-सहायक संचालक और एपीओ को बनाया गया है प्रतिवादी =
-दो सचिवों पर भी षड्यंत्र में शामिल होने का लगा आरोप, कोर्ट में देंगे सफाई=
अर्जुन झा/जगदलपुर। बस्तर संभाग के सुकमा जिले के नक्सल प्रभावित क्षेत्र की ग्राम पंचायत में हो रहे भ्रष्टाचार को उजागर करने वाले पंचायत सचिव की हत्या कर दी गई। इस मामले में मृतक के परिवार द्वारा सहायक संचालक और सहायक परियोजना अधिकारी के खिलाफ न्यायालय में परिवाद दायर किया गया है। परिवाद में आरोप लगाया गया है कि कुछ विभागीय अधिकारी पंचायत सचिव की हत्या के षड्यंत्र में शामिल थे।
जानकारी के अनुसार वर्ष 2023 के अंत में संदिग्ध मौत मामला आया था। मृतक पंचायत सचिव का नाम असुर था। असुर के पिता ने मृतक के मोबाइल डाटा और उजागर किए गए भ्रष्टाचार और प्रशासनिक दबाव को हत्या का कारण बताया है। सुकमा की ग्राम पंचायतों में हुए भ्रष्टाचार की पुष्टि की जांच के लिए नए अधिकारी भेजे गए हैं। शासन और प्रशासन जुट गए हैं। सुकमा में भ्रष्टाचार उजागर करने वाले मामलों की जांच शुरू हो चुकी है। मृतक सचिव असुर द्वारा तालाब निर्माण में गड़बड़ियों का खुलासा किया गया था। इसमें पाई गई अनियमितता और मनरेगा के तहत निर्माण कार्यों में बड़े फर्जीवाड़ा का आरोप लगाया गया है। इस मामले में तीन अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगे हैं। मृत सचिव असुर के पिता ने बताया कि मामला हत्या से जुड़ा है। तालाब निर्माण, पीएम आवास, मनरेगा, पेयजल योजना, शौचालय योजना और कई अन्य पंचायतों में फर्जी मस्टररोल तैयार कर राशि आहरण करने का आरोप है। मृतक सचिव के मोबाइल रिकार्ड में मिली सीडीआर के सबूतों के दम पर आरोपियों के विरुद्ध मामला गंभीर बताया जा रहा है। सचिव द्वारा बार-बार नियमों का पालन करने और भ्रष्टाचार रोकने की बात कही जाती थी। परंतु फर्जी मस्टरोल तैयार कर पैसे निकालने का दबाव बनाया जा रहा था। सचिव द्वारा नियमों के तहत पंचायत से इस्तीफा दिया गया था। नियम अनुसार भ्रष्टाचारियों का सत्यापन होते और भ्रष्टाचारी कार्यालय से बाहर हो जाते, परंतु इसके उलट ईमानदार सचिव असुर की हत्या कर दी गई और मामले को दुर्घटना बताकर रफा दफा करने का प्रयास किया गया।
बड़गु पंचायत में करोड़ों के वारे न्यारे
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार बड़गु पंचायत में बड़ी गड़बड़ी हुई है। यहां अमृत सरोवर योजना के तहत तालाब बनने थे लेकिन निर्माण स्थल पर एक ढेला तक नहीं निकाला गया और राशि निकाल ली गई। नए प्रोजेक्ट ऑफिसर ने आदेश के बाद जांच की। जिसमें अमृत सरोवर तालाब, पीएम आवास, शौचालय निर्माण, मनरेगा, पेयजल योजना में फर्जी भुगतान कर करोड़ों रुपये का भ्रष्टाचार होने का आशंका जताई गई है।एएसपी पंचायत में हुई शिकायत पर शिक्षकों और पंच-सरपंच के बयान लिए गए। कलेक्टर कार्यालय में शिक्षा विभाग की फाइल छुपाने की रिपोर्ट सामने आई है। न्यायालय में परिवाद दायर होने के बाद से अधिकारी एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं। पंचायत सचिव के पिता ने बताया कि शासन-प्रशासन द्वारा 3 माह पूर्व जांच का आदेश जारी हुआ था, परंतु जांच पूरी न होकर कुछ अधिकारियों पर मामला उलझा हुआ है।









