रायपुर संवाददाता – रघुराज
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से एक बेहद परेशान करने वाली और संवेदनशील खबर सामने आई है, जिसने बाल अधिकारों की सुरक्षा और मानव तस्करी जैसे गंभीर मुद्दों पर एक बार फिर बहस छेड़ दी है। राजधानी के डीडी नगर थाना क्षेत्र में बच्चों के शोषण और उनके साथ धोखाधड़ी का एक बड़ा रैकेट उजागर हुआ है। इस पूरे मामले का खुलासा होने के बाद छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने तुरंत संज्ञान लेते हुए पुलिस के साथ मिलकर बड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है।
कैसे हुआ इस बड़े रैकेट का भंडाफोड़?
यह पूरा मामला तब सामने आया जब डीडी नगर पुलिस थाने को एक अज्ञात कॉलर से बेहद महत्वपूर्ण सूचना मिली। सूचना देने वाले व्यक्ति ने पुलिस को बताया कि इलाके के एक ठिकाने पर कई बच्चों को ऐसी स्थिति में रखा गया है जहां वे बिल्कुल भी सुरक्षित नहीं हैं। वे बच्चे रो रहे हैं और किसी भी तरह अपने घर वापस जाना चाहते हैं, लेकिन कुछ रसूखदार और शातिर लोग उन्हें वहां से जाने नहीं दे रहे हैं। बच्चों की आजादी पर पूरी तरह से पाबंदी लगा दी गई है और उन्हें बाहरी दुनिया से पूरी तरह कट करके रखा गया है।
इस सूचना को गंभीरता से लेते हुए डीडी नगर थाने की पुलिस टीम और छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के प्रतिनिधि तुरंत हरकत में आए। जब संयुक्त टीम ने बताए गए ठिकाने पर छापा मारा और जांच शुरू की, तो वहां की हकीकत देखकर हर कोई दंग रह गया।
ट्रेनिंग और नौकरी के नाम पर बुना गया था झूठ का जाल
जांच के दौरान जो तथ्य सामने आए हैं, वे दिल दहला देने वाले हैं। पता चला है कि इस शोषण और धोखाधड़ी का शिकार हुए बच्चों की उम्र महज 16 से 17 वर्ष के बीच है, यानी वे सभी कानूनन नाबालिग हैं। इन सीधे-सादे बच्चों को सुनहरे भविष्य, अच्छी नौकरी और प्रोफेशनल ट्रेनिंग का झांसा देकर रायपुर बुलाया गया था। इनमें से अधिकांश बच्चे ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर पृष्ठभूमि के हैं, जो अपने पैरों पर खड़े होकर अपने परिवार का सहारा बनना चाहते थे।
जालसाजों ने इन बच्चों की मजबूरी और उनके भोलेपन का पूरा फायदा उठाया। रायपुर बुलाने के बाद, उनसे कथित ट्रेनिंग फीस, रजिस्ट्रेशन और सिक्योरिटी मनी के नाम पर भारी-भरकम रकम वसूली गई। मिली जानकारी के अनुसार, प्रत्येक बच्चे से लगभग 46 हजार रुपये जमा कराए गए थे। इन गरीब परिवारों ने यह रकम कैसे जुटाई होगी, इसका अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। किसी ने अपनी जमीन गिरवी रखी तो किसी ने भारी ब्याज पर कर्ज लिया, ताकि उनके बच्चे का भविष्य सुधर सके।
पैसे लेने के बाद शुरू हुआ प्रताड़ना का खेल
असली धोखा तब शुरू हुआ जब बच्चों से 46-46 हजार रुपये ऐंठ लिए गए। पैसे जमा होने के बाद उन्हें वह काम नहीं दिया गया जिसके बड़े-बड़े वादे किए गए थे। बल्कि उन्हें ऐसे अनैतिक और कठिन कार्यों में लगा दिया गया, जिसके बारे में उन्हें पहले कभी कोई जानकारी नहीं दी गई थी। जब इन नाबालिग बच्चों को अहसास हुआ कि वे एक बड़े जाल में फंस चुके हैं और उन्होंने इसका विरोध किया, तो उन पर मानसिक और शारीरिक दबाव बनाया जाने लगा।
बच्चों ने जब अपने घर लौटने की जिद की, तो आरोपियों ने उन्हें डराया, धमकाया और उनके पैसे लौटाने से साफ मना कर दिया। बच्चों को उनके माता-पिता से भी ठीक से बात नहीं करने दी जाती थी ताकि सच बाहर न आ सके। उन्हें एक तरह से बंधक बनाकर रखा गया था और उनसे जबरन वह काम कराया जा रहा था जो उनकी इच्छा के विरुद्ध था।
बाल अधिकार संरक्षण आयोग और पुलिस की सख्त चेतावनी
इस पूरे मामले पर छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने बेहद कड़ा रुख अख्तियार किया है। आयोग के अधिकारियों ने साफ कहा है कि नाबालिगों के साथ इस तरह का व्यवहार बाल श्रम, मानव तस्करी और धोखाधड़ी की श्रेणी में आता है, जिसे किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। आयोग ने डीडी नगर पुलिस को निर्देश दिए हैं कि इस घिनौने अपराध में शामिल सभी आरोपियों के खिलाफ सख्त से सख्त धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की जाए और उन्हें जल्द से जल्द सलाखों के पीछे भेजा जाए।
पुलिस अब इस मामले के हर पहलू की गहराई से जांच कर रही है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस रैकेट के तार कहां-कहां जुड़े हैं और क्या इसमें कोई बड़ा अंतरराज्यीय गिरोह शामिल है। इसके साथ ही उन बैंक खातों की भी जांच की जा रही है जिनमें बच्चों से ठगे गए पैसे ट्रांसफर करवाए गए थे।
अभिभावकों के लिए जरूरी संदेश
यह घटना समाज के लिए एक बड़ी चेतावनी है। छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने सभी अभिभावकों से अपील की है कि वे अपने बच्चों को किसी भी अनजान शहर या संस्थान में भेजने से पहले पूरी सावधानी बरतें।
* किसी भी नौकरी या ट्रेनिंग के सोशल मीडिया विज्ञापनों पर आंख मूंदकर भरोसा न करें।
* अगर कोई संस्थान काम देने के बदले पहले हजारों रुपये की मांग करता है, तो तुरंत सतर्क हो जाएं।
* बच्चों को भेजने से पहले उस कंपनी या संस्थान के लीगल स्टेटस और पते की भौतिक जांच जरूर करें।
* बच्चों के संपर्क में लगातार रहें और उनके व्यवहार में आने वाले बदलावों पर नजर रखें।
डीडी नगर पुलिस ने बच्चों को सुरक्षित रेस्क्यू करने की प्रक्रिया पूरी कर ली है और उन्हें जल्द ही कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद उनके माता-पिता को सौंप दिया जाएगा। इस खबर को ज्यादा से ज्यादा शेयर करें ताकि अन्य मासूम बच्चे और उनके परिवार ऐसे शातिर ठगों का शिकार होने से बच सकें।








