मिडिल ईस्ट में जारी तनाव का असर अब सीधे वैश्विक तेल बाजार पर दिखने लगा है। शांति की उम्मीदों को बड़ा झटका लगने के बाद कच्चे तेल की कीमतों में फिर तेज उछाल देखने को मिला है। गुरुवार को ब्रेंट क्रूड $103 के पार पहुंच गया, जिससे बाजार में हलचल मच गई है। इस तेजी के पीछे सबसे बड़ी वजह ईरान का अमेरिका के साथ सीधी बातचीत से इनकार करना बताया जा रहा है।
गुरुवार, 26 मार्च को कच्चे तेल की कीमतों में 1% से ज्यादा की तेजी दर्ज की गई। ग्लोबल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड करीब $103.46 प्रति बैरल तक पहुंच गया, जबकि अमेरिकी WTI क्रूड भी $91.54 प्रति बैरल के आसपास ट्रेड करता दिखा। पिछले कुछ दिनों में तेल बाजार में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। जहां कुछ दिन पहले कीमतों में गिरावट आई थी, वहीं अब एक बार फिर तेजी लौट आई है। इससे निवेशकों के बीच अनिश्चितता बढ़ गई है।
तेल की कीमतों में उछाल की सबसे बड़ी वजह ईरान का वह बयान है, जिसमें उसने अमेरिका के साथ किसी भी तरह की सीधी बातचीत से साफ इनकार कर दिया है। ईरान के विदेश मंत्री ने कहा कि भले ही कुछ देशों के जरिए संदेशों का आदान-प्रदान हो रहा हो, लेकिन इसे सीधे बातचीत नहीं माना जा सकता। उन्होंने पुराने एक्सपीरिएंस का जिक्र करते हुए कहा कि पहले भी बातचीत के दौरान हमले हुए थे, इसलिए फिलहाल सीधे वार्ता की कोई योजना नहीं है।
जहां ईरान बातचीत से इनकार कर रहा है, वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति ने दावा किया है कि दोनों देशों के बीच बातचीत जारी है और सकारात्मक दिशा में बढ़ रही है।हालांकि, दोनों देशों के अलग-अलग बयान बाजार में भ्रम की स्थिति पैदा कर रहे हैं, जिससे निवेशकों का भरोसा डगमगा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति भी तेल की कीमतों को प्रभावित कर रही है। दुनिया के कुल तेल सप्लाई का करीब 20% हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। यदि यहां कोई बाधा आती है, तो वैश्विक सप्लाई पर बड़ा असर पड़ सकता है, जिससे कीमतें और बढ़ सकती हैं।
बाजार के जानकारों का मानना है कि जब तक अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम नहीं होता, तब तक तेल की कीमतों में यह उतार-चढ़ाव जारी रहेगा।अगर हालात और बिगड़े, तो इसका सीधा असर पेट्रोल-डीजल की कीमतों और महंगाई पर भी पड़ सकता है।







