षण बेहद भावुक रहे। जिन गणपति बप्पा की कई दिनों तक पूरे परिवार और मोहल्ले के लोगों ने पूजा-अर्चना की, आरती उतारी और उनके सामने सुख-समृद्धि की कामना की, उन्हीं बप्पा को विदा करते समय श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं। भक्तों ने हाथ जोड़कर अगले वर्ष फिर से बप्पा के आगमन की प्रार्थना की।
किसी ने बप्पा से परिवार की खुशहाली मांगी तो किसी ने समाज और क्षेत्र में सुख-शांति की कामना की। विदाई के समय श्रद्धालुओं के चेहरों पर जहां बिछड़ने का भाव था, वहीं अगले वर्ष गणेश चतुर्थी पर बप्पा के पुनः आगमन की उम्मीद भी साफ दिखाई दे रही थी।
सादगी में दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश
समिति की इस पहल ने यह संदेश भी दिया कि धार्मिक आस्था और उत्साह को बनाए रखते हुए पर्यावरण एवं सामाजिक जिम्मेदारी का ध्यान रखा जा सकता है। बिना तेज ध्वनि वाले डीजे और वाद्य यंत्रों के विसर्जन करने से आसपास का वातावरण शांत रहा और बुजुर्गों, बच्चों तथा अन्य लोगों को भी किसी प्रकार की असुविधा नहीं हुई।
रतनपुर मित्र मंडली गणेश उत्सव समिति की इस पहल की स्थानीय लोगों ने सराहना की। समिति का कहना है कि भगवान गणेश केवल उत्सव के नहीं, बल्कि सद्बुद्धि, शांति, पर्यावरण संरक्षण और सकारात्मक सोच के प्रतीक हैं। इसलिए बप्पा की विदाई भी ऐसी हो, जिसमें श्रद्धा के साथ सामाजिक जिम्मेदारी का संदेश शामिल हो।
सादगीपूर्ण विसर्जन के दौरान गूंजते गणपति बप्पा के जयकारों और नम आंखों से दी गई विदाई ने पूरे माहौल को भावुक कर दिया। अंत में सभी श्रद्धालुओं ने एक स्वर में कहा— “गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ।”







