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छोटी दिवाली या नरक चतुर्दशी आज

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रतनपुर संवाददाता – रवि परिहार
 दिवाली का पर्व भारत सहित दुनिया के कई हिस्सों में बहुत धूमधाम से मनाया जाता है। इस पर्व में लोग दीये जलाते हैं, घर सजाते हैं, पटाखे फोड़ते हैं, मिठाइयां बांटते हैं और अपने प्रियजनों को उपहार देते हैं। यह त्योहार खुशियों और रोशनी का प्रतीक माना जाता है। दिवाली का त्योहार 5 दिनों तक मनाया जाता है।
 दिवाली का पर्व भारत सहित दुनिया के कई हिस्सों में बहुत धूमधाम से मनाया जाता है। इस पर्व में लोग दीये जलाते हैं, घर सजाते हैं, पटाखे फोड़ते हैं, मिठाइयां बांटते हैं और अपने प्रियजनों को उपहार देते हैं। यह त्योहार खुशियों और रोशनी का प्रतीक माना जाता है। दिवाली का त्योहार 5 दिनों तक मनाया जाता है। दिवाली की शुरुआत धनतेरस से हो जाती है। धनतेरस के अगले दिन यानी मुख्य दिवाली से एक दिन पहले छोटी दिवाली मनाई जाती है। दीपावली उत्सव का दूसरा दिन होता है। यह पर्व कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है और धार्मिक दृष्टि से इसका बहुत विशेष महत्व माना गया है।
छोटी दिवाली क्या है?- छोटी दिवाली, जिसे नरक चतुर्दशी भी कहा जाता है, दिवाली से एक दिन पहले मनाई जाती है। यह दिन भगवान कृष्ण की उस जीत की याद में मनाया जाता है जब उन्होंने राक्षस नरकासुर का वध किया था। इसलिए यह त्योहार अच्छाई की बुराई पर जीत का प्रतीक है। दिवाली की तुलना में छोटी दिवाली थोड़ी साधारण तरीके से मनाई जाती है। इस दिन भी लोग घरों में दीपक जलाते हैं, पूजा करते हैं और शाम को भगवान की आराधना करते हैं।
नरक चतुर्दशी (छोटी दिवाली) 2025 में रविवार, 19 अक्टूबर को मनाई जाएगी।
चतुर्दशी तिथि की शुरुआत: 19 अक्टूबर दोपहर 1:51 बजे
चतुर्दशी तिथि समाप्त: 20 अक्टूबर दोपहर 3:44 बजे।
क्योंकि पूजा का समय रात में होता है, इसलिए 19 अक्टूबर की रात को ही छोटी दिवाली मनाना सही रहेगा।
पूजा विधि- इस दिन भगवान श्रीकृष्ण, यमराज और माता लक्ष्मी की पूजा का विशेष महत्व होता है। सूर्योदय से पहले स्नान करने की परंपरा है, जिसे अभ्यंग स्नान कहा जाता है। इससे शरीर और मन की शुद्धि होती है और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, इस दिन भगवान श्रीकृष्ण के साथ यमराज की आराधना करने से अकाल मृत्यु का भय समाप्त हो जाता है और जीवन में शांति व समृद्धि बनी रहती है।
शुभ मुहूर्त और पूजा का समय 🌷
नरक चतुर्दशी की तिथि 19 अक्टूबर 2025, रविवार दोपहर 1:51 बजे से शुरू होगी और 20 अक्टूबर 2025, सोमवार दोपहर 3:44 बजे तक चलेगी। इस समय के बीच आप यम दीपक जला सकते हैं और पूजा-पाठ कर सकते हैं। इस दिन अभ्यंग स्नान (तेल लगाकर स्नान करने की परंपरा) का शुभ समय सुबह 5:12 से 6:25 बजे तक रहेगा। माना जाता है कि इस दिन दीपदान करने से नरक के दुखों से मुक्ति मिलती है और जीवन में सुख-समृद्धि बढ़ती है।
अभ्यंग स्नान मंत्र (स्नान से पहले)
नरक से मुक्ति और पवित्रता के लिए यह मंत्र बोला जाता है —
“अभ्यंगं कुर्वे प्रातः नरकप्राप्तये सदा।
दामोदरप्रीतये च स्नानं मे भवतु सिद्धिदम्॥”
दीपदान मंत्र (शाम को यम दीपदान करते समय)
“मृत्युनाज्ञायाम् दीपं ददामि नमोऽस्तु ते।
यमराज नमस्तुभ्यं दीपं गृह्य तु याच्यसे॥”
या फिर सरल रूप में:
“यम दीपं ददाम्यहम् दीनानां हर मे भयम्।”
श्रीकृष्ण पूजन मंत्र (रूप चतुर्दशी के रूप में)
“ॐ नमो भगवते वासुदेवाय।”
“ॐ दामोदराय नमः।”
यम तर्पण मंत्र (यदि जल अर्पण करें)
“मृत्यवे नमः, यमाय नमः, धर्मराजाय नमः, अंतकाय नमः।”
सामान्य प्रार्थना (दिवाली पूर्व आत्मशुद्धि हेतु)
“पापानि मे हर देवेश दामोदर नमोऽस्तु ते।
रूपं देहि जयां देहि यशो देहि द्विषां जयम्॥”
उपाय-
प्रातःकाल अभ्यंग स्नान उपाय
सूर्योदय से पहले उठकर तेल (तिल या सरसों) में हल्दी, काली तिल और थोड़ा चंदन मिलाकर पूरे शरीर पर लगाएं। इसके बाद उबटन या बेसन से स्नान करें। इस उपाय को करने से पापों का नाश होता है और शरीर में तेज व आकर्षण बढ़ता है।
यम दीपदान उपाय (संध्या के समय)- संध्या के समय घर के दक्षिण दिशा में (या मुख्य द्वार के बाहर दाहिनी ओर) एक दीपक जलाएं।उसमें तिल का तेल और एक नया रूई का बत्ती हो। दीपक को जलाते समय यमराज से दीर्घायु और पापमुक्त जीवन की प्रार्थना करें।
धन और लक्ष्मी प्राप्ति उपाय 🌷- शाम को लक्ष्मी जी के चित्र या दीप के सामने 11 कौड़ियां और एक रुपये का सिक्का रखकर “ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं महालक्ष्म्यै नमः” का 108 बार जप करें। अगले दिन ये कौड़ियां तिजोरी या पर्स में रख लें।                  दैवज्ञ पण्डित रमेश शर्मा श्री मंगलागौरी मन्दिर धाम

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