-दसवीं की सानिया श्रीवास और बारहवीं के निर्मल केंवट पहुंचे दिल्ली, पंचायत की पहल से ग्रामीण बच्चों के सपनों को मिले नए पंख
जिला शक्ति जैजैपुर-सक्ती। लोकतंत्र में चुनाव के दौरान बड़े-बड़े वादे करना आसान होता है, लेकिन उन वादों को धरातल पर उतारकर जनता का विश्वास जीतना ही एक जनप्रतिनिधि की असली पहचान होती है। इसी सोच को चरितार्थ करते हुए ग्राम पंचायत ठठारी के सरपंच ऋषि बनाफर ने अपने चुनावी वादे को पूरा कर एक अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया है। उन्होंने पंचायत चुनाव के दौरान गांव के कक्षा 10वीं एवं 12वीं के मेधावी विद्यार्थियों को हवाई जहाज से दिल्ली भ्रमण कराने की घोषणा की थी। अब इस घोषणा को अमलीजामा पहनाते हुए गांव के दो होनहार विद्यार्थियों को पहली बार हवाई यात्रा कराकर दिल्ली पहुंचाया गया।
इस विशेष पहल के तहत कक्षा दसवीं की टॉपर सानिया श्रीवास और कक्षा बारहवीं के टॉपर निर्मल केंवट ने रायपुर से दिल्ली तक हवाई सफर किया। उनके साथ शिक्षिका शिवांजली सारथी एवं पंच तुलेश्वर लहरे भी दिल्ली भ्रमण पर गए। ग्रामीण परिवेश में पले-बढ़े इन विद्यार्थियों के लिए हवाई जहाज की पहली यात्रा जीवन का यादगार अनुभव बन गई। गांव के बच्चों की इस उपलब्धि से क्षेत्र में भी उत्साह का माहौल है।
चुनावी घोषणा को बनाया हकीकत, बच्चों के सपनों को मिली उड़ान
सरपंच ऋषि बनाफर ने चुनाव के समय केवल विकास कार्यों का आश्वासन नहीं दिया था, बल्कि शिक्षा के क्षेत्र में प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने का संकल्प भी लिया था। उन्होंने कहा था कि पंचायत क्षेत्र में दसवीं और बारहवीं की परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को हवाई जहाज से दिल्ली की सैर कराई जाएगी। आज इस वादे को पूरा कर उन्होंने यह साबित किया है कि जनप्रतिनिधि यदि दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ काम करें तो छोटे गांवों में भी बड़े बदलाव की शुरुआत हो सकती है।
यह पहल केवल दिल्ली भ्रमण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे ग्रामीण विद्यार्थियों में प्रतिस्पर्धा की भावना विकसित करना, शिक्षा के प्रति रुचि बढ़ाना और उन्हें बड़े सपने देखने के लिए प्रेरित करना भी महत्वपूर्ण उद्देश्य है।
शिक्षा के साथ स्वास्थ्य और सामाजिक सरोकारों में भी आगे पंचायत
ग्राम पंचायत ठठारी में सरपंच की पहल शिक्षा तक ही सीमित नहीं बताई जा रही है। ग्रामीणों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए 24 घंटे निःशुल्क एंबुलेंस सुविधा तथा पानी टैंकर की व्यवस्था भी की गई है। गांव में किसी परिवार में मृत्यु होने पर अंतिम संस्कार एवं पारिवारिक संकट के समय सहयोग स्वरूप एक क्विंटल चावल उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी सामाजिक संवेदनशीलता का उदाहरण है।
इसके अतिरिक्त कक्षा छठवीं से नौवीं तक के मेधावी विद्यार्थियों को प्रतिवर्ष प्रोत्साहन राशि देकर सम्मानित किया जाता है। इससे स्पष्ट होता है कि पंचायत में शिक्षा, स्वास्थ्य और जरूरतमंद परिवारों के सहयोग को सामाजिक जिम्मेदारी के रूप में आगे बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।
जनप्रतिनिधित्व का अर्थ केवल सड़क-नाली नहीं, समाज का भविष्य संवारना भी
आज ग्रामीण क्षेत्रों में अक्सर पंचायतों के विकास का मूल्यांकन सड़क, नाली, बिजली और भवन निर्माण जैसे कार्यों से किया जाता है। लेकिन ठठारी ग्राम पंचायत की यह पहल बताती है कि पंचायत का दायित्व इससे कहीं व्यापक है। गांव के बच्चों को शिक्षा के लिए प्रेरित करना, जरूरतमंदों को स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना और दुख की घड़ी में परिवारों के साथ खड़े रहना भी जनप्रतिनिधित्व की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
सरपंच ऋषि बनाफर द्वारा चुनावी वादे को पूरा करना अन्य ग्राम पंचायतों के जनप्रतिनिधियों के लिए भी प्रेरणादायक संदेश है। यदि पंचायत स्तर पर शिक्षा और सामाजिक कल्याण को प्राथमिकता दी जाए तो ग्रामीण प्रतिभाओं को आगे बढ़ने के बेहतर अवसर मिल सकते हैं।
ठठारी की पहल बनी चर्चा का विषय, दूसरे गांवों के लिए भी प्रेरणा
सानिया श्रीवास और निर्मल केंवट की पहली हवाई यात्रा गांव के अन्य विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा का माध्यम बन सकती है। अब गांव के दूसरे बच्चे भी यह सपना देख सकेंगे कि मेहनत, लगन और अच्छे परिणाम के दम पर वे भी अपने गांव का नाम रोशन कर सकते हैं।
कुल मिलाकर ग्राम पंचायत ठठारी की यह पहल एक सकारात्मक संदेश देती है कि चुनावी वादों की असली कीमत उन्हें पूरा करने में है। सरपंच ऋषि बनाफर ने अपने संकल्प को जमीन पर उतारकर यह दिखाया है कि इच्छाशक्ति और सामाजिक सोच के साथ पंचायत स्तर पर भी ऐसी पहल की जा सकती है, जो आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को नई दिशा दे सके।







