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जांजगीर-चांपा पुलिस की बड़ी कार्रवाई: उपनिरीक्षक निलंबित, FIR दर्ज न करने का मामला बना कारण

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जांजगीर चांपा संवाददाता – राजेन्द्र जायसवाल

जिला जांजगीर-चांपा , 30 मार्च 2026।
जिले की पुलिस व्यवस्था में जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए पुलिस अधीक्षक विजय कुमार पाण्डेय ने थाना अकलतरा में पदस्थ उपनिरीक्षक कृष्ण कुमार साहू को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई कर्तव्य में लापरवाही और नियमों के उल्लंघन के गंभीर आरोपों के चलते की गई है।

क्या है पूरा मामला?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, 27 मार्च 2026 की रात लगभग 8 बजे ग्राम रोगदा निवासी प्रकाश नोरगे मारपीट की शिकायत लेकर थाना अकलतरा पहुंचे थे। उन्होंने आरोपी विनोद एवं अन्य के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने की मांग की थी।
लेकिन आरोप है कि उस समय ड्यूटी पर मौजूद उपनिरीक्षक कृष्ण कुमार साहू ने नियमानुसार FIR दर्ज करने के बजाय दोनों पक्षों पर दबाव बनाकर थाने में ही समझौता करा दिया। यह कदम न केवल कानूनी प्रक्रिया का उल्लंघन माना गया, बल्कि पीड़ित को न्याय से वंचित करने जैसा भी समझा गया।

पुलिस अधीक्षक ने लिया सख्त संज्ञान
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक विजय कुमार पाण्डेय ने तुरंत कार्रवाई करते हुए उपनिरीक्षक को निलंबित कर दिया। यह संदेश स्पष्ट है कि पुलिस विभाग में किसी भी प्रकार की लापरवाही या मनमानी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

जांच SDOP को सौंपी गई
इस पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच SDOP अकलतरा प्रदीप कुमार सोरी को सौंपी गई है। जांच में यह देखा जाएगा कि किन परिस्थितियों में FIR दर्ज नहीं की गई और क्या इसमें अन्य किसी की भी भूमिका रही है।
कानून व्यवस्था पर असर
इस घटना ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आम जनता के लिए थाना पहला न्यायिक दरवाजा होता है, जहां उन्हें निष्पक्ष और त्वरित कार्रवाई की उम्मीद रहती है। ऐसे में FIR दर्ज न करना और समझौते के लिए दबाव बनाना न्याय व्यवस्था की मूल भावना के विपरीत है।

प्रशासन का स्पष्ट संदेश
इस कार्रवाई के माध्यम से जिला पुलिस प्रशासन ने यह स्पष्ट कर दिया है कि—
कानून से ऊपर कोई नहीं है
लापरवाही या पक्षपात करने वाले अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई होगी
पीड़ितों को न्याय दिलाना सर्वोच्च प्राथमिकता है
थाना अकलतरा का यह मामला पुलिस विभाग के लिए एक चेतावनी भी है और सुधार का अवसर भी।
थाना अकलतरा का यह मामला पुलिस विभाग के लिए एक चेतावनी भी है और सुधार का अवसर भी। यदि इसी प्रकार सख्ती और पारदर्शिता बनी रही, तो आम जनता का विश्वास पुलिस व्यवस्था में और मजबूत

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