बीबीएम डिवीजन के नक्सली एक पत्र के माध्यम से यह संदेश दे रहे हैं कि वे हथियारों के साथ आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटना चाहते हैं। उन्होंने विशेष रूप से गृहमंत्री से सुरक्षा की गारंटी देने का आग्रह किया है। आश्वासन मिलने के बाद उन्होंने 2 से 3 मार्च तक आत्मसमर्पण करने का समय तय किया है।
नक्सलियों ने बताया कि वे फिलहाल ओडिशा में हैं, लेकिन अधिकांश सदस्य बस्तर क्षेत्र के रहने वाले हैं, इसलिए छत्तीसगढ़ में ही सरेंडर करने पर सहमति बनी है। इस प्रक्रिया में एक टीम आगे बढ़कर संपर्क स्थापित कर रही है, जबकि बाकी सदस्य धीरे-धीरे तय स्थान की ओर बढ़ रहे हैं। उन्होंने 1 मार्च तक समय देने का अनुरोध किया है।
आत्मसमर्पण में देरी के कारण
नक्सलियों ने पत्र में बताया कि आत्मसमर्पण में देरी के पीछे मुख्य कारण हैं:
- केंद्रीय कमेटी (CC) के निर्णय का इंतजार
- आत्मसमर्पण करने वालों को बैरकों में रखने और बाद में केस में फंसाने का डर
- कॉम्बिंग ऑपरेशन के दौरान मुठभेड़ का भय
इन कारणों से कैडर में संशय रहा, इसलिए कुछ दिन प्रतीक्षा की गई।
कुल 15 नक्सली करेंगे सरेंडर
पत्र में उल्लेख है कि कुल 15 सदस्य (DVC-3, AC-5, PM-7) आत्मसमर्पण के लिए तैयार हैं और महासमुंद जिले में सरेंडर करने की योजना है। उन्होंने बताया कि यह कदम मार्च 31 के लक्ष्य से 28 दिन पहले उठाया जा रहा है।
सुरक्षा और सुरक्षित मार्ग की अपील
नक्सलियों ने विशेष रूप से कहा कि आत्मसमर्पण के दौरान पुलिस कॉम्बिंग और दबाव वाली कार्रवाई रोक दी जाए, ताकि वे सुरक्षित रूप से तय स्थान तक पहुंच सकें। साथ ही उन्होंने ओडिशा पुलिस को भी सूचना देने और बलांगिर व बरगढ़ जिलों में सर्च ऑपरेशन रोकने का अनुरोध किया है। उनका कहना है कि रास्ते में सुरक्षा बलों की उपस्थिति समूह के बिखरने का खतरा पैदा कर सकती है।
गृहमंत्री का संदेश
गृहमंत्री विजय शर्मा ने बताया कि नक्सलियों के पत्र के आधार पर सरकार उनकी सुरक्षा, स्वास्थ्य और पुनर्वास को लेकर गंभीर प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि नक्सलियों की संख्या 15 से अधिक हो सकती है। गृहमंत्री एक वीडियो संदेश जारी करेंगे, जिसमें नक्सलियों को सुरक्षित लौटने की अपील, उनका सम्मान और मुख्यधारा में पुनर्वास के उपायों की जानकारी दी जाएगी।









