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स्वामी विवेकानंद की पुण्यतिथि “विवेकानंद जी के विचारों का आत्मसात करने का संकल्प लें” – उमेश दुबे

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जांजगीर-चांपा संवाददाता – राजेन्द्र जायसवाल

जिला जांजगीर-चांपा , 4 जुलाई — स्वामी विवेकानंद जी की पुण्यतिथि न केवल उनके जीवन और शिक्षाओं को स्मरण करने का दिन है, बल्कि आत्मचिंतन और आत्मसात का भी अवसर है। इसी कड़ी में शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला सेमरिया के प्रभारी प्रधानपाठक उमेश कुमार दुबे ने छात्राओं को स्वामी विवेकानंद के महान विचारों और आध्यात्मिक योगदानों से परिचित कराते हुए उनके आदर्शों को जीवन में अपनाने का संकल्प दिलाया।

प्रभारी प्रधानपाठक दुबे ने कहा कि स्वामी विवेकानंद एक ऐसे महान संत, विचारक और आध्यात्मिक गुरु थे जिन्होंने भारत की आध्यात्मिक शक्ति को विश्व मंच पर पहचान दिलाई। उन्होंने भारत की प्राचीन वेदांत परंपरा को न केवल सरल भाषा में समझाया, बल्कि उसे आम जनमानस के लिए व्यावहारिक भी बनाया। उनका विश्वास था कि “प्रत्येक आत्मा में ईश्वर का अंश है” और मानव जीवन का उद्देश्य उस ईश्वरीय शक्ति को पहचानकर उसे जागृत करना है।

उमेश दुबे ने विवेकानंद जी के प्रसिद्ध वाक्य “उठो, जागो और तब तक मत रुको, जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो” को उद्धृत करते हुए कहा कि यह केवल एक मंत्र नहीं, बल्कि युवाओं के लिए एक जीवन पथ है। यह विचार हमें आत्मबल, साहस और निरंतर प्रयास की ओर प्रेरित करता है। स्वामीजी ने यह स्पष्ट किया कि सच्चा धर्म वही है, जो व्यक्ति को सशक्त करे, न कि कमजोर बनाए।

स्वामी विवेकानंद के जीवन का सबसे प्रेरणादायी क्षण शिकागो के विश्व धर्म संसद में दिया गया उनका ऐतिहासिक भाषण था, जहाँ उन्होंने पूरे विश्व को भारतीय संस्कृति, सहिष्णुता और आध्यात्मिकता का परिचय कराया। उन्होंने धर्म को कर्म, सेवा, प्रेम और समर्पण के रूप में परिभाषित किया और बताया कि आध्यात्मिकता केवल पूजा-पाठ नहीं, बल्कि जीवन को ईमानदारी, करुणा और समर्पण के साथ जीने का नाम है।

प्रभारी प्रधानपाठक दुबे ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि आज के युवाओं को विवेकानंद जी की शिक्षाओं को आत्मसात करने की आवश्यकता है। उनके अनुसार, “जब तक हम अपने भीतर छिपी अपार संभावनाओं को नहीं पहचानते, तब तक समाज का पूर्ण विकास असंभव है।” विवेकानंद जी की शिक्षा हमें आत्म-जागृति, आत्मनिर्भरता और समाज सेवा की ओर ले जाती है।

उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे स्वामीजी की वाणी — “तुम आत्मा हो, तुम अजर-अमर हो, तुम्हें कोई बंधन बांध नहीं सकता” — को जीवन का मूल मंत्र बनाएं और अपने जीवन को सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ाएं।

स्वामी विवेकानंद केवल एक व्यक्तित्व नहीं, बल्कि एक चेतना हैं। उनकी पुण्यतिथि हमें प्रेरित करती है

स्वामी विवेकानंद केवल एक व्यक्तित्व नहीं, बल्कि एक चेतना हैं। उनकी पुण्यतिथि हमें प्रेरित करती है कि हम अपने विचारों, कार्यों और जीवन शैली में सच्चाई, साहस और सेवा को अपनाएं। आइए इस पुण्यतिथि पर हम सभी मिलकर उनके दिखाए मार्ग पर चलने का संकल्प लें और उनके विचारों को अपने जीवन में आत्मसात करें। यही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

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