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वेदांता चेयरमैन अनिल अग्रवाल के बेटे अग्निवेश का निधन, अमेरिका में स्कीइंग हादसे के बाद कार्डियक अरेस्ट से गई जान

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 “आज मेरे जीवन का सबसे काला दिन है। बेटे का जाना पिता से पहले नहीं होना चाहिए।” यह कहते हुए देश के दिग्गज उद्योगपति अनिल अग्रवाल का दर्द छलक पड़ा। वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल  के बेटे अग्निवेश अग्रवाल का 49 साल की उम्र में निधन हो गया। यह दुखद खबर न सिर्फ उनके परिवार, बल्कि पूरे कारोबारी जगत के लिए एक गहरा सदमा है।

परिवार की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, अग्निवेश अग्रवाल अमेरिका में स्कीइंग के दौरान हुए एक हादसे में घायल हो गए थे। उनका इलाज न्यूयॉर्क के माउंट सिनाई हॉस्पिटल में चल रहा था। डॉक्टरों के अनुसार उनकी हालत में सुधार हो रहा था और सबको उम्मीद थी कि वे जल्द ठीक हो जाएंगे। लेकिन अचानक कार्डियक अरेस्ट आने से उनका निधन हो गया।

“आज मेरे जीवन का सबसे काला दिन है। मेरा प्यारा बेटा अग्निवेश हमें बहुत जल्दी छोड़कर चला गया। वह सिर्फ 49 साल का था, पूरी तरह स्वस्थ, जिंदगी से भरा हुआ और बड़े-बड़े सपनों वाला। अमेरिका में स्कीइंग के दौरान हुए एक हादसे के बाद उसका न्यूयॉर्क के माउंट सिनाई अस्पताल में इलाज चल रहा था। उसकी हालत लगातार बेहतर हो रही थी। हमें लगा था कि अब सबसे बुरा वक्त पीछे छूट चुका है। लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था, और अचानक आए कार्डियक अरेस्ट  ने हमारा बेटा हमसे छीन लिया।

उन्होंने आगे लिखा कि, एक माता-पिता के दिल के दर्द को शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता, जब उन्हें अपने ही बच्चे को अलविदा कहना पड़े। बेटे का जाना पिता से पहले नहीं होना चाहिए। इस नुकसान ने हमें इस तरह तोड़ दिया है, जिसे समझने की कोशिश हम अब भी कर रहे हैं।

मुझे आज भी वह दिन साफ याद है, जब 3 जून 1976 को पटना में अग्नि का जन्म हुआ था। एक मध्यमवर्गीय बिहारी परिवार से निकलकर वह एक मजबूत, संवेदनशील और उद्देश्यपूर्ण इंसान बना। वह अपनी मां की जिंदगी की रोशनी था, अपने भाई के लिए एक ढाल, दोस्तों के लिए सच्चा साथी और एक ऐसा कोमल दिल इंसान, जो जिससे भी मिला, उसे छू गया।

अग्निवेश कई रूपों में था- एक खिलाड़ी, एक संगीत प्रेमी, एक लीडर। उसने अजमेर के मेयो कॉलेज में पढ़ाई की, फुजैराह गोल्ड जैसी बेहतरीन कंपनी की स्थापना की, हिंदुस्तान जिंक का चेयरमैन बना और साथ काम करने वालों व दोस्तों के बीच गहरा सम्मान पाया। लेकिन इतने सारे पद और उपलब्धियों के बावजूद, वह हमेशा सादा, गर्मजोशी से भरा और पूरी तरह इंसान बना रहा।

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