-बनारस की सांगीतिक परंपरा पहुँची वनांचल, अक्षत कलेक्टिव की प्रस्तुति पर झूमे जिलेवासी
-भक्ति, संगीत और लोकरंग का संगम: अक्षत कलेक्टिव, लोक मंथन और वाइब्रेशन की प्रस्तुतियों से सजा राज्योत्सव
युसूफ खान/कुसमी/बलरामपुर –
राज्योत्सव की रात बलरामपुर ने बनारस घराने की सांगीतिक परंपरा को अपने ही आँगन में जिया। छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस पर हाई स्कूल मैदान में आयोजित जिला स्तरीय राज्योत्सव में बनारस के प्रसिद्ध संगीत समूह अक्षत कलेक्टिव ने शिव स्तुति से अपनी प्रस्तुति का शुभारंभ किया। भक्ति रस में डूबे स्वरों के साथ तबले की थाप और बाँसुरी की मधुर तान गूँजी तो पूरा पंडाल श्रद्धा और संगीत के एक सूत्र में बँध गया।
शिव स्तुति के बाद समूह ने उप-शास्त्रीय और सुगम गायन की ऐसी सुरीली श्रृंखला प्रस्तुत की, जिसमें शास्त्रीय संगीत की बारीकियाँ और आमजन के मन को छूने वाले भावपूर्ण गीत एक साथ पिरोए गए थे। बनारस की शास्त्रीय विरासत को आधुनिक मंचों तक पहुँचाने के लिए पहचाने जाने वाले इस समूह की हर प्रस्तुति पर दर्शकों ने तालियों से उत्साह बढ़ाया। संगीत के जानकारों से लेकर पहली बार ऐसी महफिल का आनंद ले रहे ग्रामीण दर्शकों तक, सभी देर रात तक सुरों में डूबे रहे। वनांचल के इस जिले के लोगों के लिए अपने शहर में बनारस के सुरों को सुनना एक अविस्मरणीय अनुभव रहा।
सांस्कृतिक मंच पर बिलासपुर की वाइब्रेशन डांस एकेडमी के कलाकारों ने ऊर्जा से भरपूर नृत्य प्रस्तुतियों से उत्साह का संचार किया, वहीं कसडोल के लोक मंथन दल ने जनजातीय नृत्य से वनांचल की परंपरा को जीवंत कर दिया। बलरामपुर की जनजातीय पहचान से जुड़ी इस प्रस्तुति में दर्शकों ने अपनी ही संस्कृति का प्रतिबिंब देखा।

इससे पहले जिले के स्कूली विद्यार्थियों और स्थानीय कलाकारों ने 15 प्रस्तुतियों से अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। छत्तीसगढ़ी स्वागत नृत्य, सुवा नृत्य, शिव तांडव, कान्हा नृत्य, सूफी नृत्य तथा घूमर, हरियाणवी, अरुणाचली और नेपाली लोकनृत्यों ने मंच को विविध रंगों से सजाया। भेलवाडीह के पहाड़ी कोरवा कलाकारों का उड़िया लोकनृत्य और ‘सशक्त नारी, युवा उड़ान’ थीम पर आधारित नारी सशक्तिकरण की प्रस्तुति विशेष रूप से सराही गई। बनारस के सुर, बिलासपुर की ऊर्जा, कसडोल की लोकपरंपरा और जिले की अपनी प्रतिभाओं के संगम ने बलरामपुर के राज्योत्सव को यादगार बना दिया।







