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छत्तीसगढ़ में सड़क पर हंगामा: देर रात युवकों ने ट्रैफिक रोककर मनाया जन्मदिन, पटाखे और आतिशबाज़ी का वीडियो वायरल

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रायपुर संवाददाता – रघुराज
रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में देर रात ट्रैफिक नियमों की जमकर धज्जियां उड़ाने का मामला सामने आया है। खरोरा-तिल्दा मार्ग पर कुछ युवकों ने ट्रैफिक रोककर बीच सड़क पर ही अपने दोस्त का जन्मदिन धूमधाम से मनाया। जन्मदिन के दौरान केक काटते हुए और आतिशबाज़ी करते हुए युवकों का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें देखा जा सकता है कि युवक सड़क पर लड़ (पटाखों की लड़ी) में आग लगाकर दौड़ रहे हैं और हंगामा मचा रहे हैं।
मिली जानकारी के अनुसार, युवक वाकर अहमद का जन्मदिन था। इस दौरान 8 से 10 युवकों का समूह सड़क पर इकठ्ठा हुआ और उन्होंने ना केवल यातायात व्यवस्था अस्त-व्यस्त कर दी बल्कि खुलेआम हंगामा करते हुए कानून-व्यवस्था को चुनौती भी दी। देर रात सड़क पर आतिशबाज़ी और पटाखों के धमाकों से आसपास के लोगों को भी परेशानियों का सामना करना पड़ा। राहगीरों को मजबूरन अपना रास्ता बदलना पड़ा। इस घटना ने एक बार फिर प्रशासन और पुलिस व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि हाई कोर्ट द्वारा लगातार सड़क सुरक्षा और ट्रैफिक व्यवस्था को लेकर सख्त निर्देश दिए जाने के बाद भी खुलेआम इस तरह की घटनाएं हो रही हैं। यह घटना प्रशासनिक तत्परता पर प्रश्न चिन्ह लगाती है। लोगों का यह भी कहना है कि अगर ऐसे युवकों पर सख्त कार्रवाई नहीं की जाती तो भविष्य में सड़क हादसों और बड़े घटनाक्रमों की आशंका बनी रहेगी।
इधर, रायपुर की इस घटना के अलावा बिलासपुर से भी ट्रैफिक नियमों की अवहेलना का मामला सामने आया है। गुरुवार को मस्तूरी रोड क्षेत्र में कुछ युवक करीब 18 गाड़ियों के साथ सड़क पर स्टंटबाजी करते हुए नज़र आए। बताया जा रहा है कि ये युवक चलती कार से बाहर निकलकर सोशल मीडिया के लिए रील बना रहे थे। इस दौरान उन्होंने सड़क पर दोनों दिशाओं में गाड़ियों की कतारें लगाकर जोखिम भरे करतब किए। इसका वीडियो इंटरनेट मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस हरकत में आई और स्टंटबाजों को पकड़कर उन पर कानूनी कार्रवाई की। पुलिस ने मौके से 18 कारों को ज़ब्त किया और युवकों पर प्रतिबंधात्मक धाराओं के तहत केस दर्ज किया।
मामला सामने आने के बाद स्थानीय लोगों और सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि लगातार हो रही इन घटनाओं के बावजूद पुलिस और प्रशासन सख्ती बरतने में क्यों नाकाम है। अदालत के आदेशों के बावजूद इस तरह की घटनाएं होना न केवल चिंता का विषय है बल्कि यह समाज में गलत संदेश भी दे रहा है।
राज्य में लगातार सड़क सुरक्षा और ट्रैफिक नियमों को लेकर जागरूकता अभियान चलाए जाते हैं, लेकिन युवाओं पर इसका खास असर दिखाई नहीं देता। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रशासन को केवल कार्रवाई ही नहीं बल्कि ऐसे मामलों पर जागरूकता और शिक्षा पर भी विशेष ध्यान देना चाहिए ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।
रायपुर और बिलासपुर दोनों घटनाओं ने यह साबित कर दिया है कि ट्रैफिक नियमों की अनदेखी एक गंभीर समस्या बनती जा रही है। अब देखना यह होगा कि सरकार और प्रशासन इस पर आगे कितनी सख्ती दिखाते हैं।

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