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जनगणना 2026: घर से लेकर अनाज तक, सरकार आपसे मांगेगी हर जरूरी जानकारी, लिव-इन कपल को मिलेगा शादीशुदा दर्जा

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देश की 16वीं जनगणना अब सिर्फ आबादी का आंकड़ा नहीं रहेगी, बल्कि इसे एक डिजिटल प्रोफाइल या ‘डिजिटल कुंडली’ के रूप में तैयार किया जाएगा। 1 अप्रैल 2026 से शुरू होने वाले पहले चरण के लिए 33 सवालों का क्वेश्चन बैंक तैयार किया गया है, जिसमें आपके घर, खाने-पीने की आदतों, सुविधाओं और वाहनों तक की जानकारी मांगी जाएगी।

खुद भर सकेंगे जानकारी

सरकार ने नागरिकों के लिए एक सेल्फ-एन्युमरेशन पोर्टल भी शुरू किया है, जहां लोग अपनी जानकारी खुद ऑनलाइन दर्ज कर सकते हैं। यह सुविधा दोनों चरणों – हाउसलिस्टिंग (HLO) और जनसंख्या गणना – के लिए उपलब्ध है। पोर्टल पर 33 अक्सर पूछे जाने वाले सवालों की पूरी लिस्ट दी गई है, ताकि लोगों को सुविधा हो।

पहला चरण 1 अप्रैल से

जनगणना का पहला चरण 1 अप्रैल 2026 से शुरू होगा और यह 30 सितंबर तक चलेगा। इस दौरान घर-घर जाकर या ऑनलाइन माध्यम से नागरिकों से 33 सवाल पूछे जाएंगे। हर राज्य और केंद्र शासित प्रदेश अपने-अपने इलाके में 30 दिनों के भीतर काम पूरा करेंगे।

पूछे जाने वाले मुख्य सवाल

  • घर की बनावट: घर के फर्श, दीवार और छत में कौन-कौन सी सामग्री इस्तेमाल हुई है।
  • परिवार का मुखिया: नाम, लिंग और समुदाय (SC, ST या अन्य) की जानकारी।
  • सुविधाएं और वाहन: पीने का पानी, बिजली जैसी बुनियादी सुविधाएं और घर में मौजूद वाहन।
  • खान-पान: परिवार में मुख्य रूप से किस अनाज का सेवन होता है।
  • शादीशुदा जोड़े: घर में कितने विवाहित जोड़े हैं। इस बार लिव-इन कपल्स को भी शादीशुदा दर्जा मिलेगा।
  • घर की स्थिति: मकान नंबर, बिल्डिंग नंबर और मालिकाना हक (अपना या किराए का)।

भवन नंबर से होगी शुरुआत

जनगणना अधिकारी मकान नंबर और भवन नंबर से शुरू करते हुए घर की स्थिति, परिवार के सदस्यों और मुखिया की जानकारी इकट्ठा करेंगे। मकान के उपयोग और परिवार के सदस्यों की संख्या के साथ-साथ घर के मालिकाना हक की जानकारी भी दर्ज की जाएगी।

लिव-इन कपल्स के लिए नया नियम

पहली बार आधिकारिक सवालों में लिव-इन रिलेशनशिप को मान्यता दी गई है। अगर कपल अपने संबंध को स्थिर मानता है, तो उन्हें शादीशुदा जोड़ा ही माना जाएगा। यह बदलाव सामाजिक ढांचे की वास्तविकताओं को जनगणना में सही ढंग से शामिल करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

इस बार की जनगणना न केवल देश की आबादी के आंकड़ों को दिखाएगी, बल्कि आने वाले दशक के लिए नीतियों और योजनाओं का आधार भी तैयार करेगी।

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