बस्तर संवाददाता – अर्जुन झा
नक्सल क्षेत्रों के विकास की राह में रोड़ा बने पीडब्ल्यूडी के ईएनसी
बस्तर को फिर गर्त में ले जाने का काम कर रहे हैं इंजीनियर इन चीफ
जगदलपुर। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना रूरल रोड प्रोजेक्ट-2 (आर आर पी-2) लोक निर्माण विभाग के इंजीनियर इन चीफ (ईएनसी)की हठधार्मिता की भेंट चढ़ गई है। इस प्रोजेक्ट को जमीन पर साकार करने वाले ठेकेदारों को परेशान करने और उन्हें आर्थिक तंगी में उलझाए रखने की जिद ईएनसी ने पाल रखी है। उन्होंने इसे अपनी निजी प्रतिष्ठा का प्रश्न बना लिया है। उनके इस हठ के चलते बस्तर जैसे नक्सल प्रभावित संभाग में प्रोजेक्ट के कार्य प्रभावित होने लगे हैं। बस्तर संभाग में प्रोजेक्ट को साकार करने में लगे ठेकेदारों को विशेष तौर पर निशाना बनाया जा रहा है। उनके इस कदम से विकास की ओर अग्रसर बस्तर फिर गर्त में जाता दिख रहा है।
पहले हम अपने पाठकों को आरआरपी-2 के बारे में बताते हैं। देश के गृहमंत्री अमित शाह ने 31 मार्च 2026 तक बस्तर को नक्सल मुक्त बनाने का संकल्प ले रखा है। इस संकल्प की पूर्ति के लिए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, उप मुख्यमंत्री एवं गृहमंत्री विजय शर्मा और बस्तर के आदिवासी पुत्र एवं वन मंत्री केदार कश्यप जी जान से जुटे हुए हैं। दरअसल विकास के जरिए नक्सलवाद के विनाश के ध्येय से केंद्र और राज्य की सरकारें काम कर रही हैं। आरआरपी-2 भी इसी ध्येय का एक बड़ा हिस्सा है। केंद्र सरकार की इस परियोजना के तहत नक्सल प्रभावित इलाकों के गांवों तक पक्की सड़कें और पुल पुलिया बनाने का प्रावधान है। सड़कों का जाल बिछने से जहां अति नक्सल प्रभावित क्षेत्रों तक सुरक्षा बलों की पहुंच बढ़ जाएगी, वही विकास और जन सुविधाओं का विस्तार भी सुगमता पूर्वक होगा। मगर लोक निर्माण विभाग के ईएनसी श्री भतपहरी को शायद नक्सल प्रभावित इलाकों का विकास नागवार गुजर रहा है। यही वजह है कि वे बार बार ठेकेदारों का भुगतान रोक कर बस्तर के विकास की राह में रोड़े अटकाते आ रहे हैं। बस्तर संभाग में कार्यरत ठेकेदारों को भुगतान देने में विभाग द्वारा वर्तमान में फिर आनाकानी की जा रही है। ठेकेदार को परेशान करने की योजना में शामिल ईएनसी श्री भतपहरी और उनके कांकेर ओर जगदलपुर के प्रभारी अधीक्षण यंत्री श्री सूर्यवंशी की भूमिका को अहम माना जा रहा है। सूत्रों के अनुसार बस्तर के अधिक्षण यंत्री श्री टेकाम को जानबूझ कर यहां से हटा दिया गया है ताकि सड़क निर्माण में अपना तन मन धन लगाने वाले ठेकेदारों को परेशान किया जा सके। केंद्र सरकार की आरआरपी-2 योजना की छत्तीसगढ़ में क्रियान्वयन एजेंसी लोक निर्माण विभाग है। इस प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य नक्सल प्रभावित इलाके को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना है, मगर इस कड़ी में ईएनसी श्री भतपहरी बड़ी गांठ साबित हो रहे हैं।
सुशासन को बदनाम करने की साजिश
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की सुशासन सरकार को ऐसे प्रशासनिक अधिकारी जानबूझ कर बदनाम करने में जुटे हुए हैं। भुगतान में विलंब से कार्य ठप पड़ जाते हैं, इससे केंद्र सरकार की नजरों में राज्य सरकार की साख गिर जाती है। सूत्र बताते हैं कि साय सरकार को बदनाम करने की नीयत से ईएनसी ने फिर ठेकेदारों के कई करोड़ का भुगतान अटका दिया है। भुगतान में विलंब के पीछे कभी सॉफ्टवेयर में दिक्कत तो कभी तकनीकी परेशानी बहाना बना कर दर्जनों ठेकेदारों को कई करोड़ रुपए के भुगतान से वंचित रखा जा रहा है। बताते हैं कि पूर्व में भी इसी प्रकार का रवैया ईएनसी श्री भतप्रहरी द्वारा अपनाया गया था। तब कुछ चुनिंदा ठेकेदारों को भुगतान किया गया था।
ईगो पाले बैठे हैं साहब
मीडिया में मामला उजागर होने के बाद ही चुनिंदा ठेकेदारों को भुगतान किया गया था। मीडिया के इसी दबाव को अब श्री भतपहरी ने अपनी प्रतिष्ठा से जोड़ लिया है। इसी कुंठा के चलते अब उन्होंने दूसरे ढंग से ठेकेदारों को परेशान करना शुरू किया है। ईएनसी के कुछ विश्वस्त अधिकारी ही आरआरपी-2 योजना योजना को लीड करते हैं। एसएनएस स्पर्श पोर्टल के माध्यम से भुगतान होता है। इस पोर्टल में कई माह से खराबी बताकर भुगतान लंबित रखा गया है। सूत्र तो यह भी दावा करते है कि ईएनसी भतप्रहरी द्वारा इस बार दावा किया गया है कि देखते हैं, बिना मेरी मर्जी के कैसे भुगतान होता है? यानि उन्होंने ईगो पाल लिया है। ठेकेदार भले चाहे आर्थिक तंगी से जूझते रहें, आरआरपी-2 प्रोजेक्ट का भले ही भट्ठा बैठ जाए, मगर साहब का ईगो हर्ट नहीं होना चाहिए। श्री भतपहरी द्वारा अपनाए जा रहे इस रवैये से सुशासन सरकार की छवि धूमिल हो रही है।









